00:22उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा
00:28जहां कई स्थानों पर पत्थरबाजी और तनाव की खबरें आई
00:31पुलिस की मुस्तहदी के बीच अब इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है
00:36कॉंग्रिस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है
00:41कि ये प्रदर्शन शोशित मजदूरों की उस आवाज का परिणाम है जिसे लंबे समय से अनसुना किया गया
00:47उन्होंने न्यूनतम वेतन बीस हजार रुपे करने की मांग का समर्थन करते हुए
00:52महंगाई और नए लेबर कोट को श्रमिकों की बधाली का मुख्य कारण बताया है
00:57राहुल के नुसार सरकार मजदूरों को बोज समझ रही है
01:01कल नौईडा की सडकों पर जो हुआ वो इस देश की श्रमिकों की आखरी चीख थी
01:06जिसकी हर आवास को अनसुना किया गया जो मांगते मांगते ठक गया
01:11नौईडा में काम करने वाले एक मजदूर की 12,000 रुपे महीने की तंख़ा
01:154,000 से 7,000 रुपे किराया
01:18जब तक 300 रुपे की सालाना बढ़ोतरी मिलती है
01:21मकान मालिक 500 रुपे सालाना किराया बढ़ा देता है
01:24तंख़ा बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई जिन्दगी का गला घोंट देती है
01:29कर्ज की गहराई में डुबा देती है
01:31यही है विक्सित भारत का सच
01:33एक महिना मजदूर ने कहा
01:35गैस के दाम बढ़ते हैं पर हमारी तंख़ा नहीं
01:38इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान
01:41अपने घर का चूला जराने के लिए
01:425000 रुपे का भी सिलेंडर हरीदा होगा
01:45ये सिर्फ नोईडा की बात नहीं है
01:47और ये सिर्फ भारत की भी बात नहीं है
01:49दुनिया भर में इंधन की कीमतें आस्मान चू रही है
01:52पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन तूट गई है
01:56मगर अमेरिका के टैरिफ वार
01:58वैश्विक महंगाई
01:59तूटती सप्लाई चेन
02:00इसका बोज मोधी जी के मित्र उध्योग पतियों पर नहीं पड़ा
02:04इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है
02:06उस मजदूर पर जो दिहाडी कमाता है तभी रोज खाता है
02:09वो मजदूर जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं
02:12जिसने कोई नीती नहीं बनाई
02:13जिसने बस काम किया चुपचाप बिना शिकायत और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है दवाव और
02:21अत्याचार
02:22एक और जरूरी मुद्धा मोदी सरकार ने चार लेबर कोट जल्दबाजी में बिना समवाद नवंबर दोहजार पचीस से लागू कर
02:30काम का समय बारा गंटे तक बढ़ा दिया
02:32जो मजदूर हर रोज बारा बारा घंटे खड़े होकर काम करता है पिर भी बच्चों की स्कूल फीस कर्ज लेकर
02:38भरता है क्या उसकी मांग गैर वाजिब है और जो उसका हक हर रोज मार रहा है वो विकास कर
02:44रहा है
02:45नौईडा का मजदूर बीस हजार रुपे मांग रहा है। ये कोई लालच नहीं, ये उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एक
02:52मात्र आधार है। मैं हर उस मजदूर के साथ हूँ जो इस देश की रीड है और जिसे इस सरकार
02:58ने बोज समझ लिया है।
03:15के बयानों ने इस्थानिय मुद्धे को राश्ट्रिय फलक पर लाकर खड़ा कर दिया है। वे तरक देते हैं कि सरकार
03:21की नीतियां केवल बड़े कॉर्कुरेट्स को लाब पहुचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जबकि देश का निर्मान करने वाला
03:26श्रमिक वर्ग दो वक
03:42श्रमिक को मिलने वाला वेतन शहर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम नहीं है। बिजली की बढ़ती
03:48रेटें और राशन की आस्मान छूती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। जब ये श्रमिक अपने बुनियादी
03:54हक के लिए आवाज उठात
04:10पर खड़े व्यक्ति तक न पहुँचे। राहूल गांधी ने स्पष्ट किया कि कॉंग्रेस पार्टी श्रमिकों के इस संघर्ष में उनके
04:16साथ है और सरकार को अपनी श्रमिक विरोधी नीतियों पर पुनर विचार करना होगा।
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