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  • 2 days ago
Toxic Horror Story | Real Horror Stories | सच्ची कहानी | Horror Stories in Hindi | Scary Town Hindi

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00:29WISHAL KEMICAL FACTORY
00:30सुन्दर युवती अर्चना चला रही थी
00:32उसका चेहरा डर से सफेद पर चुका था
00:35और उसकी आँखों में किसी अंजाने खत्रे की दहशत साफ दिखाई दे रही थी
00:41वो कार को सणकों पर पागलों की तरह दोड़ा रही थी
00:45जैसे मौत खुद उसके पीछे दोड़ रही हो
00:48कुछ देर बाद अर्चना ने कांपते हाथों से अपना मोबाईल निकाला
00:52और एक नंबर डाइल किया
00:54फोन दूसरी तरफ से उसके भाई अतुल ने उठाया
00:58अहां अर्चना क्या हुआ इतनी रात को क्यों फोन किया है
01:02सब कुछ ठीक तो है
01:03भाईया मेरी बात गौर से सुनिये
01:06मैं आपको बहुत है इंपॉर्टन बात बताना चाहती हूँ
01:09इससे पहले कि अर्चना कुछ और कहती
01:11फोन कट जाता है
01:13हलो हलो
01:15उसी पल अचानक उसकी कार के सामने
01:18एक भयानक और अजीब सी परचाई उभराई
01:21डर के मारे अर्चना ने
01:23जोर से ब्रेक तपाया
01:25अगले ही पल कार बुरी तरह टकराई
01:28और जोरतार धमाके के साथ
01:30एक भयानक ब्लास्ट हुआ
01:32पूरी कार आग और धुए में बतल गई
01:37इस भयानक घटना के पांस साल पाद
01:40रवीपुरम जो कभी भारत का जाना माना
01:43इंडस्ट्रियल टाउन था
01:45अब एक हामोश कब्रगाह बन चुका था
01:48समुद्र के किनारे बसा ये शहर
01:50कभी अपनी विशाल केमिकल फैक्टरी के लिए
01:53मश्यूर था
01:54जहां हजारों मजदूर काम किया करते थे
01:57लोग इसे रोजकार का शहर कहते थे
02:00बच्चे स्कूल जाते थे
02:02शाम को बाजार खुलते थे
02:04और फैक्टरी की सीटी
02:05पूरे शहर की धड़कन बन चुकी थी
02:08लेकिन लगभग पांस साल पहले
02:10एक रात रवी पुरम अचानक मर गया
02:14उस रात फैक्टरी में एक भयानक विस्फोर्ट हुआ था
02:17सरकारी रिपोर्ट में इसे टॉक्सिक गैस लिकिज कहा गया
02:21सैक्डो मजदूर फैक्टरी की अंदर ही भस गए
02:25कुछ की मौत हो गई थी तो कुछ गायब हो गए थे
02:29उसके बाद पूरे इलाके से
02:31इंसानों के लापता होने की खबरे आने लगी थी
02:34सरकार में उस इलाके को
02:36रिस्टिक्टिट जोन खोशित कर दिया था
02:38कोई भी अंदर नहीं जा सकता था
02:41कोई सवाल नहीं पूछ सकता था
02:43रवी पूरम अब एक सहरीला भूतिया शहर बन चुका था
02:49दिल्ली की फ्रेंड्स कॉलोनी में
02:51अतुल शाम को ठका हरा अपने आफिस से लोटकर घर आता है
02:54घर के अंदर कदम रखते ही
02:57उसकी नजर अपनी बहन अरचना की तस्वीर पर पड़ती है
03:00अतुल धीरे धीरे उस तस्वीर के पास जाता है
03:04दुनिया तुम्हारे बारे में कुछ भी कहे अरचना
03:07लेकिन मेरा मन अभी भी मानने को तयार नहीं है
03:10कि तुम इस संसार में नहीं हो
03:12मुझे विश्वास है कि तुम मुझे एक दिन सरूर मिलोगी
03:16ये कहते हुए उसकी आँखों से आंसों किर पड़े
03:19अतुल चुप चाप किचन में गया
03:22और खुद खाना बना कर खाने लगा
03:24कुछ देर बाद वो अपने बेडरूम में पहुँचा
03:27और सोने की कोशिश करने लगा
03:29थोड़ी ही देर में वो गहरी नीन में चला गया
03:33अतुल को सोए हुए थोड़ी देर ही हुई थी
03:36कि उसने खुद को एक फैक्टरी के अंदर खड़ा पाया
03:39चारों और गहरा अंधेरा था
03:42और हवा में जहरिली धूंद तैर रही थी
03:45दिवारों से रिस्ता हुआ केमिकल जमीन पर टपक रहा था
03:50ये क्या मैं तो सो रहा था फिर मैं यहां कैसे आ गया
03:55तब ही उसके कानों में एक जानी पहचानी आवाज कुची
03:59भाया मैं आपके पीछे आऊँ
04:02अतुल जैसे ही पीछे मुडा उसने अपनी बेहन को देखा
04:06लेकिन ये वो अर्चना नहीं थी जिसे वो जानता था
04:11इसकी आँखे सड़ी हुई थी तवचा जुलसी हुई थी
04:15तुम्हें क्या हो गया है
04:17बाया मैं यहां फस गई हूँ
04:20मुझे निकालो
04:22वो हमें नहीं जोड़ रहे
04:24हमें मुक्त कर दो
04:26हमें मुक्त कर दो
04:28अचानक अतुल की आँखें फड़पडाते हुए खुल जाती है
04:32अतुल बिस्तर पर उटकर बैठ जाता है
04:35और लंबी-लंबी सांसे लेने लगता है
04:37फिर से वही भयानक सपना
04:40पिछले पांस सालों से ये सपना
04:42मुझे लगतार क्यों आ रहा है
04:44जरूर इस सपने का
04:46मेरी बेहन से कोई ना कोई लिना देना है
04:48कुछ देर बाद उसने फिर सोने की कोशिश की
04:51लेकिन नीद नहीं आई
04:55अगले दिन आफिस जाने से पहले
04:57अतुल ने अपना कम्प्यूटर खोला
04:59उसने एक पांस साल पुराना मेल देखा
05:01जिसे वो रोज पढ़ता था
05:03उस मेल में लिखा था
05:05कि अरजना की मृत्यू एक दुरगटना में हो गई थी
05:08और बदकिस्मती से उसका कोई शव नहीं मिला था
05:12अतुल कुछ देर तक स्क्रीन को देखता रहा
05:15फिर कम्प्यूटर बंद कर दिया
05:18तब ही अचानक डोर बेल बच्ती है
05:21अतुल उटकर दर्वाजा खोलने चला जाता है
05:24बाहर उसकी करल्फरिंट तानिया
05:26और उसका दोस्त गौरव खड़े थे
05:28अतुल हलकी मुस्कान के साथ
05:30दोनों को अंदर लाता है
05:32और ड्रोइंग रूम में बिठाता है
05:34क्या हुआ?
05:35ऐसा लग रहा है जैसे तुम रात भर नहीं सोए
05:38हाँ, रात भर मुझे नील नहीं आई
05:41तानिया अचानक गंभीर हो जाती है
05:44कल मैंने यूटूब पर एक विडियो देखा था
05:46टॉक्सिक रवीपूरम एक्सपरिमेंट इक्सपोज़ज
05:50ये सुनकर अतुल चौक जाता है
05:52क्या? बताओ, कहा है वो विडियो?
05:55मैंने विडियो में देखा था
05:57कि एक यूटूबर बता रहा था
05:59कि रवीपूरम फैक्टरी में सरकार और कंपनी ने मिलकर
06:02इंसानों पर केमिकल एक्सपरिमेंट किया था
06:05उन्हें जहर दिया गया था
06:06लोग मरे नहीं
06:08बल्कि चलती फिरती लाशों में तबदील हो गए
06:11ना पूरी मौत ना पूरी जिंदगी
06:13विडियो अपलोड होने के कुछ ही देर बाद
06:16उसे यूटूब से डिलीट कर दिया गया
06:18और अब उसका कहीं कोई निशान नहीं है
06:21कमरे में एक अजीब सी खामोशी फैल गई
06:23हो सकता है कि सरकार ने उस यूटूबर को ही गायब करवा दिया हो
06:27जरूर कोई ऐसा रहसे है जिससे सरकार हम सबसे चुपा रही है
06:31वरना बताओ रवी पूरम शहर एक ही रात में लाशों में कैसे बदल गया
06:37और आखिर वहां ऐसा क्या है कि उस इलाके में सरकार किसी को जाने ही नहीं देती
06:42यहां तक कि उसके बारे में बात करना भी मना है
06:46अतुल गहरी सोच में डूप जाता है
06:48तुम दोनों सही कह रहे हो
06:50जरूर वहां कोई बड़ा राज है
06:52मैं तो बस उस दिन को कोशता हूँ
06:54जब मेरी बहन अरचना फार्मा स्टेक कंपनी में काम करने गई थी
06:58और मैंने उसे इसकी इजासत दी थी
07:01फिर एक दिन कंपनी ने उसे रवी पुरम फैक्टरी में किसी स्पेशिल प्रोजेक्ट के लिए भेजा
07:06और उसके बाद वो कभी घड नहीं लोटी
07:09बस कंपनी ने एक आपचारिक मेल भीज दिया
07:12कि अरचना की मृत्यू एक दुरगटना में हो गई है
07:15लेकिन कोई शव नहीं मिला और फाइल बंद कर दी गई
07:19लेकिन अरचना के गायब होने के मील आने के कुछ दिन पहले
07:22रात के समय अरचना का मेरे पास फोन आया था
07:26और फोन पर वो बहुत ही घबराई हुई थी
07:28और उसने बस इतना कहा कि
07:30वो मुझे बहुत ही जरूरी बात बताने वाली है
07:33और फिर उसके बाद कॉल डिसकनेक्ट हो गया
07:36मैंने दुबारा फोन लगाने की कोशिश की लेकिन फिर फोन नहीं लगा
07:40और उसके बाद अर्चना की मौत की खबर मिली
07:44गौरफ कुछ पल तक चुप रहा
07:45फिर बोला
07:46इतने लोगों का अचानक गायब होना
07:49वीडियो का हड़ जाना
07:51मेरी बात पर विश्वास करो अतुल
07:53मुझे लगता है कि ये सब एक्सिडेंट नहीं है
07:56ये एक ऐसा करवा सच है
07:58जिसे हम सबसे छुपाया जा रहा है
08:01अतुल ने तानिया की ओर देखा
08:03अब मुझे तुम दोनों की बातों में सचाई नजर आने लगी है
08:07क्योंकि जब से मेरी बेहन अरचना लापता हुई है
08:10तब से मुझे एक ही सपना आता है
08:12इतना कहकर अतुल अपने सपने के बारे में दोनों को बताते हुए कहता है
08:17और सपने में अर्चना मुझसे यही कह रही होती है
08:20हमें मुक्त करो, हमें मुक्त करो
08:24कमरे में कुशपलों के लिए एक तरावना सन्नाटा चा गया
08:28तानिया गहरी सोच में डूब गई
08:30मुझे लगता है कि हम तीनों को वहाँ जाना चाहिए
08:34गौरव चौक गया
08:35लेकिन वहाँ जाना तो मना है न
08:39जानती हूँ, इसलिए हम तीनों को वहाँ चुप चाप जाना चाहिए
08:42अगर हम कोशिश करेंगे, तो काम्याब हो जाएंगे
08:45तुम ठीक कह रही हो, वो इलाका सरकार में सील किया है
08:49लेकिन वहाँ जाने के और भी कई रास्ते है
08:52अतुम मैप निकालता है
08:55पिछले पांच सालों से मैं यही सोच रहा था
08:58लेकिन वहाँ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था
09:01लेकिन अगर मेरे दोनों दोस्त मेरे साथ हैं
09:03तो फिर मुझे किस बात की चिनता
09:06गौरफ की आँखों में डर चलगता है
09:08बात तो सही है
09:10लेकिन मैंने ये भी सुना है कि
09:12उस घटना के बाद वहाँ से गुजरने वाले
09:14आम नागरिक भी गायब हो गए थे
09:17फिर उन घटनाओं के बाद ही
09:19उस रोड को भी सील कर दिया गया
09:20और उसे इंफेक्टिक टॉक्सिक जोन घोशित कर दिया गया
09:24जरूर कोई बड़ा और गहरा राज है
09:27हमें चलना चाहिए
09:28मुझे लगता है कि समय आ गया है
09:30ये जानने का कि आखिर उस शहर के साथ
09:33और मेरी बहन के साथ क्या हुआ था
09:36कुछी देर में तीनों का प्लैन तैह हो जाता है
09:38अगले दिन वो तीनों तयार होकर
09:41अपनी कार में बैठ कर
09:43रवी पूरम की ओर निकल पड़ते हैं
09:45उस जहरीले शहर की तरफ
09:47जहां से अब तक कोई सच्चाई
09:49जिन्दा वापस नहीं आई थी
09:52कई घंडों की यात्रा के बाद
09:54अचानक अतुल ने अपनी कार
09:55जंगल के किनारे रोक दी
09:57चारों और घंडा सन्नाटा
10:00पहला हुआ था और फेडों के बीच
10:02एक अजीब सी धंडी हवा
10:04बह रही थी
10:06क्या हुआ तुमने कार क्यों रोकी
10:08इसके आगे हमें पैदल ही जाना पड़ेगा
10:10अगर हम कार लेकर आगे गए
10:12तो पुलिस हमें रोक लेगी
10:14अतुल ने मैप निकाला
10:16मैप की अनुसार
10:18इस जंगल से होते हुए हम पैदल
10:20कुछी घंटों में रवीपुरम पहुँच सकते हैं
10:23ठीक है चलो चलते हैं
10:26तीनों जंगल में धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे
10:29कई घंटों के बाद
10:31वो तीनों रवीपुरम पहुच गए
10:33पूरा शहर वीरान पड़ा था
10:35घरों के बाहर कपड़े लटके हुए थे
10:38जैसे लोग अचानक सब कुछ छोड़कर कायब हो गए हो
10:42देखो घरों के बाहर कपड़े लटके हुए है
10:45ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ
10:47जिन्दी की अचानक थम गई हो
10:49चलो आगे चलते हैं
10:51घूमते घूमते वो तीनों
10:53एक उजड़े हुए घर के अंदर पहुच गए
10:55अंदर खुसते ही
10:57एक सड़ी हुई बदबू
10:58उनकी नाच से टकराई
11:00ओ माइग गॉड
11:03यहाँ तो बहुत भयंकर बदबू आ रही है
11:06गौरव की नजर सामने रखे
11:08सड़े हुई खाने पर पड़ी
11:09तानिया जरा वहाँ देखो
11:12वहाँ खाना पड़ा है
11:13ऐसा लग रहा है जैसे कोई
11:15यहाँ खाना खा रहा था
11:17और अचानक उठकर चला गया हो
11:18खाना वैसा का वैसा ही पड़ा हुआ है
11:21बस सड़ चुका है
11:23बदबू इसी से आ रही है
11:24तब ही अचानक तीनों के कानों में
11:27एक भयानक आवास टकराई
11:29उस आवास को सुनते ही
11:31उनके रोंग्टे खड़े हो गए
11:33यह कैसी आवास थी
11:35पता नहीं यह शहर तो
11:48जैसे किसी मरे हुए शरीर के भीतर
11:51जल रही आग हो
11:53आखे लिए कौन है
11:54वो लाल आखो वाला प्राणी
11:57धीरे धीरें की ओर बढ़ने लगता है
11:59उसके चेहरे का मांस
12:01जगे जगे से भटा हुआ था
12:03उसकी आखों से खून बह रहा था
12:06और उसका चलना
12:17अगले ही बलवो भयानक मानव
12:19बड़ी फोर्टी से तानिया की ओर बढ़ा
12:22अतुल और कौरव को समझ बाते
12:24इससे पहले ही उसने अपने दान
12:26तानिया की गर्दन में करा दिये
12:28मा मुझे बचाओ
12:31मुझे बचाओ
12:32oh
12:34I don't know
12:38I won't
12:44Don't
12:45go
12:46Don't
12:47Don't
12:47Don't
12:48Don't
12:48Don't
12:50Don't
12:54Don't
12:55अतुल की आँखों से आसों बहने लगे
12:57तानिया मर चुकी है अतुल
12:59अगर अपनी जिन्दीगी बचानी है
13:01तो यहां से भागो
13:02मुझे लगता है ये जॉम्बी इस शेहर में
13:05अकेला नहीं है
13:06हो सकता है रवी पुरम में इसके जैसे बहुत हो
13:09गौरव अतुल का हाथ पकड़ कर
13:12उसे घर से बाहर खींच लाता है
13:14तब ही वो जॉम्बी जैसा दिखने वाला मानव भी बाहर आजाता है
13:18और एक भयानक आवाज निकालने लगता है
13:21ये कैसी आवाज निकाल रहा है
13:23ऐसा लग रहा है जैसे ये किसी को चिताओनी दे रहा हो
13:26जैसे किसी को बुला रहा हो
13:28अगले ही पल पूरे रवी पुरम में
13:31भयानक आवाजों का शोर गूजने लगता है
13:35मेरा शक सही निकला
13:36इस शहर में ये जॉम्बी अकेला नहीं है
13:38ऐसे बहुत सारे जॉम्बीज है
13:41हमें यहां से भागना होगा
13:42अचानक पूरे शहर में उठ रही भयानक आवाजें और तेज हो जाती है
13:47वो शोर जैसे हर कली, हर खंडहर
13:50और हर तूटी मारत से निकल रही थी
13:53गौरव घबरा कर चारों ओर देखने लगता है
13:56तब ही उसकी नजर दूर खड़ी एक चली हुई फैक्टरी पर पढ़ती है
14:01हमें उस फैक्टरी के अंदर छिपना होगा
14:04मुझे लगता है कि इस तरह के दिखने वाले जॉम्बीज चारों ओर से हमें खेडने आ रहे हैं
14:09चलो, वहां जाकर चुपते हैं
14:11गौरव और अतुल अपने पूरी ताकत लगाकर भागने लगते हैं
14:16कुछी देर में वह फैक्टरी के अंदर पहुच गए
14:19फैक्टरी के अंदर कदम रखते ही उनकी नजर चारों ओर पड़ी हुई जली हुई लाशों पर पड़ी
14:26जली हुई चम्री, काले पड़े शरीर और हवा में फैली मौत की बदबू उस जगह को और भयानक बना रही
14:34थी
14:34यहां तो जली हुई लाशों का धेर लगा हुआ है
14:38लगता है यह मश्दूर होंगे
14:39फैक्टरी में आग लगने की वजह से शायद यह कभी बाहर निकल ही नहीं पाए
14:44अचानक उन जली हुई लाशों में हलचल होने लगती है
14:48काली पड़ी उंगलियां हिलने लगती है
14:51गर्दन छटके से उठती है और सड़ी हुई आँखें खुल जाती है
14:56यह कैसे हो सकता है यह सब तो मरे हुए लोग थे ना
15:00देखनें से तो लग रहा है कि इन्हें जले हुए काफी समय हो गया है
15:04अगले ही पल वो जले हुए मजदूर उठकर खड़े हो गए
15:08वो अपनी कर्तन बड़े ही विचित्र अंदास में इधर उधर खुमाने लगे
15:14यह भी जॉम्बी बन चुके हैं यह ना मरे हैं ना सिंदा हैं यह जॉम्बीज हैं
15:20इसका मतलब वो यूच्विबर सही कह रहा था
15:23यहां जरूर कोई बहुत भयानक प्रयोग चल रहा है
15:26अगली ही पल वो जले हुए जॉम्बी मजदूर अतुल और गौरव की ओर पढ़ने लगे
15:31तब ही अचानक गौरव के कानों में एक जानी पहचानी आवास टकलाई
15:36यहां आजाएए नहीं तो वो सारे जॉम्बीज आपका खून पी जाएंगे
15:42अतुल चौंक गया यह तो मेरी बहन अरचना की आवास है
15:45इसका मतलब मेरा शक सही था अरचना जिन्दा है चलो चलती
15:50और दोनों ने आवास की दिशा में दोड़ना शुरू कर दिया
15:54कुछी देर में वो फैक्टरी की एक ऐसे हिस्से में पहुँच गए
15:58जहां चारो और गहरा सन्नाटा फैला था
16:01अगले ही पल अरचना बाहर आ गई
16:04उसे देखते ही अतुल का शरीर काप उठा
16:08उसका चेहरा बिलकुल वैसा ही था
16:10जैसा वो अपने सपनों में देखता आया था
16:13अरचना ये तुम्हे क्या हो गया
16:16अरचना की आँखों से आँसू बहने लगे
16:19मैं अब इनसान नहीं हूँ
16:22मेरे शरीर के अंदर खून नहीं
16:24बलकि केमिकल बह रहा है
16:26मैं एक तरह से टॉक्सिक बन चुकी हूँ
16:29बाहर जो मजदूर तुम्हें मिले
16:32उनके शरीर के अंदर भी
16:34वही भयानक प्रयोक किया गया था
16:37वो सब टॉक्सिक है
16:39लेकिन तुमने हम पर हमला क्यों नहीं किया
16:42हमने तो सुना है कि
16:43जॉंबी अपना पराया नहीं पहचानते
16:46अर्चना की आँखों से आसू टपकते रहे
16:48बस यू समझ लो
16:51कि मैं अपनी इच्छा शक्ती से
16:53खुद को जॉंबी बनने से रोक रही हूँ
16:55लेकिन मैं जादा देर खुद को रोक नहीं पाऊंगी
16:59मैंने किसी का खुण नहीं पिया है
17:02मैं बस भाईया के इंतिजार में
17:04खुद को भूखा प्यासा रखे हुए थी
17:07लेकिन अब मेरी इच्छा शक्ती कमजोर पड़ रही है
17:10अतुल की आँखों से आसू बहने लगे
17:14लेकिन ये सब हुआ कैसे
17:16अर्चना की आँखों में क्रोध चमकने लगा
17:19जब मैं यहां आई थी
17:21तब मैंने देखा
17:23कि यहां एक बहुत ही भयानक प्रयोक चल रहा था
17:26हमसे जूट बोला गया
17:28कि ये एक केमिकल फैक्टरी है
17:31लेकिन सच में
17:33जॉम्बी बनाने की फैक्टरी थी
17:35यहां इंसानों को जॉम्बी में
17:37बदला जा रहा था
17:38ताकि उनके शरीर से
17:40नई नई दवाईया बनाई जा सके
17:43उसकी आवास में
17:45दर्द और गुस्सा खुल चुका था
17:47लेकिन अचानक प्रयोक
17:49विफल हो गया
17:50जिन वेग्यानिकों ने मजदूरों को
17:52जॉम्बी बनाया था
17:54उन्ही मजदूरों ने उन्हें काट लिया
17:57और फिर धीरे धीरे
17:59उन्होंने सारे मजदूरों को
18:01मार कर जॉम्बी बना दिया
18:03अब सरकार को
18:05यह पता चला तब उसने
18:06फैक्टरी में भयानक विस्फोट करवा दिया
18:09और पूरे शहर को
18:11शम्शान बना दिया
18:12ताकि यह सच दुनिया को पता न चले
18:15सब को जूट बताया गया
18:18अर्चना की आँखों में
18:20नफरत और दर्द
18:21एक साथ चल रहे थे
18:23मैं यह राज जानती थी
18:25मैंने भागने की कोशिश की
18:28आपको फोन लगाया
18:30लेकिन बतकिस्मती से
18:31कॉल कट हो गई
18:32मेरी कार के सामने एक जॉम्बी आ गया
18:35कार टकरा गई
18:37और उसने मुझे काट लिया
18:39तो सरकार इन सब को कब तक रो पाएगी
18:42अगर ये रवीपुरम से बाहर निकल गए
18:45तो पूरी दुनिया को जॉम्बी बना देंगे
18:47लेकिन हाप इसका अंत कर सकते हैं
18:51अतुल चौन गया
18:52कैसे?
18:53इसी फैक्टरी के अंदर बेस्मिंट में
18:56इस फैक्टरी का मालेक राघव रहता है
18:59वो भी जॉम्बी बन चुका है
19:01फर्क सिर्फ इतना है
19:03कि वो एक ऐसा जॉम्बी है
19:05जो इंसानों की तरह सोच सकता है
19:08और वही सबसे ज़ादा खतरनाग है
19:11उसने यहां से गुजरने वाले
19:13कई इंसानों का खून पिया है
19:15जहां वो रहता है
19:17वहाँ एक गैस कैप्सूल है
19:19अगर उस कैप्सूल को
19:21फैक्टरी से बाहर तोड़ दिया जाए
19:23तो उससे निकलने वाली गैस
19:25सारे जॉंबी को खत्म करतेगी
19:28जागव ऐसा नहीं चाहता
19:30क्योंकि सब खत्म होने का मतलब
19:32उसकी खुद की मौत है
19:34तो फिर मुझे वहां ले चलो
19:37मैं आपके साथ नहीं जा सकती
19:39अतुल की आँखों से आँसों गिरते रहे
19:42वो अर्चना के बताए रास्ते की और बढ़ गया
19:48कुछी देर में अतुल और गौरव
19:50फैक्टरी के गहरे बेस्मिंट में पहुँच गए
19:53वहां एक भयानक दिखने वाला मानव था
19:56जिसकी आँखों में नर्क जैसी चमक थी
19:59उन दोनों को देखकर उसके चेहरे पर
20:02खतरनाक मुस्कान भैल गई
20:05सरकार ने तो हाईवे तक पर आने जाने वालों पर
20:08रोक लगा रखी है
20:09काफी समय से मैंने इनसानी खून नहीं पिया
20:13लेकिन अब तुम दोनों का तासा खून पी कर
20:16मैं और ताकतवर हो जाऊंगा
20:19तब ही गौरव की नसर उसकी टेबल पर रखे
20:23एक बड़े कैपसूल पर बढ़ती है
20:25वो कैपसूल जल्दी से उठा
20:28अतुल तोड़कर कैपसूल उठा लेता है
20:32राघाव सब समझ जाता है
20:33और जपटकर गौरव को पकड़ लेता है
20:37उसने अपने दाद गौरव की गर्दन में कड़ा दिये
20:41गौरव गिर पड़ा
20:43राघाव अतुल को खुंखार नसरों से देखने लगा
20:46अतुल समझ गया कि अगर वो एक पल भी रुका
20:50तो वो भी सॉम्पी बन जाएगा
21:03जॉम्पी की तरह सामने आ गई दूसरी और गौरव भी भयान चेहरे के साथ उसकी और बढ़ने लगा
21:10दोनों अब सॉम्पी बन चुके थे अतुल की आँखे भराई तभी फैक्टरी की और उसे अर्चना दिखाई थी
21:17भाईया ये दोनों आपके दोस्त हैं जो अब जॉम्पी बन चुके हैं भावनाओं में मत बहिए इस किस्से का अंद
21:26कीजिए
21:27अतुल ने कापते हाथों से गैस कैपसूल समीन पर भेग दिया अगले ही पल सोरदार धमा का हुआ
21:35काला सहरीला धुवा चारों ओर भेल गया कुछी सिकंड्स में जितने भी सोंबीज थे उन नाशों में आग लग गई
21:44और पूरा रवी पुरम जलती हुई कप्रगाह बन गया
21:48अतुल आंसों भरी आँखों से उसी रास्ते पर वापस चल पड़ा जिस रास्ते से वो इस जहरीले शहर में आया
21:57था उसके पीछे जलता हुआ रवी पुरम था
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