Skip to playerSkip to main content
  • 1 week ago
बिहार के 'फैन' गली में बनाए जाने वाले पंखों की डिमांड के चलते कई राज्यों में फेमस है. पढ़ें गया से रत्नेश कुमार की रिपोर्ट-

Category

🗞
News
Transcript
00:06गली गली में बनते हाथ पंखे कभी इन परंपरागत पंखों की खुब दिमांड हुआ करती थी लेकिन तकनीकी विकास, पिछली
00:15के उपलब्धता और AC कूलर और सेलिंग फैन के बढ़ते प्रभाव के बीच ये गुम होते जा रहे हैं
00:22आज भी बिहार की गया की पंखा गली हाथ पंखा बनाने की परंपरा को संजो कर रखा हुआ है
00:29साथी तीश तहवार और वर्ट सावित्री पूजा ने इस धंदे को बचा कर रखा है
00:52बिहार से रिफ हुआ नवादा हुआ जहानाबाद हुआ बंगाल हुआ तो पुरुदेश में यहां के पंखा जाता है
01:00हाँ सालों भर हम लोग पहले काम करते था मन से काम करते था अब आस रह गया बट सभीत्री
01:05पूजा रह गया
01:22यहां कभी 15 लाख हाथ के पंखे बिखते थे लेकिन अब ये 5 लाख तक के कारोबार पर आकर सिमट
01:29गए है
01:30इन पंखो के डिमांड पिहार के साथ साथ जारकन ओडिशा, यूपी पश्य मंगाल में खूब थी
01:36तब 12 महीने कारिगरों को काम मिलता था लेकिन अब धंदा मंदा हुआ है
01:42साथी कारिगरों को महस्तीन महीने का सीजनल काम मिल पाता है
01:47For 6 months, they have to support their hand-loom or somewhere.
02:18Bihar में भीशन गर्मी के बावजूद हाथ पंखे की घरती डिमाड ने कारीगरों के होसलों को पस्त कर दिया है.
02:26अब देखना है कि पंखा गली के कारीगर कब तक अपनी परंपरा का निर्वहन कर पाते हैं?
02:31वो दिन दूर नहीं जब हाथ पंखों की जगा सिर्फ फोटो फ्रेम में दिखाई देगी.
02:37ETV भारत के लिए गया से रतनेश कुमार की रिपोट.
Comments

Recommended