00:00ये वाकिया हजरत अब्दुल्ला बिन गुलाबा रजियल्लाहुनों के बारे में बयान किया जाता है।
00:04एक मरतबा वो अपने उट की तलाश में सहरा के अंदर तक निकल गए।
00:08गर्मी सक्त थी और चारों तरफ सन्नाटा पहला हुआ था।
00:12वो दूर तक अपने उट के निशाना ढूंते हुए चलते रहे।
00:16यहां तक के अचानक उन्हें रेत के बीच एक अजीब मनजर दिखाई दिया।
00:20सामने एक शहर ख़ला था।
00:22ऐसा शहर जिसे उन्होंने इस से पहले कभी नहीं देखा था।
00:26वो हैरत के आलम में शहर के दर्वाजे के पास पहुँचे तो देखा के बड़े बड़े सुतून खड़े हैं और
00:32दिवारें इंतहाई मजबूत और बुलंद हैं।
00:35दर्वाजे कुले हुए थे मगर शहर में किसी इनसान की आवाज न थी।
00:40ना कोई चलता हुआ नजर आता था ना कोई रहने वाला।
00:44ये एक खामोश मगर शानदार शहर था।
00:48अब्दुल्ला बिन गुलाबा रजियल्लाह अनु आहस्ता आहस्ता अंदर ताखिल हुए।
00:52अंदर जाकर उनुने जो मनजर देखा तो उनकी हैरत और भी बढ़ गई।
00:57मेलों की दिवारें कीमती पत्थरों से सजी हुई थी।
01:00सतुनों पर सोने और चांदी की छलक थी और जगा जगा खजाने बिखरे हुए दिखाई देते थे।
01:07ऐसा लगता था जैसे ये किसी बहुत ताकतवर बादशा का शहर रहा हो।
01:11उन्होंने सोचा कि शायद यहां के लोग कहीं गए हूं।
01:15मगर पूरा शहर बिलकुल सुनसान था।
01:18कुछ देर हैरत से देखने के बाद उन्होंने चंद कीमती चीजें और सोना चांदी अपने साथ ले लिया और वापिस
01:25सहरा की तरफ चल पड़े।
01:26जब वो शहर से बाहर निकले और थोड़ा आगे बढ़े तो पीछे मुर कर देखा।
01:32मगर हैरत की इंतहा हो गई।
01:34वो शहर कहीं भी नजर नहीं आ रहा था।
01:37गोया रेत ने उसे निगल लिया हो।
01:39अब्दुल्ला बिन कुलाबा रजियल्लाह अन्हो वापिस लोगों के पास आये और ये अजीब वाकिया सुनाया।
01:46बाद में जब ये खबर हजरत मुआविया रजियल्लाह तक पहुंची तो उन्होंने इस वाकिय की तहतिक करवाई।
01:53कहा जाता है कि एहल इल्म ने बताया कि ये वही मशूर शहर इर्मजात अलिमात था जिसे कदीम जमाने में
02:00बादशाश शद्दाद ने जन्नत जैसा बनाने की कोशिश में तामीर किया था।
02:05मगर अल्ला के अजब के बाद वो शहर वीरान हो गया और सहरा में गुम हो गया।
02:10कहा जाता है कि कभी कभी अल्ला की खुद्रत से इस शहर की जलक किसी मुसाफिर को नजर आ जाती
02:16है।
02:16मगर फिर वो दोबारा रेत के पर्दों में चुप जाता है।
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