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Breaking News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दी बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगाई रोक! आखिर किन शर्तों पर मिली शंकराचार्य को अग्रिम जमानत और कोर्ट ने क्यों कहा कि कोई मीडिया में नहीं देगा इंटरव्यू? जानिए पूरी सच्चाई।

The Allahabad High Court has granted anticipatory bail to Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati and his disciple Swami Mukundanand Giri in a Sexual harassment case. Justice Jitendra Kumar Sinha's bench provided protection from arrest while imposing a strict condition that neither the complainant nor the accused should give any media interviews regarding the case.

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~PR.250~HT.408~ED.520~GR.538~

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00:00यही योगी जिसको आप लोग सादू संद कहते हो, हम तो घुमाईउं का बेटा अकबर कहते हैं, हम तो अरंजेब
00:06कहते हैं, यह नहीं यहीं तो कहने के लाएं, यह मंदिर तोड़ने का सबर्तन करने वाला आदमी है।
00:15कोई धर्म के खिलाब आचन करता है, क्योंकि ऐसे तमाम कालने मी होंगे, जो धर्म की आड में सनातन धर्म
00:23को कमजोर करने की साजी सरच रहे हैं, हमें उन से साउधान होना होगा।
00:45इस मामले में दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने सपश्ट किया है कि फिलहाल दोनों
00:52की गिरफतारी नहीं होगी।
00:53हाला के अदालत ने एक महत्वपून शर्त भी रखी है कि शिकायत करता और आवेदक पक्ष दोनों ही इस मामले
01:00को लेकर मीडिया में किसी भी प्रकार का साक्षातकार नहीं देंगे।
01:04इस फैसले से दोनों संतों को कानूनी प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है।
01:34मामले से जुड़े तमाम दस्तावेजों और साक्षों का गहराई से अध्यन करने के बाद अब अपना निर्ने सारवजनिक किया है।
01:41स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती और उनके शिश्य स्वामी मुकुंदा नंद गिरी ने गिरफतारी की आशंका के चलते हाई कोर्ट का
01:48दर्वाजा खटखटाया था और अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी।
01:52अदालत ने अपने आदेश में जहां एक और दोनों को गिरफतारी से सुरक्षा प्रदान की है, वहीं दूसरी और कुछ
01:58कड़े प्रतिबंद भी लागू किये है।
02:00इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंद मीडिया में बयान बाजी को लेकर है।
02:05हाई कोर्ट ने सपष्ट तौर पर आदेश दिया है कि शिकायत करता और आवेदक दोनों ही इस मामले के गुण
02:10दोशों या कानूनी कारिवाही पर मीडिया इंटर्व्यू नहीं देंगे।
02:14न्यायाधीश का मानना है कि इस तरह की समवेदनशील मामलों में सारवजनिक बयान बाजी जाँच की निश्पक्षता को प्रभावित कर
02:21सकती है और समाज में अनवश्यक तनाफ पैदा कर सकती है।
02:26ये प्रतिबंद इसलिए भी महत्वपूर है क्योंकि आरोपी एक प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर आसीन है और इस मामले ने व्यापक
02:33सामाजिक ध्यान आकरशित किया है।
02:56जाच दल को अभी भी इस मामले में साक्ष जुटाने और गवाहों के बयान दर्ज करने का अधिकार है।
03:26आरोपों की गंभीरता अभी भी कम नहीं हुई है। अब सारा दारोमदार आने वाली जांच और ट्रायल पर निर्भर करेगा।
03:32हाई कोट का ये हस्तक्ष फिलहाल एक बड़ी कानूनी कारेवाही को रोकने का काम करेगा लेकिन अंतिम न्याय का फैसला
03:39ट्रायल कोट में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।
03:42इस मामले ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों और उनमें होने वाली गतिविधियों को कानूनी जांच के दाएरे में लाकर
03:49खड़ा कर दिया है।
03:51फिलहाल के लिए इलाहबाद हाई कोट के इस फैसले ने दोनों पक्षों को सईयम बरतने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान
03:57करने का निर्देश दिया है।
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