Skip to playerSkip to main content
  • 15 hours ago
ब्रज की गलियों में कभी गूंजती थी एक मीठी पुकार—
“एक बीड़ा खाय ल्यो, हँसी सजाय लो, राधे-राधे बोलो जी…”

पेटीनुमा दुकान लिए पनवाड़ी जब गलियों से गुजरते थे,
तो उनके शब्द ही नहीं, उनकी मुस्कान भी गुलकंद जैसी मीठी होती थी ❤️

बहूजी की मुस्कान, बच्चों की पुकार और
कत्था-सुपारी की खुशबू से महकता वो माहौल…
आज भले ही दुर्लभ हो गया है, लेकिन खत्म नहीं हुआ।

अगर आज भी उस एहसास को जीना है,
तो वृंदावन की गलियों में घूम आइए…
शायद कहीं कोई पनवाड़ी “राधे-राधे” कहते हुए आपको पुकार ले 😊

👉 क्या आपने कभी ऐसे पनवाड़ी देखे हैं? कमेंट में जरूर बताएं! Music by Pixabay (Free for use), video editing : anshu graphics, animation - meta ai, voice - google ai studio, image - gemini ai
Transcript
00:00क्या आपको याद हैं वो गलियों में घुमते पनवाडी
00:04पेटी नुमा दुकान लेकर मीठी आवाज में पुकारते
00:08एक बीडा खाये लियो, हसी सजाये लियो
00:11उनके मीठे बोल जैसे गुलकंद की खुश्बू
00:15पूरे माहोल को महका देते थे
00:18घर की देहरी पर खड़ी बहुजी और बच्चे आवाज लगाते
00:21पनवाडी, पनवाडी
00:23कथा, सुपारी, सौंफ, गुलकंद
00:28अपने जादूई हाथों से स्वाद रचता था पनवाडी
00:32आज ये दृश्य दुरलब है, लेकिन खत्म नहीं
00:37अगर देखना हो, तो वरिंदावन की गलियों में आज भी मिल जाएंगे
00:42क्या आपने कभी ऐसे पनवाडी देखें?
Comments

Recommended