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A controversial film sparks debate, but what’s the real truth behind the narratives we see? How many Hindus eat meat? Why is Beef such a sensitive topic? This video dives deep into history, scriptures, and data to explore food practices, cultural diversity, and social perceptions in India. From ancient texts to modern surveys, uncover facts that challenge popular assumptions and reveal a more complex reality. Watch till the end to see how history, religion, and society intersect in ways rarely discussed.

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#DhruvRathee #KeralaStory2 #BeefDebate #Hinduism #IndiaPolitics #ReligiousDebate #KeralaNews #IndianSociety #FoodFreedom #CulturalDebate
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Transcript
00:00नमाजचार दोस्तों, हाली में एक और नफरती प्रोपगेंडा फिल्म मार्किट में आई थी
00:04नहीं, मैं अभी वाली की बात नहीं कर रहा है, मैं इससे पिछली वाली की बात कर रहा हूँ
00:08केरेला स्टोरी टू, इसमें वही घिसा पिटा नारेटिव था
00:11हर मुसलिम को विलन दिखा दो और हर हिंदू लड़की को बेवकूफ भेड की तरह दिखा लेकिन एक सीन बड़ा
00:16खास था जो बड़ा वाइरल भी हुआ
00:18फिल्म के ट्रेलर में एक हिंदू लड़की को जबरदस्ती बीफ खिलाते हुए दिखाये जाता है
00:24इंटरस्टिंगली कॉमेंट्स में भी यही डिसकेशन चल रही थी
00:27किसी को परोटा के बिना बीफ देना क्राइम है
00:29यह केरेला स्टोरी नहीं, नौर्थ इंडियन स्टोरी है
00:32हमें परोटा बीफ कॉम्बो पसंद है
00:34अब इमेजन करो, सौ हिंदू लोग एक कमरे में बैठे हैं
00:37उनमें से कितने मास खाते होंगे
00:38गेस करके बताओ, बीस, तीस
00:41वेल, प्यू रिसर्च सेंटर का डेटा कहता है चपपन
00:44आधे से ज्यादा हिंदू नौन वेजिटेरियन है
00:47और 45% भ्रामन्ड भी नौन वेजिटेरियन है
00:50तो सवाल ये उठता है कि ये आईडिया कहां से आया
00:52कि असली हिंदू सिर्फ शाकाहरी होता है
00:55कुछ हिंदूों के लिए आखिर बीफ, इतना सेंसिटिव इशू कैसे बन गया
00:59इसका जवाब हजारों साल पुराने स्क्रिप्चर्स और हमारे इतिहास में छिपा है
01:03आईए समझते हैं आज के इस वीडियो में
01:15देश में आज के दिन करोडों हिंदू ऐसे हैं जो धार्मिक कारणों की वजह से मीट नहीं खाते
01:20और ये स्क्रिप्चर्स के हिसाब से सही है
01:22जैसे कि महा भारत में अनुशासन पर्फ के चैप्टर 116 में
01:26युधिश्टर भीश्म से पूचते हैं मास खाने से क्या नुकसान होता है
01:30इस पर भीश्म कहते हैं कि राजन जो जीवन भर किसी भी प्राणी का मास नहीं खाता
01:34वो स्वर्ग में शेष्ट और विशाल स्थान पाता है
01:37मास खाने वाले कुम्भी पाक नर्क में पकाये जाते हैं
01:41अहिंसा परम धर्म है, परम सयम है, परम दान और परम तपस्या है
01:46अब ये सुनकर आपको लगेगा दोस्तों की बात क्लियर है
01:48लेकिन रुको जरा, वही भीश्म उसी कॉन्वर्सेशन में थोड़ी देर बात कुछ और भी कहते हैं
01:53मनु को कोट करते हुए वो कहते हैं, जो मास वेदों के नियमों के अनुसार, मंत्रों द्वारा सैंक्टिफाई किया गया
02:00है
02:00पित्रों के लिए होने वाले अनुस्ठान में बना है, वो मास शुद है
02:04मतलब एक ही कॉन्वर्सेशन में दोनों बाते कही जा रही है
02:07और ये contradiction सिर्फ भीष्म तकसीमित नहीं है
02:10व्यास सहिता जो हिंदु धर्म की एक प्रमुख टेक्स्ट है
02:12उसमें साफ लिखा है कि ब्रामन को किसी भी ऐसे जानवर का मास नहीं खाना चाहिए
02:17जो religious sacrifice के इलावा किसी दूसरे परपस से मारा गया हो
02:21और जब वह किसी धार्मिक समारों में पुजारी के रूप में कार्य कर रहा हो
02:25तब भ्रामन को मास खाना चाहिए
02:28शत्रिये को देवताओं को और अपने पित्रों को प्रसन करने के बाद मास खाना चाहिए
02:51आज का जमाना अलग है परंपराय बदल चुकी हैं ये बात डाइजेस्ट होनी काफी मुश्किल लगती है लेकिन बात सच
02:58है आज के समय में भी मास खाना बहुत से भ्रामनों के कल्चर का हिस्सा है और ये कोई छुपी
03:03हुई बात नहीं है कौनकर्ण शेत्र के कई सरस्वत भ्
03:17जमनों में भी मचली खाना आम बात है और मचली सिरफ खाना ही नहीं बल क्यूंकि रिचुल्स का भी हिस्सा
03:22है बेंगॉली शादियों में एक रिचुल है तत्व रसम जिसमें दुलहे का परिवार सजी हुई रोहु मचली दुलहन के परिवार
03:29को उफार में देता है मृत्य�
03:44प्रदेश के तरकुला देवी मंदिर में मतन, ओडिशा के विमला मंदिर में मचली और मतन, और तमिल लाडू के मुन्यांडी
03:51स्वामी मंदिर में तो चिकन और मतन बिर्यानी का भोग लगता है।
04:14मंदिरों में लिटरली ऐसा होते होएं देख रहे हैं, मास और धर्म साथ साथ चलते रहे हैं।
04:19अब यहाँ पर एक ऐसा सवाल आता है जो बहुत से लोगों के मन में उड़ता है, कि क्या पांडवों
04:24ने और श्री राम ने भी मास खाया होगा।
04:26अब कॉमन सेंस लगाई जाए तो जंगल में कौन 12 साल तक उनके लिए पनीर बटर मसाला बना रहा होगा।
04:31क्या केवल पेडों से फल तोड़ कर खाते हुए पांडवों ने 12 साल निकाल दिये।
04:35हमें यहाँ पर गैस करने की जरूरत नहीं है।
04:37महा भारत में वन पर्फ के अध्याये 256 पर जरा नजर डालिये।
04:41युधिष्टर को एक सपना आता है जिसमें कुछ हिरन उनके पास आते हैं और कहते हैं कि उनके भाईयों ने
04:47इतने सारे हिरनों को मार डाला है और अब केवल विशेश बचे हैं।
04:51वे युधिष्टर से अनुरोध करते हैं कि उन्हें बीच की तरह रहने दें ताकि वे फिर से बढ़ सकें।
04:56युधिष्टर को दुख होता है और फिर वो अपने भाईयों से कहते हैं कि हम एक साल और आठ महीने
05:01से उन पर निर्भर होकर खा रहें।
05:31अब हम काम्यक वन में चलते हैं।
05:33आम और कृष्ण को मास का सेवन करते हुए और मदिरा पीते हुए दिखाया गया है।
05:38सीता देवी रिवर गौड़ेस गंगा को कसम देती हैं कि वे मास, चावल और वाइन के हजार मर्तबान ओफर करेंगी।
05:46सीता जी गंगा को मीट ओफर कर रही हैं।
05:49ये वालमी की रमायन का अयोध्या कांड अध्याए बावन श्लोक नवासी है।
05:53स्वामी विवेकानंद इसी श्लोक का उलेख कर रहे हैं।
05:56और महा भारत के उध्योक पर्व अध्याए 58 श्लोक पाच का जहां संजय कहते हैं कि उन्होंने कृष्ण और अर्जुन
06:03को चंदन का लेफ लगाये हुए, फूलों की माला पहने हुए और मदवासव पीते हुए देखा।
06:09और अर्जुन की अपनी कसम देखिए, द्रोन पर्फ चैप्टर 73, जब अर्जुन जैदरत से लड़ने जाते हैं तो वो कहते
06:16हैं कि अगर मैं कल तक जैदरत का वद नहीं कर पाता, तो मेरा भी वही हश्र हो जो उनका
06:21होता है, जो अपने मा या बाप की हत्या करते हैं, या क
06:24किसी ब्रह्मन की हत्या करते हैं, या किसी के बारे में गलत बोलते हैं, या खीर अत्वा मास खाते हैं,
06:29देवताओं को भोग लगाए बिना, समझ रहे हो दोस्तों, अर्जुन ये नहीं कह रहे हैं कि मास खाना पाप है,
06:35वो ये कह रहे हैं कि देवताओं को भोग लगाए बि
06:54भी हमारा धर्म भरस्ट हो जाता है
06:55और अर्जुन देवताओं को मास का भोग चड़ाने की बात कर रहे है
06:58लेकिन बात यह है दोस्तों कि बहुत से मंदिरों में आज भी ऐसा होता है
07:02वेस्ट बेंगॉल के दक्षण एश्वर काली मंदिर और थन थनिया काली बाडी मंदिर
07:07और केरल के प्रासिनिक कड़ावू मंदिर में मचली का भोग चड़ाया जाता है
07:11और इसकी लावर रमायन के मैं कुछ और श्लोक भी बता देता हूँ जहां मास खाने के रेफरेंसेज है
07:16कहीं आपको लग रहा हो वो पुराने एक दो श्लोक चरी पिक किये गए हो तो
07:19अयोध्या कान में अध्याय बावन श्लोक एक सो दो
07:22जहां राम और लक्षमन के एक बोर, एंटिलोप और हिरन का शिकार कर उनका मास खाने की बात कही गई
07:28है
07:28अध्याय 96 के श्लोक एक और दो में रोस्टिड मीट की बात की गई है
07:32सुन्दरकान के अध्याय 36 में जब हनुमान सीता जी के पास संदेश लेकर जाते हैं
07:37तो कहते हैं कि राम ना तो मास खाते हैं ना ही मदिरा का सेवन करते हैं
07:41यानि सुन्दरकान में राम का मास नहीं खाना एक ऐसी बात है जो स्पेसिफिकली मेंशन की गई है
07:46जब कोई चीज specifically mention होती है तो इसका मतलब यह है कि वो normally होती थी और अब नहीं
07:52हो रही है उसका ना होना unusual है
07:54अब कुछ शाकाहरी लोग हैं जो हर जगहें मदिरा को शहद कहते हैं और मास को कंदमूल और फल
07:59इनका agenda vegetarianism को promote करना है और मैं इनकी intention की respect करता हूँ
08:04in fact मैं खुद vegetarian हूँ मैं कभी मास नहीं खाता और इस वीडियो के जरीए ना ही मैं non
08:09-vegetarianism को promote कर रहा हूँ
08:11मैं यहाँ आपको scriptures की सच्चाई दिखा रहा हूँ
08:13यह कहना कि हमारे हिंदू scriptures सिर्फ और सिर्फ 100% pure vegetarianism को promote करते हैं यह गलत है
08:20ब्रहद अरणियाक उपनिशत के chapter 6 section 4 में शलोक 18 को भी देख लीजिए
08:24बताया गया है कि अगर कोई विद्वान पुत्र चाहता है तो उसे एक vigorous bell के मास के साथ पके
08:31हुए चावल खाने चाहिए
08:32उसे और उसकी पतनी को यह घी के साथ खाना चाहिए
08:35और बात की एवल scriptures की नहीं है
08:37हमें यहाँ पर actual history में भी इसके evidence मिलते हैं कि प्राचीन भारत में मास खाना आम बात थी
08:43चरक सहिता में कई बीमारियों के इलाज के लिए मास खाना recommend किया गया है
08:47लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो यहाँ पर उठता है वो यह कि यह सब बदला कैसे
08:51कब से और क्यूं vegetarianism को शुद माना जाने लगा और मास को अशुद माना जाने लगा
08:58इसकी कहानी आगे आईगी वीडियो में लेकिन इससे पहले क्या आपने notice किया दोस्तों कैसे इस वीडियो में
09:03इतने सारे अलग-अलग references का इस्तिमाल किया गया है
09:06कहीं पर कोई survey है तो कहीं पर कोई historical text
09:08इतने सारे data को compare करने में काफी वक्त लगता है
09:12लेकिन आज AI से इस तरीके की research, data analysis और reports यह सब काफी तेजी से हो सकता है
09:17AI से आज लोग घंटों की research मिंटों में कर रहे हैं
09:20professional presentations तयार कर रहे हैं
09:22लिना code लिखे, अपनी पूरी websites और projects बना रहे हैं
09:25यहां तक कि इस वीडियो में जो आपने visuals देखे, उनमें भी AI ने बहुत मदद करी है
09:29यह सारी चीज़े मैं आपको सिखाता हूँ अपनी AI master class में
09:33यह तीन घंटे की workshop है जहां मैं personally live आकर आपको 25 सबसे important AI tools सिखाता हूँ
09:39अगला session इसी Sunday को हो रहा है और यह आपके लिए आखरी opportunity है join करने के लिए
09:43join करने का link नीचे description में मिल जाएगा या फिर आप इस QR code को scan कर सकते हो
09:47अभी तक एक लाग से ज्यादा लोग इस AI revolution का हिस्सा बन चुके हैं और यह आपके लिए सबसे
09:52affordable और fastest opportunity है अपने आपको AI में upskill करने की
09:56जल्दी से जाकर join कर सकते हो
09:58अब आते हैं अपनी इस shift की कहानी पर
10:00इसकी कहानी शुरू होती है लगभग 5th century BC में
10:06महावीर जैन ने strictly vegetarian diet की वकालत की
10:09जियो और जीने दो
10:11गौतम बुध ने वैसे तो एक बार कहा था कि अगर कोई भीक्षा में भीक्षू को mass offer करता है
10:16तो भीक्षू को खा लेना चाहिए
10:18क्योंकि एक भीक्षू को कुछ मांगना नहीं चाहिए
10:20लेकिन इसके इलावा आम तोर पर उन्होंने भी हमेशा vegetarianism को ही promote किया है
10:25अब यहाँ के history बड़ी interesting है इसी reason से जैन धर्म और बौध धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकने
10:30के लिए
10:31हिंदू धर्म में शाकाहार को शामिल किया गया
10:34कई हिंदू especially जो मुख्य रूप से ब्रह्मन और व्यापारी थे वो शाकाहारी बन गए
10:39ब्रह्मन को इससे एक moral authority मिली कि हम मास नहीं खाते इसलिए हम शुद है तुम से उपर है
10:45और व्यापारी भी शाकाहारी बन गए क्योंकि वो पूंट शाकाहारी आहार का खर्च उठा सकते थे
10:50पैटन समझें हाँ पर आप दोस्तों
10:51vegetarian होना एक economic privilege थी
10:54जो afford कर सकते थे वो शुद बन गए
10:57और जो afford नहीं कर सकते थे उन्हें अशुद घोशित कर दिया
11:01दलितों के लिए मामला अलग था
11:02वो गरीब थे और उन्होंने मास खाना जारी रखा जिसमें beef भी शामिल थी
11:06डॉक्टर बियार अमबेटकर ने नोट किया था कि
11:09food restrictions ने दो dividing lines बनाई
11:11एक शाकाहारी और मासाहारियों के बीच
11:14और दूसरी वो जो beef खाते हैं और जो beef नहीं खाते हैं उनके बीच
11:18उन्होंने कहा ये दूसरी line वो थी जिसने अच्छूतों को दूसरों से अलग कि
11:23डॉक्टर अमबेटकर की writing दोस्तों आपको विदेश मंत्राले की website पर मिल जाएगी
11:27इसका भी link आपको resource document में मिलेगा
11:30डॉक्टर अमबेटकर ने जिस dividing line की यहाँ पर बात की है वो कोई theoretical चीज नहीं है
11:35बलकि actual numbers में भी दिखती है
11:37तीन large scale government surveys ने अनुमान लगाया है कि ज्यादतर भारतिये non-vegetarians हैं
11:42इन्होंने non-vegetarians की percentage estimate की है 63% से 77% के बीच
11:48अब communities की बात करें तो और भी interesting data देखने को मिलता है
11:51भारत के समधाओं में सबसे extensive survey, Anthropological Survey of India 1993 में किया गया था
11:58इसका नाम था People of India
12:00500 sociologists को उनके local communities की knowledge के अधार पर चुना गया
12:05और 3000 researchers की team के साथ field पर भेजा गया
12:08उन्होंने देश की 4,635 communities में 736 traits पर research की
12:15आठ साल तक ये काम चला और उन्होंने 46,000 pages की report तयार की
12:2046,000 pages की एक report
12:22इस report के अनुसार अलग-अलग religions में लगभग 88% Indian communities meet eaters है
12:28Pew Research Center के survey से एक religious divide भी देखने को मिलता है
12:32पता चलता है कि हिंदू समुदाय में सिरफ 44% लोग vegetarian है
12:36जबकि जैन समुदाय में 92% लोग vegetarian है
12:39और ये कोई coincidence नहीं है जो पूरी history मैंने आपको बताई
12:42वही बात यहाँ पर साफ साफ दिखती है
12:44जो लोग strictly vegetarian diet afford कर सकते थे
12:47वही लोग जैनिजम में आए
12:49इन में केवल 3% SC और 1% ST है
12:52यहाँ तक कि आज भी जैन्स इंडिया की wealthiest community है
12:56अब सवाल यहाँ पर यह उठेगा कि क्या बाकी 56% हिंदूों को धर्म से कुछ लेना देना नहीं था
13:01ऐसा नहीं है
13:0239% हिंदू ऐसे हैं जो non-vegetarian हैं लेकिन conditions apply करते हैं
13:07पहली उनकी धार्मिकता उन्हें कुछ ही specific type की meat खाने से रोकती है
13:11और दूसरी कि वो कुछ specific दिनों में मास खाने से रुख जाते हैं
13:16जैसे कि मंगलवार को meat नहीं खाएंगे, नवरातरी में नहीं खाएंगे
13:19कुछ हिंदू पूरे सावन में मास खाने से परहेज करते हैं
13:22इस सर्वे के अनुसार सिरफ 16% हिंदू ऐसे non-vegetarian है जिनके लिए कोई restriction नहीं है
13:27और सबसे important बात, caste effects choice
13:30सर्वे ये भी दिखाता है कि SCST और OBC में non-vegetarians की percentage ज्यादा है
13:36इन communities में 60% non-vegetarians थे जबकि general category में 47% non-vegetarians थे
13:42साल 2006 में हुए The Hindu और CNN IBN के State of the Nation सर्वे में भी ये फरक दिखता
13:48है
13:48करीबन 15,000 respondents के इस सर्वे में दिखा कि 88% tribals meat खाते हैं
13:54जबकि भ्रामणों में से 45% मासा हारी थे
13:57ध्यान से सुनों इस नंबर को 45% भ्रामण non-vegetarian है
14:01भारत सरकार के NSSO सर्वे में एक और interesting चीज़ पता लगी
14:05ये सर्वे एक लाख एक हजार households पर किया गया
14:08और पता चला कि हिंदूओं के बीच जो beef खाने वाले थे
14:11उनमें से 70% SCST थे
14:14एक बार फिर से जिस dividing line की बात डॉक्टर अंबेट करने की थी
14:18वो यहाँ actual numbers में भी देखी जा सकती है
14:21इस पूरे data को देखकर अब आप Indian politics को भी बहतर समझ सकते हो
14:24इसे देखकर आप समझ सकते हो कि क्यूं Congress नेता राहुल गांदी ने
14:29RJD नेता लालू यादफ के साथ openly मटन पका कर खाया
14:33क्यूंकि उन्हें पता था कि ज्यादतर हिंदू इससे offend होने वाले नहीं है
14:36खास कर SCST और OBC वर्ग
14:38जबकि प्रधान मंत्री मोदी ने चुनाव के दौरान मटन मचली पर हंगामा किया
14:42क्यूंकि उनकी पार्टी BJP को कई लोग भ्रामन बन्या की पार्टी कहते हैं
14:58बहुत से जनरल कैटिगरी के लोग अपरकास्ट भ्रामन लोग BJP को इसलिए सपोर्ट करते हैं
15:03क्यूंकि BJP अपरकास्ट को ज्यादा फेवर करते हैं
15:06कहली जिये कि ऐसा दिखाया जाता है क्योंकि BJP का double standard केरेला और North East में clearly दिखता है
15:13केरेला में ASI study में पता चला कि 72 communities महंगे मतन की तुलना में beef prefer करती है
15:19ASI survey के 20 साल बाद भी हमें Times of India Tribune और The Prince से report मिलती है
15:23कि आज भी केरेला में हिंदू या तो शाकाहारी होते हैं
15:27और अगर वो non-vegetarian है तो वो beef को किसी भी दूसरे मास की तरह ही खाते हैं
15:32Beef खाना केरेला में किसी भी तरीके का social stigma नहीं है
15:35पर एक बर फिर से आप इसका असर politics पर देख सकते हैं
15:382017 में मलपुरम में by elections हुए
15:41बीजेपी के उमीदवार एन श्री प्रकाश ने वादा किया
15:44कि अगर लोग उन्हें vote देंगे तो वो अच्छी quality की beef सुनिश्चित करेंगे
15:48सही सुना अपने बीजेपी के candy rate ने beef की quality का वादा किया
15:52ऐसे ही 2021 में बीजेपी ने तमिल लाडू में गाय की हत्या पर रोक लगाने का वादा किया
15:57लेकिन केरेला स्टेट elections के लिए बीजेपी manifesto में ये वादा कहीं नहीं था
16:01त्रिपूरा में 83% हिंदू है
16:03फिर भी 2023 की त्रिपूरा स्टेट elections के दुरान भारती अजंता पार्टी के manifesto में गाय या बीफ का कोई
16:09mention नहीं मिला
16:10RSS के प्रचारक और त्रिपूरा में बीजेपी के election manager सुनील देवधर ने 2018 में कहा था
16:15कि North East में Christians और Muslims की अच्छी खासी संक्या है
16:19और लोगों को ये बात पचाने में मुश्किल हो सकती है लेकिन यहां के बहुत से हिंदू भी बीफ खाते
16:24हैं
16:25और अगर वो बीफ बैन नहीं चाहते तो ऐसा नहीं होना चाहिए
16:45और फिर ये वीडियो भी देखो
16:47बीजेपी स्पोक्सपरसन सुदान शुत्रिवेदी का वाइरल वीडियो
16:50जो नौर्थीस्ट में खाया जाता है वो गाय है क्या?
16:52नहीं जी, उसका नाम है मिथुन
16:56तो ये जो पूरी पॉलिटिक्स बीजेपी नौर्थ इंडियन स्टेट्स में खेल रही है
16:59बीफ के नाम पर लोगों से हिंसा करवाओ
17:02बीफ के नाम पर लोगों को डराओ
17:03और इनकी ये प्रोपगेंड़ फिल्में आती है
17:06जो एक बार फिर से बीफ का डर देकर लोगों को पॉलराइस करती है
17:09ये सबका सब एक नाटक है
17:11जब वोट चाहिए होते हैं तो इनके लिए बीफ ओके हो जाता है
17:14और जब हिंदी बेल्ट में पॉलराइसेशन चाहिए तो बीफ पाप बन जाता है
17:18इसका धर्म से कुछ लेना देना नहीं है
17:20ये बात सिर्फ और सिर्फ पॉलिटिक्स की है
17:25जोग्रफी भी हाँ पर एक बहुत बड़ा रोल प्ले करती है
17:27CSDS दुआरा कंड़क्ट किये गए
17:29State of the Nation सर्वे में देखने को मिलता है
17:31कि रीजिनल वेरियेशन्स है
17:33Coastal States में वेजिटेरियन्स की population बहुत कम है
17:35जैसे कि केरेला में सिर्फ 2% लोग वेजिटेरियन है
17:38आंदरप्रदेश में सिर्फ 4%
17:40ओडिसा में 8%
17:41और पस्चे में बेंगॉल में सिर्फ 3%
17:43जबकि West और North में जो Land Locked States है
17:46जहाँ पर मचलियां असानी से नहीं मिल पाती है
17:48जहाँ पर गेहूं उगाना ज्यादा असान है
17:50वहाँ वेजिटेरियन्स की percentage सबसे ज्यादा है
17:53राजस्थान में 63% और हर्याना में 62% लोग वेजिटेरियन है
17:58यहाँ पर कास्ट और जोगरिफी के लावा
17:59एक gender divide भी देखने को मिलता है
18:01क्या आप गेस कर सकते हो दोस्तो
18:03मेल्स और फीमेल्स में वेजिटेरियन्स की ज्यादा परसंटेज किसके बीच है
18:07वीडियो को पॉस करके 2 सेकिंड सोच सकते हो
18:09शायद आप गेस करोगे कि फीमेल्स की ज्यादा परसंटेज वेजिटेरियन है
18:13और यह गेस बिलकुल सही होगी
18:15बहुत से सर्वेज में बार-बार यह देखा गया है
18:17जैसे कि National Family Health Survey 5 में
18:19जो औरते occasionally non-veg खाती हैं
18:22उनकी परसंटेज 70.6 पर है
18:24और जबकि Indian men में यही परसंटेज 83.4 परसंट पर है
18:28यह trend सिरफ हिंदूों में नहीं बलकि दूसरे religions में भी देखने को मिलता है
18:32कि ओरतों के मुकाबले आदमी ज्यादा मीट खाते हैं
18:35हैरानी की बात यह है दोस्तों कि इस सब के बाद भी
18:38ज्यादा तर लोग शाकाहारी होने को लेकर कहते हैं
18:40कि यह तो मेरा विश्वास है यह मेरा धर्म है
18:43लेकिन इन सारे सर्वेस से हमें पता चलता है
18:45कि शाकाहारी होना अपनी personal belief पर इतना निर्भर नहीं करता
18:49जितना की विरासत में मिली हुई cultural practice पर
18:52आपके परिवार के vegetarian या non-vegetarian होने के पीछे
18:56geography, economic well-being और caste इससे कहीं ज्यादा बड़ा role play करते हैं
19:01और यही हिंदूइजम की सच्चाई है
19:03इंडिया वैसे तो एक diverse देश है
19:04लेकिन हिंदूओं में भी बहुत से अलग-अलग तरहे के लोग देखने को मिलते हैं
19:08एक तरफ अगोरी सन्यासी हैं जो इंसानी मुर्दे का मास भी खा लेते हैं
19:12और दूसरी तरफ सुधा मुर्ती जैसे लोग हैं
19:14जो देश से बाहर जाते हुए अपने चम्मच प्लेट भी साथ लेकर जाते हैं
19:18क्योंकि ये लोग इतने प्योर वेजेटेरियन्स हैं कि साफ सुधरे बरतनों में भी इन्हें मीट की स्मेल आ जाती है
19:30अगर आपको वेजेटेरियन बनना है तो जरूर बनिये क्योंकि ये परियावरण के लिए बहतर है
19:34अनिमल कुल्टी के परस्पेक्टिफ से ये मॉरली और एथिकली सही चीज है
19:38क्लाइमेट चेंज के नजरिये से भी एक वेजेटेरियन डाइट का क्लाइमेट को खराब करने में कम कॉंट्रिबूशन रहता है
19:44और हेल्थ के परस्पेक्टिफ से भी धेरो साइन्टिफिक स्टडीज में पाया गया है कि जो लोग कम मीट खाते हैं
19:49वो ज्यादा उमर तक जीते हैं
19:51ज्यादा हेल्दी रहते हैं
19:52इन सब पॉइंट्स को कंसिडर करके बाय चोईस वेजेटेरियन बनिये मेरी तरह है
19:56लेकिन इसलिए मत वेजेटेरियन बने कि मेरा मीट खाने से धर्म भरस्ट हो जाएगा
20:00मीट अशुध होती है मैं मंगलवार को नहीं खा सकता है
20:07जैनिजम और बुद्धिजम ने कमपैशन को सेंटर में रखा और बहुत से हिंदूों ने बाय चोईस उस पात को अपनाया
20:13ये एक बहुत सुन्दर फिलोसोफिकल ट्रेडिशन है लेकिन प्राब्लम तब शुरू होती है जब इसे मॉरल सुपीरियोरिटी और कास्ट हाईराकी
20:20का टूल बना दिया जाता है
20:22हिंदू धर्म की डैवसिटी इसके स्क्रिप्चर्स और हिस्टी में दिखती है
20:25और ये एक ऐसी चीज है जो आपको इन नफरत खोर प्रोपगेंडा फिल्मों में कभी जानने को नहीं मिलेगी
20:31ऐसी फिल्मों में ऐसे धेर सारे जूट भरे होते हैं जिनका एकलोता मकसद होता है लोगों के अंदर नफरत गोलना
20:36कभी एतिहास को तोड़ मरोड कर पेश करते हैं तो कभी अपने ही धर्म के खिलाफ जूट फैलाते हैं
20:41लव जिहाद जैसे जूटों के बारे में और डीटेल में जानना है तो उसे मैंने इस वाले वीडियो में एक्सपोस
20:46किया है
20:46यहां क्लिक करके देख सकते हैं
20:48और यहां क्लिक करके AI मास्टर क्लास को जॉइन करना मत भूलना आखरी ऑपोचिनिटी आपके लिए है बहुत बहुत धन्यवाद
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