00:00माता पिता के कोई आयका साधन है ने और मैं जब कभी भी कुछ धन देना चाखाऊं तो उसमें उनको
00:09बढ़ा दुख होता है मेरी धर्म पत्रों को
00:25नहीं नहीं नहीं आप उनको बहुत धन्यवाद आपने मावाप के प्रतितने दयाल हुरदे हैं उत्सा आप देखो लोने मुझे इस
00:32काविल बना है आप भारती भाई उसे इना मस्ते हैं बिल्कुल लेकिन आपको पत्नी को थोड़ा विवेकवान होकर समझाना पड़ेगा
00:42उ
00:45हाँ उसको भी प्यार करो अपने माता पिता के पारत पहुंचाओ और उनके पैर शुके कहो कि हमारा रोम रोम
00:52एक एक बून खूल आपकी सेवा के लिए
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