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छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। दर्जनों और घायल हुए। और अब, जो बच गए हैं, वे सामने आकर बोल रहे हैं—और सीधे तौर पर उस बात का खंडन कर रहे हैं जो पेंटागन ने जनता को बताई थी कि उस दिन कुवैत में क्या हुआ था।
1 मार्च, 2026 को, एक ईरानी ड्रोन कुवैत के पोर्ट शुएबा में स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने से टकरा गया। ईरान के साथ सीधे संघर्ष में यह अमेरिका को हुई शुरुआती जानमाल की हानियों में से एक थी।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस ड्रोन को "स्क्वर्टर" कहा, यह एक सैन्य शब्दावली है जिसका इस्तेमाल किसी ऐसे अकेले खतरे के लिए किया जाता है जो किसी मज़बूत सुरक्षा घेरे को भेदकर अंदर घुस जाता है। उन्होंने उस जगह को एक "किलेबंद सामरिक संचालन केंद्र" बताया।
लेकिन जो सैनिक असल में वहाँ मौजूद थे? वे तो बिल्कुल ही अलग कहानी बता रहे हैं।
Six American soldiers dead. Dozens more wounded. And now, the survivors are speaking out directly contradicting what the Pentagon told the public about what happened that day in Kuwait.
On March 1st, 2026, an Iranian drone slammed into a U.S. military facility at Port Shuaiba in Kuwait. It was one of the first American casualties in the direct conflict with Iran.
Defense Secretary Pete Hegseth called the drone a "squirter"—military slang for a single threat that slips through an otherwise solid defense. He described the site as a "fortified tactical operations center."
But soldiers who were actually there? They're telling a very different story.

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~PR.514~HT.408~ED.520~GR.538~

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Transcript
00:12पिंटेगोर्न ने छिपाई सच्चाई
00:14कुएट बेस पर यूएस सैनिकों की मौत का दावा
00:18साथे तेरह हजार से ज्यादा यूएस सैनिक खत्रे में
00:21फुलासों ने मचाई सैंसनी
00:23नमस्काल मेरा नाम है रिचापराशर और आप देखने हैं वन इंडिया हिंदी
00:26छे अमेरिकी सैनिकों की मौत दरजनु घायल और अब जो सच सामने आ रहा है
00:31वो सर्फ एक हमले की कहानी नहीं है बलकि सिस्टिम की एक बड़ी चूक की तरफ इशारा करता है
00:36एक मार्च दोहजार प्शब्श
00:38कुएट के पोर्ट शुआइबा में स्थित एक अमेरिकी सैन ठिकाना अचानक आसमान से आता एक ड्रून और कुछ ही सेकेंड
00:45में सब कुछ बडल जाता है
00:47धमाका इतना तेश था कि पूरी इमारत हिल जाती है आग, धुआँ और चीखों से भर जाता है
00:53पूरा इलाका
00:54लेकिन कहानी यहीं खत नहीं होती
00:57असली सवाल अब शुरू होता है
00:59अमेरिकी रक्षा विभाग, पेंटागॉन ने शुरुआत में इस हमले को एक मामूली घटना बताया
01:04कहा गया कि एक 45 टेकनिकल ओपरेशन सेंटर था यानि पूरी तरह से सुरफशिक्त चिकाना
01:09ट्रोन को स्विवर्टर कहा गया
01:11मतलब छोटा खतरा जो बस सिस्टम को चक्मा देकर निकल गया
01:15लेकिन जो सैनिक उस वक्त वहां मौजूर थे
01:17उनकी कहानी बिल्कुल अलग है
01:19बचे हुए सैनिकों ने खुलासा किया है कि ये कोई मजबूत बंकर नहीं था
01:23बलकि एक साधारन मेटल छट वाला ट्रेलर था
01:26चारो तरफ टी वाल्स जरूरी थी लेकिन ये सिर्फ जमीन से होने वाले धमाकों को रोक सकती थी
01:32उपर से आने वाले ड्रोन के सामने ये बेकार साबित हुए
01:36सबसे चुकाने वाली बात वहाँ कोई समर्पित एर डिफेंस सिस्टेम ही नहीं था
01:40कोई अलर्ट साइरन नहीं, कोई चेतावनी नहीं
01:43और जब तक सैनिक समझ पाते तब तक बहुत तेर हो चुपी थी
01:48एक घायल सैनिक ने कहा हम उस हमले से खुद को बचाने की सिथी में नहीं थे
01:52तमाके के बाद हालात और भयावा हो गए
01:54दिवारे उड़ गई आग ने पूरी जगे को घेर लिया और कई सैनिक मलबे में दब गए
02:00शुरुवाते रिपोर्ट्स में कुछ घायलों की बात कही गई लेकिन बात में सामने आया कि 60 से ज्यादा सैनिक घायलों
02:06है
02:06कई को गंभीर चोटे आई हैं जलने के जख्म हो गए थे और कुछ को अंग कवाने तक की नौब
02:11बताए
02:12अब सवाल उड़ता है क्या यह सर्फ एक हाथसा था या एक बड़ी लापरवा है
02:16रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस ठिकाने की सुरक्षा को लेकर पहले ही चिंता जताई गई थी
02:20अतिरिक्त सुरक्षा की मांग भी की गई थी
02:23लेकिन उसे कम भीरता से नहीं लिया गया और सबसे खतरनाक पहलू इरान पहले से ही इस ठिकाने पर नजर
02:29रख रहा था
02:30ड्रोन और चोटे सर्विलन सुपकरनों के जरिये अमेरिकी गत्थी विदियों पर निगरानी की जा रही थी
02:35यानी हमला अचानक नहीं था बलकि सोची समझी रणीती का हिस्सा था
02:40इरान के शाहे ड्रोन की कीमत 20 से 50 हजार डॉलर के बीच होती है
02:45जबकि उन्हें रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले मिसाईलें उसे कई गुणा महंगी होती है
02:49यही वो रणीती है कि कम लागत में बड़ा नुकसान कर दिया जाए
02:54यह हमला सर्फ 6 सैनिकों की जान नहीं ले गए
02:57इसने दुनिया की सबसे ताकतवर सेना की सुरक्षा ववस्था पर सवाल खड़े कर दिये
03:02पेंटागॉन का काम है ताकत दिखाना भरोसा बनाए रखना
03:05लेकिन सच यह है कि उस दिन जो सैनिक वहां मौझूद थे
03:09वे सुरक्षित ही नहीं थे वे पूरी तरह एक्स्पोजड थे
03:12और अब वही सैनिक दुनिया को बता रहे हैं
03:16कि असल में उस दिन वहां क्या हुआ था कैसा कहर बरपा था
03:19और यह क्या स्थिती थी जो पूरी दुनिया से चिपाई गए
03:23इस ख़बर में इतना ही अप्डेट्स के लिए देखते रहें पर इंटिया हैं दे
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