00:00क्या आपको याद हैं वो गलियों में घुमते पनवाडी
00:04पेटी नुमा दुकान लेकर मीठी आवाज में पुकारते
00:08एक बीडा खाये लियो, हसी सजाये लियो
00:11उनके मीठे बोल जैसे गुलकंद की खुश्बू
00:15पूरे माहोल को महका देते थे
00:18घर की देहरी पर खड़ी बहुजी और बच्चे आवाज लगाते
00:21पनवाडी, पनवाडी
00:23कथा, सुपारी, सौंफ, गुलकंद
00:28अपने जादूई हाथों से स्वाद रचता था पनवाडी
00:32आज ये दृश्य दुरलब है, लेकिन खत्म नहीं
00:37अगर देखना हो, तो वरिंदावन की गलियों में आज भी मिल जाएंगे
00:42क्या आपने कभी ऐसे पनवाडी देखें?
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