00:14जब भी हम यह सो मनाते थे हर साल मनाते थे 36 साल पहले जब हम यहां थे इसके मंदर
00:21के अराउंड सब जो थी कश्मीरी पंडित फेमली थी और यहां के जो लोकल मुस्लिम्स थे वो भी इस तवार
00:28में शामिल होते थे
00:31अज भी भी वो आए और हमारे को उतना हैं पिछले चार पाँ जीन से आम ह आई है और
00:36बहुत है है हम यह सक्सेस्फुल इवेंट बना सके हम बहुत खुश है एडमिस्स्रेशन से आप लोगों से सबसे कि
00:43हमारा यह ज़क Bryant मंदर है इसकास पार में बना थत्यास में क्या है एे 18
00:51में बनाया था और इसको 17 साल लगे बनाने में आप यह समझ सकते हों कितनी अच्छी तरुक्रे से बनाया
00:58गया था आखरी सवाद आपसे कि आज का जो आहार है इसमें यहां पर जो आपके बड़ों सी रह चुके
01:05यागा मुस्लिम मेजॉरिटी मेंबर से उन्हों ने बात दिया
01:20अपने घर से चीजे निकाल के यहां हमको प्रोवाइड कर दी हम बहुत कुछ हैं उनसे बहुत ही कुछ है
01:26इसे यही तो एक मिलचार है हमारा यही हमारा चाल आगे भी होना चाहिए हम भी पिछड गया वो भी
01:32पिछड गया हमें फाकर आगरों वापस इधर आएगा हम मिलके
01:37बैटेगा हमको कोई आतराज नहीं है हमारा वह बहुत ही था आज तक उनके साथ हमने कोई जग्राने किया उधर
01:46का लोगा उन्हीं ने तारी इक उठांग हम इदर खराब हो गया मुसलमान लोग भी खराब हो गया हमारे पास
01:53नहीं निशाम है कुछ नहीं है राजा साब है �
01:56उसका नाम है पंडित का उसका मकाम जाने खरीद लिया अगर वह आये गा मुझे कोई अइतराज ने मुझे को
02:02जेगा मैं दिशरे जगह बैठूंगा
02:04बच्पन से कश्मिरी पंटू से ही सीखा है, वो मेरे दिल में है, आज भी मैं जुमू जाता हूँ, दिल
02:14ले जाता हूँ, उनके पास जाता हूँ, उनसे ही सीखा हूँ, जो भी कुछ हूँ, उनकी बदवलत हूँ, उनके बगार
02:20मैं कुछ भी नहीं हूँ, मैं उनके बगार ज
02:34है यह त्योहार हम मना रहे हैं और हमारी बच्च्बन की याद ही इस मंदिर के साथ जुड़ी है क्योंकि
02:40हमारा नानी हाल था यहां पर अब अकदल के पास में ही तो हम यहां आते जाते थे अपने पेरेंट्स
02:45के साथ तो फिर डर्माइन हुआ तो फिर जब सारे चले गए तो म
02:49मंदिर लाक हो गया उसके बाद आज हम फिर से शेक्टी साल बाद इस मंदिर पर आए हैं यह मंदिर
02:56हमारा भी बसे रहा हुआ करता था और कश्मीरी पंडित वरादरी पावी क्योंकि हमारी आख जब थो ती यहां इस
03:02दर्या से हम शुरुआत करते थे यहां हम नहाते थे उ
03:19हमें आज बहुत खुशी है यह लोग जो इस वकत और्गनाइज कर रहे हैं यह और्गनाइजिंग कमीटी वाले लोग हमारे
03:26बच्पन के दोस्त हैं हमारे साथ ही ग्रोव हो गए हैं यह हमारी परादरी है हम अभी खड़े हैं सिरीनगर
03:32के शेहरे खास में जहलम दर्या के कि
03:49पहचाने जाते थे यहां पर सदियों तक कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुसल्मान प्यार महबत और बाचारे से रहते थे लेकिन
03:57नबे की दहाई के बाद जो कुछ हुआ वो आप सब को पता है लेकिन आखिरकार जहां वेस्ट एशिया पस्चिमी
04:05एशिया बोले या खाड
04:19जो खबर है यहां पर सिरी नगर के शेहर खास में करफली महला में इस रगुमनात मंदिर का खुलना जहां
04:27पर 36 साल के बाद इस रगुमनात मंदिर के द्वार खुले और जहां पर आज 36 सालों के बाद पूजा
04:35अरचना हुई और जिसमें बचचट कर मुसल्मान समधाई के �
04:39उने बाग लिया और इस बात का प्रमान दिया कि वो हमेशा अपने कश्मीरी पंडित बरादरी से वाबस्ता लोगों से
04:48उसी प्यार और खुलू से मिलते हैं और उनका बेसबरी से इंतजार करते हैं जितना वो आज से तीन दाहाई
04:54पहले किया करते थे
04:56श्री नगर से वान इंडिया के लिए मैं इजहार अली है
Comments