00:00अधूरा सपना, ददी का खाली पलंग
00:02रात के दो बज रहे थे, घर में सब सो रहे थे, लेकिन दादी मा जाग रही थी
00:07उनके पास एक पुराना सा पलंग था, जिसमें वो हमेशा एक साइड खाली छोट देती थी
00:13पोती ने एक दिन पूचा, दड़ी आप इधर क्यों नहीं सोटी?
00:17दड़ी ने हलकी सी मुसकान के साथ कहा, यह जगा तेरे पापा के लिए है, बचपा में वो मेरे पास
00:24ही सोटा था
00:24पोती हंस पड़ी, अब तो वो बड़े हो गए हैं दड़ी
00:28दड़ी ने धीरे से जवाब दिया, बड़े हो जाने से रिष्टों की जगा थोड़ी बडाल जाती है बेटा
00:35उसका बेटा, जो अब एक बिजी आदमी बन चुका था, रोज देर से घर आता और सुबह बिना मिले ही
00:41चला जाता
00:42दड़ी बस उस खाली जगा को देख कर कहती, शयद आज वो मेरे पस बैथ जाए, लेकिन आज कभी नहीं
00:49आया
00:50एक रात दादी की तबियत खराब हो गई सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, उन्होंने कमजोर अवाज में कहा
00:57एक बार उससे बुला दो, बेटा भागते हुए आया, मा में आ गया
01:05डादी ने उसका हाथ पकरा, और अपने पास उस खाली जागा पर बिठाया
01:09आन्खों में आंसुध है लेकिन चेहरे पर सुकून, बस इतना ही चाह रही थी, एक बार फिर मेरे पास सो
01:16जाए
01:17बेटा तूट गया, उसने मा का हाथ जोर से पकर लिया
01:21लेकिन कुछ पल बाद वो हाथ धीरे से थंदा हो गया दादी मा चली गई
01:25और उस रात पहली बार वो खाली जगा भर गई थी, लेकिन अब हमेशा के लिए खाली हो गई
01:32जिन्दगी की सबसे बरी कमी पैसा नहीं होती वो वक्त होता है जो हम अपनों को नहीं दे पाते
01:38आज ही अपने पेरेंट्स या दाड़ी के पास दस मिनिट जरूर बैथो और कॉमेंट करो
01:43टाइम फॉर फैमिली
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