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Transcript
00:00पाकरस्तान से साजद और खुर्रम का प्रश्न है
00:03जब वेदान भी एक इश्वर को मानता है जैसे कि अल्ला एक है
00:06तो हिंदू लोग इतने अलग अलग देवी देवताओं की पूजा क्यों करते है
00:10आप कह रहे हो कि पूजा तो एक अल्ला की होनी चाहिए
00:14इतने देवी देवताओं की क्यों होती है
00:16कोई बहुत समझदार आदमी रहा होगा जिसने पहली बार पेड़ के सामने सर जुकाया
00:20कोई बहुत गहरा आदमी रहा होगा जिसने पहली बार नदी को मा बोला और जुक गया बिलकुल
00:26ये अंधविश्वास नहीं है, ये बहुत गहरी बात है, अगर नदी को गौर से देखोगे, तो जीवन के कुछ राज
00:32खुल जाएंगे, वो राज तुम्हारे काम आएंगे, तुम्हें मुक्त करने में सहायक होंगे, तो नदी की फिर पूजा है, नदी
00:39की पूजा में ये भा
00:56आपने पूजा ना की जाती हो, कहीं सहाप की पूजा हो रही तो कहीं बिच्छू की हो रही है, जो
01:00कई बाहरवाल आदमी इस इसको देखता है, तो पगला जाता है, बोलता है, कैसे लोग हैं, ये सहाप की पूजा,
01:05बिच्छू की पूजा कर रहे है, कोई समुदाय है, वो क
01:23प्रक्रति मा है, इस मा की सहायता के बिना तुम बंधनों के पार भी नहीं जा पाओगे।
01:28उल्टा अर्थ कर दिया गया है that Hindus worship millions of gods, यह क्या आपने इसका विक्रत अर्थ निकाल लिया।
01:36तो अगर आप सब देवी देवताओं को माध्यम की तरह प्रयुक्त कर पाते हैं, तो हम जितनी मूर्ति पूजा करते
01:44हैं, सब सार्थक है, जितने देवी देवता हैं, सब हमारे काम आएंगे, अगर आपको पता हो कि वो जो देवी
01:50की मूर्ति है, वो किसका प्रतीक है, सिर्फ
01:52तब काम आएंगे, अंधी पूजा काम नहीं आएगी, तुम भी आई पाओगे साजे, जब वो जो एक होता है, एक,
01:59दिल जब उसी का दीवाना हो जाता है, तो आदमी उसकी कायात के सामने भी ठगा सा खड़ा रह जाता
02:09है, चमितकरत, दीवाना सा.
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