00:00साड़ी मेर बानी ज़र हेक मुरब्बा रख बादे चलू ने
00:04हाथ खड़ा करो कोई है मुझा है ते तो बैठा
00:09ऐ उत्री मरी को
00:11ए मुसल्मान नू हेक मुरब्बा को नी प्या देंदा
00:15अंग्रे देडा हाते मतईदा पुतर दी
00:20गांधी नू आख्यासू ते नहीं से तू ले ले
00:25अख्यासू एक किसा तू ले ले
00:26मैं ते ले आओ
00:30सबाल बाद
00:40हवाला सुनो रन्ना दे बारे
00:42मुआशरत लांती
00:44मुआशरेच दीन ना हुए
00:47हाँ हाँ
00:49सबजनाल बो दरा सुनाला
00:52हाँ हाँ हाँ
00:53पर एक आल करके फिर सुनाला
00:58काईद आख्यादम तकारीर औ बयानाद
01:00जिल्द नमबर तेन
01:03सफ़ा नमबर दोसो सततर
01:06किताब किते होया है
01:07अलीगर मुसलिम युनिवरस्टी
01:09यु यु शूर सूर सूर अली
01:13मुसलिम लीग के जल्से में तक्रीर
01:15दस मार्च उन्नीस सो चुताड़ी
01:17यनि पाकिस्तान बना तो तेन साल
01:19पहलो की खिताब कर रहा है
01:23एक और नहायत
01:25अहम मौामला जो मैं आप के जहन नशीन कराना चाहता हूँ
01:28ये है कोई कौम अजमत की बलंदियों को उस वक्त तक नहीं छू सकती
01:33जब तक के उनकी खवातीन उनके साथ शाना बशाना नचरे
01:38हम बुरी रस्म और रिवाज के शिकार हैं
01:41ये इंसानियत के खिलाफे जुर्म है
01:44कि हमारी खवातीन घरों की चार दिवारी में कैदियों की तरह महभूस हो
02:02कार लिया ओए
02:03तो माने दे परोफेसर
02:08सारे यहूदी दे कनूनें ते यहूदी दे पोत्रें
02:16मेरे मुहम्मद मुस्तफादी उम्मत नो लवारे समझा थी ये न
02:19असा जे में गुली डंडा खेटी रखांगे तानू नपनाडा गोनियो न
02:31कल अंदर फरमाओना है फानो सबन के जिसकी ही फादत हावा करे
02:39वो शम्मा क्या गुझे जिसे राशन खुदा हो करे
02:48गाले करना ले जारे हैं अल्ला दे फदलना अला सा जंगले चूटे या बेलकुल जंगल बयाबान दरिया दे किनारे दे
03:05रहना ले पर मौला सोने दे महबूब ने हेक निगाह जो करम दी कीती है जागनू वक्त पाई खड़े हैं
03:14तर मदसाने सही एलम किसे होंदा है
03:22उन्दस वे इमान लाल जिड़ा सुआ राखे जो गढ़ाएं चार दिवारी जो आउर्टा नो रखा जर्में बुरी रस्म और रिवाद
03:32है
03:32उन्हें रसूल करीम नो बुराख्या कुरान नो बुराख्या को रसूल खुदानो बुराख्या क्यूंके पर्देते घार बांदा हुकम है कुरान इसके
03:41नहीं होएं
03:41सच्ची बोलो उचिए वादना
03:49सूरत आहदाम वकर्न फी बुयूत कुर्न वला तबर्वजन तबर्व जल जाहलियत अलूला
04:05मुस्लमाना दिया औरतां घार दे अंदर करार पकड़ो घार दिया चार दिवारियां जबगो
04:12और अपने जेब जीनत शिगार गैरां दे अगे पहले जाहलियत दिया औरतां वांगो जाहर नकरण
04:25कुरान दा मुनकर काओने कुरान जर्म समझना दा काओने
04:32शोन सकूली एह होई भावकदन जो पापा भावकदन
04:38आए अखबार है तो आड़ी हको गोबर्मेंट पाकिस्तान ने पापे दा एह होई बयान अखबार दिता है
04:47अई पापा खड़ा है
04:49अई पापी खड़ी
04:54तरले की लिखे है तरक्की आफ़ता मौशरे का खाब
04:57खवातीन की यक्षा तरक्की खुशाली के तनादर में
04:59वूमन हेल्थ प्रोजिक्ट पंजाब
05:03वूमन किनो अदेने
05:04हाँ हाँ
05:06अश्यादा
05:10अली गड़ दस मार्च
05:12उनीसो चालीस काईद आदम मौम्मद ली जनाफ
05:15तारी एक लिखने जगल्पी कर गए
05:17हुकुक निश्वा काईद आदम की नजर में
05:20यह उत तलिख है कर गए
05:21ओही बयान जरम है उस किताब ही तो सुनाया है
05:24अखबार चा रहे हैं तो कौम दिन असल नों बरबाद की सा जा रहे है
05:27कोई कौम उस वक्त तक
05:29उच्पापे दा बयान बढ़ तो
05:31अठो अठो अठो अठो
05:34अखबार
05:36हाँ
05:36खुता दा बंदा
05:49कोई कौम उस वक्त तक
05:52ताबनाक बलंदियों को नहीं पा सकती
05:55जब तक उसकी खौतिन को शाना विशाना आगे बढ़ने के मौके नहीं दी जाते
06:03ये इन्सानित के खिलाफ एक जुरम है
06:05अगर हम
06:11जिनना चेरा आमा दे पांच साथ यार नपनानो
06:14ओना चेरा के त्रक्की
06:17ये ये ये दा मतला बे साब तो बड़े त्रक्की आफ़ता दे चकले आले होए
06:26एक तो अनुहन गल समझाना
06:29समझाओ छोड़ा
06:33मक्खी मक्खी जाने के और गांद से बाहर ना लिए
06:39डाक्टर गुलाम जिलानी बर्क गुदरे है
06:41डाक्टर गुलाम जिलानी बर्क परोफेटर
06:44मुलहत जिन्दी एक सी बैमान सी वंटे
06:47उस किताब लिखिये मसाइले नौ
06:50इस दे शुरुए चैस बड़ी गल लिखी है
07:00अच्छा वो या जो मालक साथ है
07:11जिन्दी बाग दे अंदर भमरे बाग दे अंदर भमरे ते परिंदे ते ये बिचारे लगे फिर दे ना
07:18कि किदे बिचारे जिंदगी दे लुट्फ तो महरूम ने
07:30मैं उस दी जबानी सुरूम ने
07:36एक मरतबा एक मक्षी को खयाल आया कि बागों की मताफिन फिजा में तितलियां और भमरे खामखा खराब हो रहा
07:45है
07:46एक किताब लिखकर उन्हें बद रुमों और बैतल खलाओं में बुलाया जाया
07:52चुनाचे उसने कई सो सफ़ाद की एक किताब लिखी जिसमें मसायल जैल पर तफ्सीली बास दी
08:01क्या बागों में हर तरह हर तरह तरह ताफ़न बदबू फैली हुई है जो सिहत के लिए मुज़र है
08:11किते थे नमबर दो तसाब की दुकान का महोल बुचड़ खाना बुचड़ खाने जार जो जिए जानावर बुचड़ खाने का
08:24महोल अजबस हसीन हयात परवर और राहत अफ़्जा है
08:33नमबर तीन
08:34घलाजत में विटामिन्द की कसीर तादाद पाई जाती है
08:44तक्तित गांद देंदर बहुत विटामिन्द है
08:49तुसा महरूम
08:51नमबर चार
08:53बुच्चड खाना
08:57बादरुवा और गलादत खाना असल दुनिया है बाकी सब कुछ महद बेखा
09:03मक्षी ने इस किताब के लाखो नुस्खे बागों में मुफ्त तक्सीम किये
09:07उस किताब की खातर जा बजा लेबरेरियां कोली
09:11सफरी कुत्ब खानों का इंतिजाम किया चलते फिलते कुत्ब खाने हर तरफ मुबलग भेजे और पोस्टर चापे पहले तो भमरू
09:18और तितलियों ने उस किताब का मजाक उडाया
09:21लेकिन रफ्ता रफ्ता आफ्ता असर होने लगा कुछ नवजवान भमरे लिक खड़ दिये ने कमाल कर चड़ ए मेरे मुस्तफा
09:35ने इंदे तो लिखवाया कि लेखो एद बैमाना
09:52अच्छा अच्छा लेकिन हेस्ता असर होने लगा कुछ नौजवान भमरे शेहरों में आकर बदरूं का जायजाने लेने लगे
10:01बुच्छा खाने लेटरी इंत्यान के भमरे जो ख़र जायजा लेन भी गाल वाकी ठीक है के नहीं
10:10बदबू की लिपट से परेशान होकर भागते और फिर लोटाते
10:18रफ़ता रफ़ता चंद भमरों ने भी बदरूं की खूबियों और चमन की खराबियों पर तक्रीरे शुरू कर दे
10:26भमरे गए वापस उन्हां के अबरबाद हो पर बगा बागा ले हो
10:32तो सहां कदी ने प्रक्टी कर सकें तिशान रह गया हो
10:39और दस पंद्रा बरस में तमाम भवरे और चितलियां गंदी नालियों पर आकर गलाज़त चाक्टने लगी
10:51तामयाब हो गया ओ मक्षी बोड़ मक्षी पराबै के खुश
10:56कित्वों कड़े आते कित्वे लाया लाया
10:59और मकाम फिक्र उन्वान पाके ते डाक्टर बर्क लिख दै
11:04जरा सोचिए कि क्या वो किताबें जो गुज़श्टा सौ साल से आपको मदार्स में पढ़ाई जा रही है
11:10किसी ऐसी ही मक्षी की लिखी हुई तो नहीं
11:20आप जानते हैं कि सदियों से यूरप यूरप असीर हवा और हवस
11:27खाहिश नफस दकैबी रहीन ना और लोश शराब पीमन देंदर फस्याप यूर अखलाकी और रुहानी अकदार का कोई तस्वर तक
11:39मौजूद नहीं
11:40गरीब कौमों को लूटना दिन भर तन्नूर शिकम तापना और शाम को जिन्सी पस्तियों में डूब जाना सवेरे खाना होटलां
11:49ते शाम नो जिना वास्ते कलब बेच वार जाए उनकी जिन्दगी है बस यही खुदा और आखरास से बेखबर हराम
12:00और हलाल से नाशना और �
12:02पस्त लज़तों के दिल दादा यू समझिये के यूरप एक बद्रू है जिसमें वहां के लोग मक्यों की तरह गलादत
12:09चाट रहे हैं जब उनूने देखा कि गुनाहों की राहों पर अब वो इतने दूर जा चुके हैं कि उनका
12:17रजू अल्लह की तरफ नामुम्किन हो गया ह
12:19तो दूसरी तरफ उनका मद्द मुकाबल यानि मुसल्मान रुहानी कद्रों का शद्व मद्द से कायल है और ये नजरियाती अखिलाफ
12:27बार बार सियासी तसादम की सूरत एक्तियार कर लेता है पिर जंगे भी छिड़ पड़ती है तो उन्होंने एक नहीं
12:33बलकि एक लाग स
12:34ज्यादा किताबें उस मुद्व पर लिखी ही जिर में क्या लिखा कि जिन्दगी का अयाम मौत जिन्दगी का अंजाम मौत
12:43है और आगे कुछ भी नहीं ये उन्सकूल दियां किताब बांदा खुला साप्या दसना है जिन्दगी का अंजाम मौत है
12:52और आगे कुछ भी नहीं
12:54मरन तो बाद अलग खाता खाता
12:58मजभ एक दास्तान पारिना है
13:00जो असर रवा का साथ नहीं दे सकता
13:02नए दौर के साथ मजभ नहीं चल सकता
13:04लिहादा ये पुरानी बातें छोड़ दो
13:06ये भी सपूल की किताबों में दर जाए
13:08डाक्टर बर्क परोफेसर पर लिखना है
13:12नमबर तीन एशिया की अखलाकी और रोहानी कद्रों
13:16कम तरद याफियों नहीं
13:20एवे नशेज पायजे उठो
13:25खाना पीना नाचना और आश उड़ाना असल जिन्दगी है
13:29वो खोते आड़ा काना
13:32मख़ब और सियासत का बैरा कार जुदा जुदा है
13:35और सुनो वे
13:44अग्यकी
13:44वतन असास कव्मियत है और तस्वर मिलत यनि पार इसलाम में खताब
13:49एक सुर खत्रा है
13:51वतन नाल दीन बढ़ना है
13:53वतन जिमें लहोसी उमें लदीन
13:57अंग्यदी मुसल्मानों का सबसे बड़ा मसला खुराक का है
14:00वो खेती बारी में लगे रहें
14:01और खाम माल हमें भेजते रहें
14:03और लोहे की मस्मुआत उनकी खिदमते हम पेश करते रहें
14:06जो ए बीजन सानु घलंग
14:09असा लोहा देके ना लो
14:12तुसा लोहा चटो
14:27अंग्यदी खत नहायत तरकी आसा खत है
14:29और उसे इख्तियार करना और कुरानी खत से जान चुड़ाना तरकी के लिए लाज़ना रहें
14:34ये किताब डाक्टर पढ़के पर देखता है
14:38निपूलन, निल्सन, मल्टन, बैकन, न्यूटन वगएरा ये अंग्रेशन सारफ हूँ
14:43मोसनी ने इंसानियत थे और बाकी ये सीना, रूमी, फराबी वगएरा तारीक में भटकने वाले अंधे
14:50यानि बदरगान दीन, अंबिया ले मुस्लामे, तारीक में भटकने वाले अंधे हैं, असल इंसान हैं, मोसन इंसानियत हैं तो सैंसदान
14:58और अंग्रेश हैं
15:00यूरप के दरो दिवार, बाग, राग, वहूर, तुयूर, बेहद, हसीन हैं, और ये दजला, फुराद, सेहूं, जहूं, गंदे नाले
15:09कुको परिंदों का बादशा हैं, और ये बुल-बुल, चकोर, तितर, और मोर, सब के सब बेकार देहुदा है
15:21कौम सुन दी गई, पहलों से अड़े, किताब कबूल ना, किसी मुसल्मान ना, पुराने आ, फिर कुछ नव जवान गया
15:28हुना, आखिया चलो, बुशा, जैजा ते करिए, जैजा लेया, पहलों बदगू पई, ओ, जैजा का तामा हो, तौफ़ाद, पिशा हटे,
15:41फेर अग
15:41बिर पिशा, अखीर आज में तीजा निकले है, ओ, मक्षीजे में लाएगी बागी चो कड़ के, आज दला बे गैरत,
15:52गैरत मांदत होते हस्त, नंगीरान घारिच बैठीत होते हस्त दिये, मरें, घारिच बैबैके मारदे, नहीं मुस्ता की, तेरा से मारदी
16:06जाले में जड�
16:07देखे गारिच मारदे, वड़ियां फिर दिया और खोतियां का नहीं महीं है, मरें एह नहीं सोचे है, मक्षी तक्षी ते
16:19बाहनाली सानू नभी दे बागी चो पर इकट दियू लाएगी है, और बोल चा सुबहान था, पीर बाई फरमान दैं
16:31नालकु संगी, यारा संग,
16:37ना करिये
16:49ओनाल कु संगी
16:52यारा संग ना करिये
16:56अदे कुलनू लाजना लाए
17:07हूँ कावने बच्चे
17:13कभी हमस नहों वर्भावे बोतिया जोगी
17:19शुगाये
17:27हूँ तुम्मा कदी
17:34तरबूद नहों वर्भावे तोड़ मक्के ले जाए
17:47हूँ कारे खूँ
17:51एक दी मिठे ना पाहू
17:55भावे से मला गोड़ पाये
18:06उप्ड़ कि भावे वर्भावे जारा
18:21हूँ
18:23हूँ
18:24हूँ
18:25हूँ
18:29हूँ
18:31तो कुछ समझ आई यही कोई ना ले मैं किस्मिया प्याना जस्दाद ते कब्दा कुद्रत ते मेरी जाने क्या मतनु
18:41ए नहीं आख सकेंगा चिश्टी दी गाल समझने से जो भी
18:47प्याना जस्दाद ते मेरी बंदा उचा जो आख गाल तेरी दिल देता है खनेच पर बंदी और बंदी पर इने
19:01कोई ना तरह डट के बोलो सुभान ला गार्दे उन्सों ले खुला सा अंग्रेजा फैलों अंग्रेजी सुभान
19:14फिर अंग्रेजी तालीम तालीम देवेच ताहजीब ताहजीब नाड काफिर कीता है इसाई बनावना अग्ये पे है यह है चार चीजां
19:30आपसे इंज जुड़ियां खड़ियां गल समझ नहीं आई मेरी जे बचना चानना है कोफरतों पलीतीतों गांदतों तो मक्षी दी �
19:45किताब दे नेड़े ना जाए ओभमरे आतें गुलाब दा फुल चंगा इजड़ा मुहम्मद अर्भी वे गए गए ओभमरे आतें गुलाब
20:07दा फुल यह मेरे मदीने दे ताजदार दा कुरान
20:18मुहम्मद मुस्तफा के बाग के सब फूल आज़े है
20:33मुहम्मद मुस्तफा के बाग के सब फूल आज़े है
20:45जो बिन पानी भी तर रहते है मुर जाया नहीं करने
21:14इसलिए उलाद ना मदर से हैं दिखाल ना सकूला है
21:18दोवें पास से कुफर पे जिकान दे लिए अपने ठारच रख ले इस इल्म नाड़ों जहल चंगा
21:29अनपढ़न वाक जहल नाग
21:32जिड़ा लंगूर समझे नभीयानी इस लानत लैंड लड़ों अनपढ़ चंगे रहते हैं
21:41जानवर समझन वैशी समझन अपने वडेरियानी
21:45समानाल जिना करना लेन वजीम इंसान समझन
21:48इस नलो नाहीं पना आते हैंगा
21:53कुफर को बचा के धारच का भिठा जो क्यामत ताले दिन
21:58इल्म ना होया के जान छोट जानी इस और इमान ना होया के नहीं छोट जानी इस
22:06समझाईए
22:08से मुलाद दोजख नुटूरे हो साह
22:12तो से इमान अले अन पड़ जन्न नुटजान देया साह
22:19दाको कीमति शाय लुट गाए जदो घारेच वड़दा है, मन्जी बिस्तरे डाको ने चुक देऊंगे
22:25तो लब देने सोना की थेपे, पैसा की थेपे, कीमति शाय लुट देने
22:31मॉमें दी कीमति शाय दीन इमाने
22:39इदर सुनोओे, ये सतम दा मसला होगे दिवा, भी तरा तरा गंटे सक्री चलता है
22:45हाँ हरामे विद्दत शिर्फ के
22:49मैस सूर नो पुछना सूरा, ये अंग्रेजी कुफर दो ते सारे मुटफ़क जे
23:00इमान बेचने पे सब हैं तुले हुए, लेकिन खरीद हो जो अली गड़ के भाव से
23:08स्यद अक्बर हुसैन, पौला मार गया चंगा सुथरा
23:13अंग्रेज खरीदार होगे न, सकूल ही चुआ हूँ
23:16सकूल दी मंडी दे चान के अंग्रेज खरीदार बने ते इमान वेचना से बरेले वीवी अगे-अगे
23:22वा, वीवी अगे-अगे
23:29असल तेरा इमान सी जगल उटा बैचे
23:33एव मेरी किताब चौपफी दी उर्दूदी पंजाब टेक्स बोड आले आंदी होण त्वाटे घारज पई होणी है
23:40जड़े आंदेने चलो मिया अब पांज जमाता ते कार लगे न, कुडी मुंडा
23:47चलो हाथ ते थोड़ा जा सिध्धा हो जावे लगे, हाथ सिध्धा कर ते काफर मना के जान नमसा जावे
23:56बिचारी भूली काउम समझ दिये है के मिया बाल दा मासूम हों देना
24:00ना मुराद विच्वां दे सानो जड़ जलजले च मरेना
24:03ते सकूल सताई हदार, सकूल जल्बेघ घरक आए
24:06आकीशीआ बाल चोटे आँ�ず जानव जले काखे
24:10ये बाल चोटे हां दा की कoires सी
24:15ये सूर दे बच्चे आंदा कसूर ने
24:18जेड़े सूर दे बच्चे नभियानू जंगली जानवार ते ए बलंगूर थम जी खड़े होंगा
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