00:00कि एक बार अकबर जो है राच कूतों से युद्ध किया और उनको मार दिया
00:05तो रात्री में सब फ्षैनिक सो रहे थे नीज अंग रक्षकों के साथ
00:08इतनी में देखा एक कोई नौ राच कुमार दीपक लेके ऐसे सवों के चेरे देख रहा है
00:16अकबर ने तो नज़री का है और उनका हाथ पर करो तो उनका यहां क्या कर रहे हूँ
00:22तो उनका मैं कर नहीं रहा हूँ मैं कर रही हूँ
00:25तो उनका लड़की हूँ बोले हाँ क्या कर रहे हूँ
00:29बोले मेरा व्याह तैं हुआ था
00:32और मेरा पती सहीद हुआ है रण छेत्र में
00:36तो मैं उसे लेकर चिता में जलना चाहती हूँ
00:39बोले व्याह तैं हुआ था
00:41व्याह ने हुआ बोले नहीं
00:43बोले दूसरा कर लो
00:45बोले हम भारती हैं
00:47हमारी संस्कृति एक बार जिसका वरण कर लिया, उसका जीवन भर निर्वाद।
00:53यह हमारा इतियास कहता है, कि हमारी संस्कृति एक बार जिसका वरण कर लिया।
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