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In a stunning reversal, the U.S. may ease sanctions on Russian and Iranian oil after years of pressure. Reports say temporary waivers could allow millions of barrels back into global markets to cool surging prices above $100. The move follows regional conflict and disruptions in the Strait of Hormuz. Critics call it a policy climbdown, highlighting contradictions as Washington condemns Moscow over Ukraine while quietly reopening the door to its oil.



Hindi Description

चौंकाने वाले घटनाक्रम में, अमेरिका रूस और ईरान के तेल पर वर्षों से लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्थायी छूट (टेम्परेरी वेवर्स) के जरिए लाखों बैरल तेल को दोबारा वैश्विक बाजार में लाने की तैयारी है, ताकि 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी कीमतों को काबू किया जा सके।

यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब क्षेत्रीय संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं ने सप्लाई चेन को झटका दिया है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति में यू-टर्न है—एक तरफ वॉशिंगटन यूक्रेन मुद्दे पर रूस की आलोचना करता है, वहीं दूसरी तरफ उसके तेल के लिए दरवाज़ा खोलता नजर आ रहा है।

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~HT.318~PR.516~GR.508~

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Transcript
00:00कल तक जो दुश्मन थे, क्या आज वो दोस्त बनने वाले हैं?
00:03जिस रूस और इरान को दुनिया से अलग थलग करने के लिए
00:06अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत जोगती थी
00:08क्या अब उन्हीं के सामने वाशिंग्टन ने खुटने टेक दिये हैं?
00:12जी हाँ, आज वे कैसी खबर आई है जुसने पूरी दुनिया के भूराचनीतिक समय करनों को हिला कर रख दिया
00:18है?
00:18कमर कस लीजे, क्योंकि तेल की राचनीती में एक ऐसा महा उलट फेर हुआ है
00:22जुसकी कलपना किसी ने नहीं की थी
00:24सालों का अर्थिक युद, कड़े प्रतिबंद और तीखे बयान सब धरे के धरे रह गए
00:30रिपोट्स कह रही है कि ट्रॉम्प रूसाशन अब रूसी और इरानी तेल पर लगी पाबंदियों को धिला करने की तैयारी
00:37में है
00:37वही रूस जुसे यूक्रेइन युद के लिए घेरा गया, वही रान जुसे हर कदम पर रोका गया
00:43अब उनका कच्चा तेल ग्लोबल मारकेट में फिर से लाल कालीन पर वापस आ रहा है
00:48अब आप पूछेंगे ऐसा क्यूं? जब आप सीधा है, जेप पर मार
00:53जब तेल की कीमते 100 डॉलर के पार पहुँचने लगी तो अमेरिकी जनता महिंगाई से त्राही त्राही माम करने लगी
01:00तो वाशिंग्टन को अपनी रणनीती बदल ली पड़ी
01:03अगले कुछ हफतों में 100-140 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारा जा सकता है
01:08यह कोई सोची समझी रणनीती नहीं बलकी बजार को स्थिर करने की एक हताश कोशिश नजर आती है
01:13लेकिन यहाँ एक बड़ा पेच है
01:15एक तरफ अमेरिका मंच से रूस की निंदा करता है और दूसरी तरफ चुपके से उसे तेल के लिए रास्ता
01:21खोल देता है
01:22इरान और रूस को मिलने वाला हर डॉलर क्या उनके सेने खजाने को नहीं भरेगा
01:26क्या अमेरिका अंज़ाने में उन्हीं ताकतों को फंड कर रहा है जुन से वो लड़ रहा है
01:30मज़िदार बात तो देखिए
01:32इस पूरे ड्रामे में सबसे ज़्यादा अमेरिका को नहीं बलकि भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को हो रहा है
01:39उन्हें मिल रहा है डिसकाउंटेट क्रूट ओयल जबकि खुद अमेरिका घरेलू कीमतों को काबू करने के लिए पसीने बाहा रहा
01:45है
01:47अमेरिकी अधिकारी के रहे कि ये कदम अस्थाई है लेकिन सवाल वही खड़ा है क्या विचारधारा हकीकत के सामने हार
01:53गई है
01:53क्या रूस और इरान की तिजोरिया फिर से भरने वाली हैं देखिए इस रिपोर्ट
02:05ये एक चौकाने वाला उलट फेर है और कई लोगों के लिए अपमान जनग भी
02:09सालों के प्रतिबंधों, दबाव और आर्थिक युद्ध के बाद सयुक्त राज्य अमेरिका अब रूसी और इलानी तेल पर प्रतिबंधों को
02:16कम करने की तयारी कर सकता है
02:18हाँ, रूस, हाँ, इरान, वही देश जिन्हें वाशिंग्टन ने सालों तक अलग थलग रखा है
02:24और अब अचानक उन्हें वैश्विक तेल बाजार में वापस लाया जा रहा है
02:27क्यों? क्योंकि रणनीती काम नहीं आई और अब अमेरिका इसकी कीमत चुका रहा है
02:32रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रसाशन ने पहले ही अस्थाई चूट जारी कर दी है
02:36जिसे रूसी और इरानी कच्चे तेल को वैश्विक आपूर्ती श्रिंखलाओं में फिर से प्रवेश करने की अनुमती मिल गई है
02:52कीमतों के 100 डॉलर प्रती बैरल से उपर पहुँचने के बाद ये बाजार को स्थिर करने का एक हताश प्रयास
02:57है
02:57और इस संकट को किसने जन्म दिया?
02:59एक संगर्ष जो आंशिक रूप से क्षेतर में अमेरिकी और इस्राइली सैनने कारिवाईयों और होर्मोस जल्डमरू मध्य में व्यवधानों के
03:06कारण हुआ
03:06जो एक ऐसा चोक पॉइंट है जो दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा ले जाता है
03:10तो अब बढ़ते तनाव के बाद वाशिंटन अपनी खुद की दबाव रणनीती को वापस लेने के लिए मजबूर है
03:16आलोचके से वो कह रहे हैं जो ये दिखता है
03:18नीती में पीछे हटना या इससे भी बुरा एक रणनीतिक विरोधाभास
03:22क्योंकि एक तरफ अमेरिका यूक्रेन को लेकर रूस की निंदा करता है
03:25दूसरी तरफ ये चुपचाप रूसी तेल को बाजार में वापस आने देता है
03:29साथ ही इरान प्रतिबंधों और धमक्यों का सामना कर रहा है
03:32फिर भी उसके तेल को अब अस्थाई पहुँच दी जा रही है
03:35और सबसे ज़्यादा फाइदा किसे हो रहा है?
03:37वाशिंग्टन को नहीं, बलकि भारत और चीन सहित एशिया के प्रमुक खरीदारों को
03:41वे देश जिन्हें अब रियायती कच्चे तेल तक पहुँच मिल गई है
03:44जबकि अमेरिका घरेलू इंधन की कीमतों को नियंतरित करने के लिए संगर्श कर रहा है
03:47अमेरिकी अधिकारी जोर देते हैं कि ये कदम अस्थाई और सीमित है
03:51वे कहते हैं कि ये बाजारों को स्थिर करने के बारे में है
03:54विरोथियों को पुरस्कृत करने के बारे में नहीं
03:56लेकिन दिखावे को नजर अंदाज करना मुश्किल है
03:58क्योंकि बेचे जाने वाले हर बैरल से राजस्वत पन्न होता है
04:01राजस्व जो सीधे मॉस्को और तहरान के खजाने में जा सकता है
04:04और ये गंभीर चिंता पैदा करता है
04:06क्या अमेरिका अपरत्यक्ष रूप से उन्हीं शक्तियों को वित्तपूशित कर रहा है
04:10जिनका वह विरोध करता है
04:12राजनेतिक स्पेक्ट्रम के सभी विधायक पहले ही इसका विरोध कर रहे है
04:15चेताबनी दे रहे हैं कि इन छूटों का मतलब रूस के लिए प्रतिदिन करोडो डॉलर और इरान के लिए महत्वपूर्ण
04:20लाप हो सकता है
04:21वो पैसा जो संगर्षों को बढ़ावा दे सकता है
04:23सैनिक शमताओं को मजबूत कर सकता है और भूर आजनेतिक तनाव को गहरा कर सकता है
04:28और यहां एक मोड है
04:29इन छूटों के बावजूद कीमतों में कोई खास गिरावट नहीं आई है
04:32बाजार अस्थिर बने हुए हैं अनिश्चित्ता बनी हुई है
04:35जिससे ये सवाल उटता है
04:36क्या ये कदम प्रभावी था या सिर्फ जरूरी
04:39क्यूंकि ये इसी बात पर निर्भर करता है
04:41विचारधारा और वास्तविक्ता के बीचिक चुनाव
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