00:00प्रेम में कभी त्रप्ती नहीं होती, प्रेम में कभी पुर्णिमा नहीं होती, इतना भूख बढ़ जाती है अपने प्रीतम की,
00:07कि समीप रहते हुए भी दूरी के चिंतन की भावना मात्र से उव्याकुल हो जाता है, गले से लगा है,
00:14कहीं ये दूर न हो जाए, ऐसी संभा�
00:17बना मात्र से उसके प्लाण गया कुल हो जाता है
Comments