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  • 2 days ago
 सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और खुलकर उस धर्म का पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं रह जाता. बेंच ने साफ किया कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है. यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और एक पादरी के रूप में काम कर रहा था. उसने कुछ लोगों के खिलाफ 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज कराया था, जिन्होंने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की थी. उस व्यक्ति ने SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा की मांग की थी.

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Transcript
00:04धर्मांतरित लोगों के SC-ST status को लेकर सुप्रिम कोट ने बड़ा फैसला दिया है।
00:30कोट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इसाई धर्म अपनाने वाले दलित व्यक्ति, अनुसूची जाती या अनुसूची जन्जाती अधिनियम के
00:39तहत मिलने बाले किसी भी लाब का दावा नहीं कर सकते हैं।
01:06सुप्रीम कोट ने आंद्र प्रदेश हाई कोट के उस फैसले को सही थाराया है।
01:11जिसमें कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति इसाई धर्म अपना लेता है और खुल कर धर्म का पालन करता
01:17है तो वह अनुसूची जाती का सदस नहीं रह जाता।
01:21ये मामला ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने इसाई धर्म अपना लिया था और एक पादरी के रूप में काम
01:29कर रहा था।
01:30उसने कुछ लोगों के खिलाप SCST Act के तहत मामला दर्ज कर आया था जिसमें कथित तौर पर उसके साथ
01:37मार पीट की गई थी।
01:39Bureau Report, ETV भारत
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