00:30श्वयम सरश्वती जी समुद्र को श्याही बना ले, ब्रक्षों को कलम बना ले, वनंत रूपों में भूमी को कागज बना
00:39कर अनंत काल तक लेखें, तो भी उस परमात्मा की महिमा का अंत नहीं पासथें।
00:45अब आप विचार को हमारी कोपड़ी कितने की पार पा जाएगी तरक से उस परमात्मा को
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