00:01The war has reached the बारूत की गंद के साथ साथ हिसाब किताब की राजनी टीवी सुरू हो गई है
00:07War की आग भले ही धीमीपढ़ दीख रही हो
00:10लेकिन उसके बाद उठने वाला धुओंआ अब पुरी खाड़ी को सियासत में घेरने लगा है
00:14because Iran has to get the water saved by an écras on its descent
00:16that war has to be about 27000 dollars
00:19which means that 24,3000 billion dollars
00:22in price of 24,3000 billion dollars
00:24and now Iran has to get the water
00:27but the best thing is that Iran has to be about it
00:31because Iran has to be able to get the water
00:32Saudi Arabia, UAE and Qatar
00:34on the planet Netanyahu, Japan has got the water
00:36and the Iran has to be able to get the water
00:39Iran has to be able to get the water
01:02।
01:14जियो पॉलिटिकल संदेश छिपा हुआ है
01:16तहरा लंबे समय से या हरोप लगाता आया है कि
01:19गल्फ के कुछ देश छेत्रिय सक्ती संतुलन में उसके खिलाब खड़े रहते हैं
01:23ऐसे में कमपंसियेशन की मांग एक तरह से राजनीतिक दबाव का हथियार भी बन सकती है
01:46पहले से नाजुक रिस्तो के भी यह मांग डिप्लोमेटिक कानफर्मेशन को और तेज कर सकती है
01:51विसे सक्तियों की माने तो अगर यह विवाद बढ़ा तो इसका असर सिर्फ बयान बाजी तक्सीमित नहीं रहेगा
01:57छेत्रिय गठबंदन बदल सकते हैं
02:00तेला पूर्ती पर दबाव बन सकता है
02:01स्ट्रेट आफ फॉर्मूज जैसे एहम सिपिंग रूट्स पर तनाव बढ़ सकता है
02:05और क्रूर ओल मार्केट में फिर से उथल उथल मच सकती है
02:08भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता की बात है
02:11क्योंकि देश की बड़ी एनरजी यानि कच्चे तेल की जरूरतें गल्फ रिलिजन से पूरी होती है
02:16अगर खाडी में तनाव फिर बढ़ा तो पेट्रोल डीजल महंगा हो सकता है
02:20इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर नया दबाव बन सकता है
02:24फिलाल दुनिया यह देख रही है कि खाडी देश इस 270 अरब डॉलर के बिल का क्या जवाब देते हैं
02:30लेकिन इतना तैह है कि वार के मैदान से निकल कर अब लड़ाई डिप्लोमेटिक टेबल्स और आर्थिक दबाव के तरफ
02:36बढ़ रही है
02:37क्योंकि मिडल इस्ट में अक्सर असली लड़ाई तब सुरू होती है जब बंदुकें सांथ हो जाती है
02:42ऐसी ही और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें
02:46गुड रिटन्स डिजिटल
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