00:00कुंबई की उमस भरी शाम थी, जैसे शहर का दम घोटने को तयार हूँ, आस्मान में काले बादल ऐसे गिरे
00:06थे, जैसे शहर का दम घोटने को तयार हूँ, नेहा ने टैक्सी की खिड़की से बाहर देखा और एक घहरी
00:13सांस ली,
00:1324 साल की उमर में पहली बार, वह अकेले रहने के लिए घर से निकली थी, नई नौकरी, नया शहर,
00:21और अब एक नया घर, जैसे ही नेहा की मंजिल आती है, बारिश अचानक रुख जाती है, लेकिन बादल अभी
00:28भी शहर पर मंडरा रहे थे, टैक्सी रुकी, तभी ड्राइवर
00:46शांति कुंज, तीन मंजिला रेसिडेंशल बिल्डिंग, बिल्कुल इस शहर जैसी, ना ज्यादा नई, ना ज्यादा पुरानी, नीचे पार्किंग, ऊपर बालकनिया,
00:55खिडकियों में परदे, सब कुछ नॉर्मल था, नेहा जब आगे बड़ी तब, ग्राउंड फ्लोर क
01:02पोर्च में एक बुजर्ग व्यक्ति कुर्सी पर बैठे थे, सफेद बाल, आँखे बड़ी-बड़ी, चहरे पर एक अजीब सी स्थिर
01:09मुस्कान, ये है मिस्टर विनायक, इस बिल्डिंग के मालिक, नेहा को देख विनायक कहता है, आ गई आप, आपका ही
01:17इंतजार कर रहा
01:18था, मुझे लगा बारिश में फस गई होगी, जी, थोड़ा ट्रैफिक था, अब मैं ठक चुकी हूँ, रूम की चाबी
01:25दीजिए, विनायक ने जेब से चाबीयों का गुच्छा निकाला, फर्स्ट फ्लोर, फ्लैट नंबर, एक सोदो, इस बिल्डिंग में शांती बहुत
01:33�
01:33जरूरी है, कोई शोर शराबा नहीं, उन्होंने नेहा को उपर से नीचे तक देखा और कहा, और हाँ, रात को
01:43दर्वाजा अच्छे से लॉक करना, शहर भरोसे के लायक नहीं रहा, नेहा के शरीर में हलकी सी सिहरन दोड़ गई,
01:50वो मुस्कुर आई, सिर हिलाया और सीडिया
01:54चड़ गई, फ्लैट उम्मीद से बड़ा था, उची छतें, लकडी का फर्ष और एक खुली बालकनी, और एक सोफा और
02:06एक बेड, सब कुछ सही था, सिवाए एक चीज के, हॉल के कोने में बनी एक पुरानी लकडी की अलमारी,
02:13दीवार में फिक्स और उस पर लटका एक ब�
02:24पहले दो हफते सब कुछ सामान्य रहा, निहा सुबह आफिस जाती, शाम को लोटती, अकेला पन्या था, एक रात निहा
02:34लैप्टॉप पर काम कर रही थी, अचानक उसे लगा, जैसे कोई, खिड़की के बाहर खड़ा है,
02:50फर्स्ट फ्लोर पर होने के बावजूद, पालकनी के पास एक बड़ा पीपल का पेड़ था, ओ, मैं कितनी डर गई
02:57थी, ये पेड़ के पत्ते हिल रहे हैं,
03:06अगले दिन ऑफिस से लौट कर उसे घर की हालत बदली हुई लगी, किताबें जो उसने एक खास तरीके से
03:13रखी थी, अब कुछ जमीन पर बिखरी पड़ी थी, उनके पन्ने पटे हुए, जैसे किसी ने गुस्से में चीर डाले
03:20हो, कमरे में सन्नाटा था, और घर में उसके
03:25अलावा कोई नहीं रहता, हेलो विनायक अंकल, क्या आप आज मेरे फ्लैट में आये थे, नहीं बेटा, क्यों क्या हुआ,
03:36फ्लैट में कुछ सामान बिखरा हुआ है, इसलिए मैंने आपको कॉल किया, अरे अकेले पन में ऐसा लगता है, डरना
03:42मत, मैं हुना नीचे, तुम त
03:54प्रिया को कॉल किया, हेलो प्रिया, अगर तु फ्री है, तो मेरे फ्लैट पर आ सकती है क्या, ठीक है
04:00जल्दी आना, निहा ने अपनी दोस्त प्रिया को बुलाया, प्रिया बेबाक और निडर थी, दोनों बेट पर बैठे बाते कर
04:07रही थी, यार जगा तो शानदार है, इत
04:23तो मेरी सारी किताबें किसी ने भाड़ दी, और सबसे अजीब चीज मुझे ऐसे क्यों लगता है, कि मुझे कोई
04:30देख रहा हो, इसलिए मैंने तुझे बुलाया, अरे बुढ़ा है, सठ्या गया होगा, तु ज्यादा सोच रही है, और इतने
04:38बड़े फ्लैट में रहती है,
04:39इसलिए तुझे ऐसा लग रहा होगा, शायद तुम ठीक कह रही हो, तभी प्रिया की नजर हॉल में बनी, उस
04:46बंद अल्मारी पर पड़ी, नहाई ये अल्मारी, इसमें क्या है, पता नहीं, लौक है, विनायक अंकल ने कहा था, इसे
04:54मत छेड़ना, क्यों, अंदर क्या है,
05:09इसलिए में डाल कर घुमाई, ताला जटके से खुल गया, उसी पल पीछे से तेज कदमों की आहट आई, नहा
05:17घबराई हुई उसके पास पहुची, नहा फुस-फुस आते हुए तरी आवाज में कहती है, ये क्या कर रही हो
05:25प्रिया, इसे मत खुलो, अरे कुछ नहीं होगा
05:27देखते हैं अंदर क्या चुपा रखा है, उसने अलमारी का दर्वासा पूरी तरक खोल दिया, अंदर अंधेरे में रखा था
05:34एक पुराना जंग लगा लोहे का बकसा, उसकी सतह पर धूल जमी थी, और किनारों पर समय के निशान, बकसे
05:43के पास एक परची भी थी, वह बकस
05:48देखते की और जुकी, चलो, इसे भी खोल कर देखते हैं, रुको, पहले ये पढ़तो ले, इसमें क्या लिखा है,
05:59लेकिन प्रिया ने उसकी बात अंसुनी कर दी, इतना अभी क्या डर ना, उसने जटके से बकसा खोल दिया, उसी
06:06पल बाहर तेज बिजली कर तो, प्रिया न
06:17कुछ नहीं है, बिजली कर की बस, उसने बकसा आगे बढ़ा कर दिखाया, लो देखो, तुम्हारे विनायक अंकल का खजाना,
06:26अंदर एक पुरानी बजसूरत गुडिया रखी थी, उसकी एक आँख टेड़ी थी, दूसरी आधी बंद, चहरे पर धूल जमी थी,
06:35और होंठो
06:35पर हलकी सी दरार, प्रिया ने नाक सी कोड़ते हुए कहा, समझ नहीं आता, इस दरावनी गुरिया को ताले में
06:42बंद करके क्यों रखा था, तभी तरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई, इतनी तेज की दोनों उचल पड़ी, नहा और प्रिया
06:50ने एक दूसरे की तरफ देख
06:51दोनों के चहरे से खून उतर चुका था, उन्हें पता था, इस समय और कोई नहीं हो सकता, नहा ने
06:58धीमे से कहा, विनायक काका, प्रिया ने बकसा बंद किया, बकसा उठा कर अलमारी में रखा, दर्वाजा बंद किया, और
07:07जल्दी में ताला बस लटका दिया, चाबी तो थ
07:21बाहर विनायक खड़े थे, चहरा शांत, आखें स्थिर, अजीब तरसे सामान्य, विनायक हलकी मुस्कान के साथ, क्या हुआ, मैंने कुछ
07:29आवाज सुनी, निहा ने खुद को संभालते हुए कहा, कुछ नहीं काका, बस ग्लास गिर गया था, विनायक कुछ सेकेंड
07:37उसे दे
07:50धीरे धीरे दूर होती हुई, निहा ने दर्वाजा बंद कर लिया, कुंडी छड़ा आई, कमरे में फिर सन्नाटा, तभी प्रिया
07:56बोली, मैं आप चलती हो निहा, काफी देर हो गई, देख, ग्यारा बज गए, आज की रात यहीं रुख जाना,
08:02अरे बाबा डर मत, रुख �
08:03लेकिन अपना फ्लैट खुला छोड़ा आई हूँ, यार बता नहीं क्यों, आज बहुत अजीब लग रहा है, प्रिया ने उसका
08:10कंधा दबाया, ठीक है, मैं अपने फ्लैट पर जाकर लॉक करके आती हूँ, जल्दी आना, प्रिया कमरे से बाहर चली
08:18गई, निहा ने दर्व
08:30लियां काप रही थी, परची पुरानी थी, किनारे जले हुए से लग रहे थे, निहा ने गहरी सांस ली और
08:36पढ़ना शुरू किया, इस अलमारी को मत खोलना, सच में मत खोलना, हम पहले यहां रहते थे, शुरू में कुछ
08:45अजीब लगा, फिर आवाजें आने लगी, लगा
08:47वहम है, लेकिन नहीं था, अलमारी खोलने के बाद सब बदल गया, रात में कोई कमरे में चलता है, सांस
08:54लेने की आवाज सुनाई देती है, अगर तुम ये पढ़ रही हो, तो सावधान रहना, हो सके, तो ये घर
08:59छोड़ देना, और उस बकसे को मत खोलना, वरना वो जाग �
09:03नहा के हाथ से वो परची छूट कर फर्श पर गिर गई, उसके दिमाग में बस आखिरी शब्द गूंज रहे
09:10थे, वो जाग जाएगा, वो जाग जाएगा, अचानक कमरे की लाइट अचानक जप चपाई, खिड़की के बाहर पीपल का पेड
09:18हवा में ऐसे जूम रहा था ज
09:33कोई जवाब नहीं, उसने फिर डायल किया, इस बार फोन उठा, लेकिन दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई, बस
09:39एक भारी गीली सांस लेने की आवाज आ रही थी, नहा ने डरते हुए हॉल की उस अलमारी की तरफ
09:45देखा, ताला अभी भी कुंडी पर लटका हुआ थ
09:49लेकिन अलमारी का दरवाजा दो इंच खुला था, जबकि प्रिया ने उसे बंद किया था, अचानक अलमारी के अंदर से
09:56कुछ गिरनी की आवाज आई, जैसे कोई भारी चीज गिरी हो, नहा की नजर फर्ष पर गई, वो लोहे का
10:02बकसा अलमारी से बाहर गिरा पड़ा था,
10:04उसका धकन खुला था, और गुड़िया अंदर नहीं थी,
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