00:00यही योगी जिसको आप लोग सादू संद कहते हो, हम तो घुमाईउं का बेटा अकबर कहते हैं, हम तो अरंजेब
00:06कहते हैं, यह नहीं यहीं तो कहने के लाएं, यह मंदिर तोड़ने का सबर्तन करने वाला आदमी है।
00:15कोई धर्म के खिलाब आचन करता है, क्योंकि ऐसे तमाम कालने मी होंगे, जो धर्म की आड में सनातन धर्म
00:23को कमजोर करने की साजी सरच रहे हैं, हमें उन से साउधान होना होगा।
00:45इस मामले में दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने सपश्ट किया है कि फिलहाल दोनों
00:52की गिरफतारी नहीं होगी।
00:53हाला के अदालत ने एक महत्वपून शर्त भी रखी है कि शिकायत करता और आवेदक पक्ष दोनों ही इस मामले
01:00को लेकर मीडिया में किसी भी प्रकार का साक्षातकार नहीं देंगे।
01:04इस फैसले से दोनों संतों को कानूनी प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है।
01:34मामले से जुड़े तमाम दस्तावेजों और साक्षों का गहराई से अध्यन करने के बाद अब अपना निर्ने सारवजनिक किया है।
01:41स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती और उनके शिश्य स्वामी मुकुंदा नंद गिरी ने गिरफतारी की आशंका के चलते हाई कोर्ट का
01:48दर्वाजा खटखटाया था और अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी।
01:52अदालत ने अपने आदेश में जहां एक और दोनों को गिरफतारी से सुरक्षा प्रदान की है, वहीं दूसरी और कुछ
01:58कड़े प्रतिबंद भी लागू किये है।
02:00इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंद मीडिया में बयान बाजी को लेकर है।
02:05हाई कोर्ट ने सपष्ट तौर पर आदेश दिया है कि शिकायत करता और आवेदक दोनों ही इस मामले के गुण
02:10दोशों या कानूनी कारिवाही पर मीडिया इंटर्व्यू नहीं देंगे।
02:14न्यायाधीश का मानना है कि इस तरह की समवेदनशील मामलों में सारवजनिक बयान बाजी जाँच की निश्पक्षता को प्रभावित कर
02:21सकती है और समाज में अनवश्यक तनाफ पैदा कर सकती है।
02:26ये प्रतिबंद इसलिए भी महत्वपूर है क्योंकि आरोपी एक प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर आसीन है और इस मामले ने व्यापक
02:33सामाजिक ध्यान आकरशित किया है।
02:56जाच दल को अभी भी इस मामले में साक्ष जुटाने और गवाहों के बयान दर्ज करने का अधिकार है।
03:26आरोपों की गंभीरता अभी भी कम नहीं हुई है। अब सारा दारोमदार आने वाली जांच और ट्रायल पर निर्भर करेगा।
03:32हाई कोट का ये हस्तक्ष फिलहाल एक बड़ी कानूनी कारेवाही को रोकने का काम करेगा लेकिन अंतिम न्याय का फैसला
03:39ट्रायल कोट में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।
03:42इस मामले ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों और उनमें होने वाली गतिविधियों को कानूनी जांच के दाएरे में लाकर
03:49खड़ा कर दिया है।
03:51फिलहाल के लिए इलाहबाद हाई कोट के इस फैसले ने दोनों पक्षों को सईयम बरतने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान
03:57करने का निर्देश दिया है।
Comments