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00:00आईए, आईए, करीब आजाईए, आज मैं आपको वो कहानी सुनाता हूँ जो वक्त से भी पुरानी है
00:06एक ऐसी मुहब्बत की दास्तान जो सहरा की रेत पर लिखी गई और महलों की दिवारों में आज तक गुंचती
00:14है
00:14ये कोई आजकल की कहानी नहीं, ये तो वो दास्तान है जो नसलों से सीना बसीना हम तक पहुंची है
00:21तो बस कान लगाईए और सुनिये क्योंकि ये कहानी सहरा की हवाएं खुद सुनाती हैं और महलों के दरो दिवार
00:30इसके रासदार हैं
00:32तो जनाब किसा कुछ यू है कि एक बहुत बड़ी शानदार सल्तनत थी
00:38ऐसी सल्तनत जहां जितनी चमक दमक थी, उतनी ही गहरी साजशें भी थी
00:44और उसी सल्तनत के बादशा का एक बड़ा वफादार वजीर था
00:48नाम का तो बड़ा शोहरा था उसका, पर उसके दिल में क्या चुपा था, ये कोई नहीं जानता था
00:54और जनाब इस वजीर का असल खजाना तो कुछ और ही था
00:58एक ऐसा खजाना जिसे वो जमाने की नजरों से चुपा कर रखता था
01:03वो थी उसकी बेटी, अलवर्द फिल अक्माम, क्या खुबसूरत नाम था
01:09मतलब घलाफ में चुपावा गुलाब, और सच पूछिये तो वो थी भी ऐसी
01:14उसकी खुबसूरती और समझदारी, सब कुछ महल की उँची दिवारों के पीछे एक रास था
01:20मगर भाई किस्मत के खेल तो कोई नहीं जानता न, इसी सल्तनत में एक और नौजवान भी रहता था
01:27नाम था उसका अनसुलवजूद, दिल का बड़ा साफ मगर रूह बेचैन आवारा थी
01:34वो तो था एक आजाद पंची, और दूसरी तरफ अलवर्द फी अकमाम, एक सोने के पिंजरे की कैदी
01:40फिर आखिर कार वो दिन आ ही गया, जब किस्मत ने इन दो अलग-अलग दुनियाओं को आमने सामने लाखडा
01:48किया
01:48हुआ यूँ के अनसलवजूद की नजर पहली बार अलवर्द फी अकमाम पर पड़ी
01:54और बस वो तो जैसे सब कुछ भूल गया, आँखे तो जैसे पलक छपकना भूल गई
01:59और बे अख्तियार इसके मुझसे निकला, ये, ये हकीकत है या मैं कोई खौब देख रहा हूं
02:21बस ये चंद लवज ही तो थे और इनकी रूहें हमेशा के लिए एक दूसरे से जुड़ दें
02:27लेकिन ठहरिये, हर अच्छी कहानी में कोई न कोई मोड तो आता है न
02:32ये मोहबत इतनी आसानी से कहां मिलने वाली थी
02:36जैसे ही इस इस इश्क की भनक बादशा के कानों तक पहुँची
02:39और ये भाई उसका खुसा तो जैसे आसमान को चूने लगा
02:43कहते हैं कि उसके कहर से महल की दिवारे तक काप गरी थी
02:48बादशा की आवाज में खुरूर और खुसा साफ चलक रहा था
02:52वो गुरज कर बोला
02:54ना मुम्किन ये हरगिस नहीं हो सकता
02:57एक आमसा लड़का और मेरे वजीर की बेटी
03:01ये तो मेरी सल्तनत की मेरी तोहीन है
03:04और बादशा का हुक्म तो पर्थर पे लगीर होता है
03:07उसने एक ही पल में इन दो महबत करने वालों को जुदा कर दिया
03:11अनसुल वजूद को
03:13उसे तो मुल्बदर करके तपते हुए सहराम में बेयारों मददगार छोड़ दिया
03:17और उलवर्थ फिल अकमाम को
03:19उसे महल के एक उचे मिनार में कैद कर दिया गया
03:22एक सुनहरे पिंजरे में हमेशा के लिए
03:24बस यहां से उनके जुदाई का वो लंबा सफर शुरू हुआ
03:30जो सालों पर पहला हुआ था
03:32दो दिल, दो अलग दुनियाएं और बीच में सिर्फ खामोशी
03:37उदर अनस अलवजूद
03:39वो बिचारा सहराओं की खाक चानता रहा
03:42पहाडों से टकराता रहा
03:44दर्याओं को पार करता रहा
03:46लेकिन हर मन्जर में, हर जगा
03:48उसे सिर्फ एक ही चहरा नजर आता था
03:51एस सफर सिर्फ कदमों का नहीं था
03:53ये तो उसकी रू का सफर था
03:55अपनी महबत को ढूंडने का सफर
03:58कहते हैं के एक रात
04:00उसने खुले आस्मान के नीचे
04:02खड़े होकर कसम खाई थी
04:03मैं तुम्हें ढूंड निकालूंगा
04:05चाहे उसके लिए मुझे जमीन का
04:07आखरी कोना भी क्यों नचानना पड़े
04:09और यहां
04:11महल के इस उचे मिनार की तनहाई में
04:14अलवर्द फिल अक्माम ने भी
04:16हिम्मत नहीं हारी थी
04:17उसने उमीद का दामन धामे रखा था
04:20उसके दिल में एक छोटा सा दिया जल रहा था
04:23जिसे कोई तूफान बुझा नहीं सकता था
04:26वो खूब जानती थी
04:28कि कैद सिर्फ उसका जिसम हुआ है
04:30उसका दिल नहीं
04:31वो खुद को तसली देती
04:33जिसम कैद हो सकता है
04:35What do you do?
04:45and the end of the day
05:08about his conflict, where he died, was he going to act,
05:12where his soul went, as he had the love of him.
05:13He knew his death. He came to us.
05:16He came to us, and he came to this mystery,
05:16he came to us where he was going to get the vaccine,
05:19where he came to his heart.
05:19he came to his grace,
05:23the meeting of the night,
05:23the officers of the night came to the night,
05:24and he came to his face with all their parents,
05:28the thinkers of the night,
05:29who got to the night,
05:31and his love came to the night,
05:35and the night came to the night,
05:37ुछ-फ-फ-फ-व-थ-व-व-थ-व-थ-व-थ-व-थ-व-थ-व-थ-व
05:41-थ-व-,
05:48और अनसल वजूद ने जवाब दिया, मैंने वादा जो किया था, बस इन दो जुम्लों में, इन दो जुम्लों में
05:55साथ साल का इंतजार सारा दर्द और सारी महबत से मटाई थी।
06:00और जब बादशाय ने ये मनजर देखा, उसने इनकी आँखों में वो सची महबद देखी, तो उसका पक्कर जैसा दिल
06:07भी फेगल गया, वो समझ गया कि ये कोई आम लगाओ नहीं, ये तो वो महबद है, जिसके फैसले जमीन
06:13पर नहीं, अस्मानों पर होते हैं।
06:16बादशाय ने अपने ताकत के सामने महबद को जीते हुए देखा और अपनी हार मान ली, उसे एहसास हुआ कि
06:23सची महबद की ताकत दुनिया की हर सल्तनत से बढ़ी होती है, फिर उसने ना सिर्फ उने एक होने की
06:30इजाज़त दी, बलके खुद उनके रिष्टे को अपनी दु
06:45ही है, सबक ये है कि सची महबद को ना वक्त का गुजरना हरा सकता है और ना ही मीलों
06:52की दूरियां, सची महबद अपना रास्ता खुद बनाती है और तकदीर भी बदल देती है, और बस उसी दिन से
07:02इन दोनों की कहानी एक मिसाल बन गई, एक ऐसी रोशन मिसाल जो हमेशा य
07:15अगर मोहबद ऐसी सची हो, तो उसके लिए भला कौन सी दिवार है जो तोड़ी नहीं जा सकती?
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