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کیا آپ برصغیر کی تاریخ کے اس اہم باب سے واقف ہیں؟ برٹش تعلیمی نظام (British Education System) نے مسلمانوں کی زندگیوں پر کیا اثرات مرتب کیے؟ کیا انگریز مسلمانوں کو تعلیم کے نام پر غلامی سکھانے آئے تھے؟ جانیے اس ویڈیو میں برٹش تعلیمی نظام کی اصل حقیقت!

(ویڈیو کے بارے میں تفصیل - About the Video):
اس ویڈیو میں ہم برصغیر پاک و ہند کی تاریخ کے اس نازک پہلو پر روشنی ڈالیں گے کہ کس طرح برطانوی حکومت (Angrez / British) نے مسلمانوں کو اپنے جدید تعلیمی نظام کے قریب لایا۔ ہم درج ذیل سوالات پر بحث کریں گے:

برٹش تعلیمی نظام کا اصل مقصد کیا تھا؟ کیا یہ مسلمانوں کی ترقی کے لیے تھا یا کسی اور پوشیدہ ایجنڈے کے تحت؟

مسلمانوں کا ردعمل کیا تھا؟ مسلمانوں نے اس نئے تعلیمی نظام کا خیر مقدم کیا یا اس کی مخالفت کی؟

تاریخی حقیقت یا حقیر؟ کیا یہ تعلیمی نظام مسلمانوں کے لیے ایک تحفہ تھا یا ایک زہرِ قاتل؟

سر سید احمد خان کا کردار: اس تحریک میں سر سید احمد خان (Sir Syed Ahmad Khan) اور علی گڑھ تحریک (Aligarh Movement) نے کیا کردار ادا کیا؟

یہ ویڈیو تاریخ کے طالب علموں، محققین اور ہر اس شخص کے لیے انتہائی اہم ہے جو مسلمانوں کی تاریخ اور برطانوی استعمار (British Colonialism) کے اثرات کو سمجھنا چاہتا ہے۔

(کال ٹو ایکشن - Call to Action):

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آپ کے خیال میں برٹش تعلیمی نظام مسلمانوں کے لیے کیسا تھا؟ ہمیں کمنٹ میں ضرور بتائیں!

(ہیش ٹیگز - Hashtags):
#BritishEducationSystem #HistoryOfMuslimsInIndia #SirSyedAhmadKhan #AligarhMovement #ColonialHistory #IslamicHistory #MuslimsInBritishIndia #EducationalReforms #Tareekh #UrduPodcast #PakistaniHistory #SubcontinentHistory Faizan e Chishtia ایک اسلامی و اصلاحی چینل ہے جہاں آپ کو ملیں گے:

📖 قرآن و حدیث کی روشنی میں بیانات
🕌 اہلِ سنت والجماعت کی تعلیمات
💖 روحانی و اصلاحی باتیں
🎤 درود و سلام اور نعت شریف
📚 اسلامی تاریخ اور اہم معلومات

ہمارا مقصد دینِ اسلام کی صحیح تعلیمات کو عام کرنا اور لوگوں کی اصلاح کرنا ہے۔
اگر آپ بھی دین سیکھنا اور سکھانا چاہتے ہیں تو ہمارے چینل کو سبسکرائب کریں اور شیئر کریں۔
خواجہ محمد شفیع چشتی صاحب خواجہ محبوب فریدصاحب مفتی محمد فضل احمد چشتی صاحب مفتی سعداللّہ چشتی صاحب
🤲 اللہ تعالیٰ ہم سب کو دین کی صحیح سمجھ عطا فرمائے۔ آمین

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Transcript
00:00साड़ी मेर बानी ज़र हेक मुरब्बा रख बादे चलू ने
00:04हाथ खड़ा करो कोई है मुझा है ते तो बैठा
00:09ऐ उत्री मरी को
00:11ए मुसल्मान नू हेक मुरब्बा को नी प्या देंदा
00:15अंग्रे देडा हाते मतईदा पुतर दी
00:20गांधी नू आख्यासू ते नहीं से तू ले ले
00:25अख्यासू एक किसा तू ले ले
00:26मैं ते ले आओ
00:30सबाल बाद
00:40हवाला सुनो रन्ना दे बारे
00:42मुआशरत लांती
00:44मुआशरेच दीन ना हुए
00:47हाँ हाँ
00:49सबजनाल बो दरा सुनाला
00:52हाँ हाँ हाँ
00:53पर एक आल करके फिर सुनाला
00:58काईद आख्यादम तकारीर औ बयानाद
01:00जिल्द नमबर तेन
01:03सफ़ा नमबर दोसो सततर
01:06किताब किते होया है
01:07अलीगर मुसलिम युनिवरस्टी
01:09यु यु शूर सूर सूर अली
01:13मुसलिम लीग के जल्से में तक्रीर
01:15दस मार्च उन्नीस सो चुताड़ी
01:17यनि पाकिस्तान बना तो तेन साल
01:19पहलो की खिताब कर रहा है
01:23एक और नहायत
01:25अहम मौामला जो मैं आप के जहन नशीन कराना चाहता हूँ
01:28ये है कोई कौम अजमत की बलंदियों को उस वक्त तक नहीं छू सकती
01:33जब तक के उनकी खवातीन उनके साथ शाना बशाना नचरे
01:38हम बुरी रस्म और रिवाज के शिकार हैं
01:41ये इंसानियत के खिलाफे जुर्म है
01:44कि हमारी खवातीन घरों की चार दिवारी में कैदियों की तरह महभूस हो
02:02कार लिया ओए
02:03तो माने दे परोफेसर
02:08सारे यहूदी दे कनूनें ते यहूदी दे पोत्रें
02:16मेरे मुहम्मद मुस्तफादी उम्मत नो लवारे समझा थी ये न
02:19असा जे में गुली डंडा खेटी रखांगे तानू नपनाडा गोनियो न
02:31कल अंदर फरमाओना है फानो सबन के जिसकी ही फादत हावा करे
02:39वो शम्मा क्या गुझे जिसे राशन खुदा हो करे
02:48गाले करना ले जारे हैं अल्ला दे फदलना अला सा जंगले चूटे या बेलकुल जंगल बयाबान दरिया दे किनारे दे
03:05रहना ले पर मौला सोने दे महबूब ने हेक निगाह जो करम दी कीती है जागनू वक्त पाई खड़े हैं
03:14तर मदसाने सही एलम किसे होंदा है
03:22उन्दस वे इमान लाल जिड़ा सुआ राखे जो गढ़ाएं चार दिवारी जो आउर्टा नो रखा जर्में बुरी रस्म और रिवाद
03:32है
03:32उन्हें रसूल करीम नो बुराख्या कुरान नो बुराख्या को रसूल खुदानो बुराख्या क्यूंके पर्देते घार बांदा हुकम है कुरान इसके
03:41नहीं होएं
03:41सच्ची बोलो उचिए वादना
03:49सूरत आहदाम वकर्न फी बुयूत कुर्न वला तबर्वजन तबर्व जल जाहलियत अलूला
04:05मुस्लमाना दिया औरतां घार दे अंदर करार पकड़ो घार दिया चार दिवारियां जबगो
04:12और अपने जेब जीनत शिगार गैरां दे अगे पहले जाहलियत दिया औरतां वांगो जाहर नकरण
04:25कुरान दा मुनकर काओने कुरान जर्म समझना दा काओने
04:32शोन सकूली एह होई भावकदन जो पापा भावकदन
04:38आए अखबार है तो आड़ी हको गोबर्मेंट पाकिस्तान ने पापे दा एह होई बयान अखबार दिता है
04:47अई पापा खड़ा है
04:49अई पापी खड़ी
04:54तरले की लिखे है तरक्की आफ़ता मौशरे का खाब
04:57खवातीन की यक्षा तरक्की खुशाली के तनादर में
04:59वूमन हेल्थ प्रोजिक्ट पंजाब
05:03वूमन किनो अदेने
05:04हाँ हाँ
05:06अश्यादा
05:10अली गड़ दस मार्च
05:12उनीसो चालीस काईद आदम मौम्मद ली जनाफ
05:15तारी एक लिखने जगल्पी कर गए
05:17हुकुक निश्वा काईद आदम की नजर में
05:20यह उत तलिख है कर गए
05:21ओही बयान जरम है उस किताब ही तो सुनाया है
05:24अखबार चा रहे हैं तो कौम दिन असल नों बरबाद की सा जा रहे है
05:27कोई कौम उस वक्त तक
05:29उच्पापे दा बयान बढ़ तो
05:31अठो अठो अठो अठो
05:34अखबार
05:36हाँ
05:36खुता दा बंदा
05:49कोई कौम उस वक्त तक
05:52ताबनाक बलंदियों को नहीं पा सकती
05:55जब तक उसकी खौतिन को शाना विशाना आगे बढ़ने के मौके नहीं दी जाते
06:03ये इन्सानित के खिलाफ एक जुरम है
06:05अगर हम
06:11जिनना चेरा आमा दे पांच साथ यार नपनानो
06:14ओना चेरा के त्रक्की
06:17ये ये ये दा मतला बे साब तो बड़े त्रक्की आफ़ता दे चकले आले होए
06:26एक तो अनुहन गल समझाना
06:29समझाओ छोड़ा
06:33मक्खी मक्खी जाने के और गांद से बाहर ना लिए
06:39डाक्टर गुलाम जिलानी बर्क गुदरे है
06:41डाक्टर गुलाम जिलानी बर्क परोफेटर
06:44मुलहत जिन्दी एक सी बैमान सी वंटे
06:47उस किताब लिखिये मसाइले नौ
06:50इस दे शुरुए चैस बड़ी गल लिखी है
07:00अच्छा वो या जो मालक साथ है
07:11जिन्दी बाग दे अंदर भमरे बाग दे अंदर भमरे ते परिंदे ते ये बिचारे लगे फिर दे ना
07:18कि किदे बिचारे जिंदगी दे लुट्फ तो महरूम ने
07:30मैं उस दी जबानी सुरूम ने
07:36एक मरतबा एक मक्षी को खयाल आया कि बागों की मताफिन फिजा में तितलियां और भमरे खामखा खराब हो रहा
07:45है
07:46एक किताब लिखकर उन्हें बद रुमों और बैतल खलाओं में बुलाया जाया
07:52चुनाचे उसने कई सो सफ़ाद की एक किताब लिखी जिसमें मसायल जैल पर तफ्सीली बास दी
08:01क्या बागों में हर तरह हर तरह तरह ताफ़न बदबू फैली हुई है जो सिहत के लिए मुज़र है
08:11किते थे नमबर दो तसाब की दुकान का महोल बुचड़ खाना बुचड़ खाने जार जो जिए जानावर बुचड़ खाने का
08:24महोल अजबस हसीन हयात परवर और राहत अफ़्जा है
08:33नमबर तीन
08:34घलाजत में विटामिन्द की कसीर तादाद पाई जाती है
08:44तक्तित गांद देंदर बहुत विटामिन्द है
08:49तुसा महरूम
08:51नमबर चार
08:53बुच्चड खाना
08:57बादरुवा और गलादत खाना असल दुनिया है बाकी सब कुछ महद बेखा
09:03मक्षी ने इस किताब के लाखो नुस्खे बागों में मुफ्त तक्सीम किये
09:07उस किताब की खातर जा बजा लेबरेरियां कोली
09:11सफरी कुत्ब खानों का इंतिजाम किया चलते फिलते कुत्ब खाने हर तरफ मुबलग भेजे और पोस्टर चापे पहले तो भमरू
09:18और तितलियों ने उस किताब का मजाक उडाया
09:21लेकिन रफ्ता रफ्ता आफ्ता असर होने लगा कुछ नवजवान भमरे लिक खड़ दिये ने कमाल कर चड़ ए मेरे मुस्तफा
09:35ने इंदे तो लिखवाया कि लेखो एद बैमाना
09:52अच्छा अच्छा लेकिन हेस्ता असर होने लगा कुछ नौजवान भमरे शेहरों में आकर बदरूं का जायजाने लेने लगे
10:01बुच्छा खाने लेटरी इंत्यान के भमरे जो ख़र जायजा लेन भी गाल वाकी ठीक है के नहीं
10:10बदबू की लिपट से परेशान होकर भागते और फिर लोटाते
10:18रफ़ता रफ़ता चंद भमरों ने भी बदरूं की खूबियों और चमन की खराबियों पर तक्रीरे शुरू कर दे
10:26भमरे गए वापस उन्हां के अबरबाद हो पर बगा बागा ले हो
10:32तो सहां कदी ने प्रक्टी कर सकें तिशान रह गया हो
10:39और दस पंद्रा बरस में तमाम भवरे और चितलियां गंदी नालियों पर आकर गलाज़त चाक्टने लगी
10:51तामयाब हो गया ओ मक्षी बोड़ मक्षी पराबै के खुश
10:56कित्वों कड़े आते कित्वे लाया लाया
10:59और मकाम फिक्र उन्वान पाके ते डाक्टर बर्क लिख दै
11:04जरा सोचिए कि क्या वो किताबें जो गुज़श्टा सौ साल से आपको मदार्स में पढ़ाई जा रही है
11:10किसी ऐसी ही मक्षी की लिखी हुई तो नहीं
11:20आप जानते हैं कि सदियों से यूरप यूरप असीर हवा और हवस
11:27खाहिश नफस दकैबी रहीन ना और लोश शराब पीमन देंदर फस्याप यूर अखलाकी और रुहानी अकदार का कोई तस्वर तक
11:39मौजूद नहीं
11:40गरीब कौमों को लूटना दिन भर तन्नूर शिकम तापना और शाम को जिन्सी पस्तियों में डूब जाना सवेरे खाना होटलां
11:49ते शाम नो जिना वास्ते कलब बेच वार जाए उनकी जिन्दगी है बस यही खुदा और आखरास से बेखबर हराम
12:00और हलाल से नाशना और �
12:02पस्त लज़तों के दिल दादा यू समझिये के यूरप एक बद्रू है जिसमें वहां के लोग मक्यों की तरह गलादत
12:09चाट रहे हैं जब उनूने देखा कि गुनाहों की राहों पर अब वो इतने दूर जा चुके हैं कि उनका
12:17रजू अल्लह की तरफ नामुम्किन हो गया ह
12:19तो दूसरी तरफ उनका मद्द मुकाबल यानि मुसल्मान रुहानी कद्रों का शद्व मद्द से कायल है और ये नजरियाती अखिलाफ
12:27बार बार सियासी तसादम की सूरत एक्तियार कर लेता है पिर जंगे भी छिड़ पड़ती है तो उन्होंने एक नहीं
12:33बलकि एक लाग स
12:34ज्यादा किताबें उस मुद्व पर लिखी ही जिर में क्या लिखा कि जिन्दगी का अयाम मौत जिन्दगी का अंजाम मौत
12:43है और आगे कुछ भी नहीं ये उन्सकूल दियां किताब बांदा खुला साप्या दसना है जिन्दगी का अंजाम मौत है
12:52और आगे कुछ भी नहीं
12:54मरन तो बाद अलग खाता खाता
12:58मजभ एक दास्तान पारिना है
13:00जो असर रवा का साथ नहीं दे सकता
13:02नए दौर के साथ मजभ नहीं चल सकता
13:04लिहादा ये पुरानी बातें छोड़ दो
13:06ये भी सपूल की किताबों में दर जाए
13:08डाक्टर बर्क परोफेसर पर लिखना है
13:12नमबर तीन एशिया की अखलाकी और रोहानी कद्रों
13:16कम तरद याफियों नहीं
13:20एवे नशेज पायजे उठो
13:25खाना पीना नाचना और आश उड़ाना असल जिन्दगी है
13:29वो खोते आड़ा काना
13:32मख़ब और सियासत का बैरा कार जुदा जुदा है
13:35और सुनो वे
13:44अग्यकी
13:44वतन असास कव्मियत है और तस्वर मिलत यनि पार इसलाम में खताब
13:49एक सुर खत्रा है
13:51वतन नाल दीन बढ़ना है
13:53वतन जिमें लहोसी उमें लदीन
13:57अंग्यदी मुसल्मानों का सबसे बड़ा मसला खुराक का है
14:00वो खेती बारी में लगे रहें
14:01और खाम माल हमें भेजते रहें
14:03और लोहे की मस्मुआत उनकी खिदमते हम पेश करते रहें
14:06जो ए बीजन सानु घलंग
14:09असा लोहा देके ना लो
14:12तुसा लोहा चटो
14:27अंग्यदी खत नहायत तरकी आसा खत है
14:29और उसे इख्तियार करना और कुरानी खत से जान चुड़ाना तरकी के लिए लाज़ना रहें
14:34ये किताब डाक्टर पढ़के पर देखता है
14:38निपूलन, निल्सन, मल्टन, बैकन, न्यूटन वगएरा ये अंग्रेशन सारफ हूँ
14:43मोसनी ने इंसानियत थे और बाकी ये सीना, रूमी, फराबी वगएरा तारीक में भटकने वाले अंधे
14:50यानि बदरगान दीन, अंबिया ले मुस्लामे, तारीक में भटकने वाले अंधे हैं, असल इंसान हैं, मोसन इंसानियत हैं तो सैंसदान
14:58और अंग्रेश हैं
15:00यूरप के दरो दिवार, बाग, राग, वहूर, तुयूर, बेहद, हसीन हैं, और ये दजला, फुराद, सेहूं, जहूं, गंदे नाले
15:09कुको परिंदों का बादशा हैं, और ये बुल-बुल, चकोर, तितर, और मोर, सब के सब बेकार देहुदा है
15:21कौम सुन दी गई, पहलों से अड़े, किताब कबूल ना, किसी मुसल्मान ना, पुराने आ, फिर कुछ नव जवान गया
15:28हुना, आखिया चलो, बुशा, जैजा ते करिए, जैजा लेया, पहलों बदगू पई, ओ, जैजा का तामा हो, तौफ़ाद, पिशा हटे,
15:41फेर अग
15:41बिर पिशा, अखीर आज में तीजा निकले है, ओ, मक्षीजे में लाएगी बागी चो कड़ के, आज दला बे गैरत,
15:52गैरत मांदत होते हस्त, नंगीरान घारिच बैठीत होते हस्त दिये, मरें, घारिच बैबैके मारदे, नहीं मुस्ता की, तेरा से मारदी
16:06जाले में जड�
16:07देखे गारिच मारदे, वड़ियां फिर दिया और खोतियां का नहीं महीं है, मरें एह नहीं सोचे है, मक्षी तक्षी ते
16:19बाहनाली सानू नभी दे बागी चो पर इकट दियू लाएगी है, और बोल चा सुबहान था, पीर बाई फरमान दैं
16:31नालकु संगी, यारा संग,
16:37ना करिये
16:49ओनाल कु संगी
16:52यारा संग ना करिये
16:56अदे कुलनू लाजना लाए
17:07हूँ कावने बच्चे
17:13कभी हमस नहों वर्भावे बोतिया जोगी
17:19शुगाये
17:27हूँ तुम्मा कदी
17:34तरबूद नहों वर्भावे तोड़ मक्के ले जाए
17:47हूँ कारे खूँ
17:51एक दी मिठे ना पाहू
17:55भावे से मला गोड़ पाये
18:06उप्ड़ कि भावे वर्भावे जारा
18:21हूँ
18:23हूँ
18:24हूँ
18:25हूँ
18:29हूँ
18:31तो कुछ समझ आई यही कोई ना ले मैं किस्मिया प्याना जस्दाद ते कब्दा कुद्रत ते मेरी जाने क्या मतनु
18:41ए नहीं आख सकेंगा चिश्टी दी गाल समझने से जो भी
18:47प्याना जस्दाद ते मेरी बंदा उचा जो आख गाल तेरी दिल देता है खनेच पर बंदी और बंदी पर इने
19:01कोई ना तरह डट के बोलो सुभान ला गार्दे उन्सों ले खुला सा अंग्रेजा फैलों अंग्रेजी सुभान
19:14फिर अंग्रेजी तालीम तालीम देवेच ताहजीब ताहजीब नाड काफिर कीता है इसाई बनावना अग्ये पे है यह है चार चीजां
19:30आपसे इंज जुड़ियां खड़ियां गल समझ नहीं आई मेरी जे बचना चानना है कोफरतों पलीतीतों गांदतों तो मक्षी दी �
19:45किताब दे नेड़े ना जाए ओभमरे आतें गुलाब दा फुल चंगा इजड़ा मुहम्मद अर्भी वे गए गए ओभमरे आतें गुलाब
20:07दा फुल यह मेरे मदीने दे ताजदार दा कुरान
20:18मुहम्मद मुस्तफा के बाग के सब फूल आज़े है
20:33मुहम्मद मुस्तफा के बाग के सब फूल आज़े है
20:45जो बिन पानी भी तर रहते है मुर जाया नहीं करने
21:14इसलिए उलाद ना मदर से हैं दिखाल ना सकूला है
21:18दोवें पास से कुफर पे जिकान दे लिए अपने ठारच रख ले इस इल्म नाड़ों जहल चंगा
21:29अनपढ़न वाक जहल नाग
21:32जिड़ा लंगूर समझे नभीयानी इस लानत लैंड लड़ों अनपढ़ चंगे रहते हैं
21:41जानवर समझन वैशी समझन अपने वडेरियानी
21:45समानाल जिना करना लेन वजीम इंसान समझन
21:48इस नलो नाहीं पना आते हैंगा
21:53कुफर को बचा के धारच का भिठा जो क्यामत ताले दिन
21:58इल्म ना होया के जान छोट जानी इस और इमान ना होया के नहीं छोट जानी इस
22:06समझाईए
22:08से मुलाद दोजख नुटूरे हो साह
22:12तो से इमान अले अन पड़ जन्न नुटजान देया साह
22:19दाको कीमति शाय लुट गाए जदो घारेच वड़दा है, मन्जी बिस्तरे डाको ने चुक देऊंगे
22:25तो लब देने सोना की थेपे, पैसा की थेपे, कीमति शाय लुट देने
22:31मॉमें दी कीमति शाय दीन इमाने
22:39इदर सुनोओे, ये सतम दा मसला होगे दिवा, भी तरा तरा गंटे सक्री चलता है
22:45हाँ हरामे विद्दत शिर्फ के
22:49मैस सूर नो पुछना सूरा, ये अंग्रेजी कुफर दो ते सारे मुटफ़क जे
23:00इमान बेचने पे सब हैं तुले हुए, लेकिन खरीद हो जो अली गड़ के भाव से
23:08स्यद अक्बर हुसैन, पौला मार गया चंगा सुथरा
23:13अंग्रेज खरीदार होगे न, सकूल ही चुआ हूँ
23:16सकूल दी मंडी दे चान के अंग्रेज खरीदार बने ते इमान वेचना से बरेले वीवी अगे-अगे
23:22वा, वीवी अगे-अगे
23:29असल तेरा इमान सी जगल उटा बैचे
23:33एव मेरी किताब चौपफी दी उर्दूदी पंजाब टेक्स बोड आले आंदी होण त्वाटे घारज पई होणी है
23:40जड़े आंदेने चलो मिया अब पांज जमाता ते कार लगे न, कुडी मुंडा
23:47चलो हाथ ते थोड़ा जा सिध्धा हो जावे लगे, हाथ सिध्धा कर ते काफर मना के जान नमसा जावे
23:56बिचारी भूली काउम समझ दिये है के मिया बाल दा मासूम हों देना
24:00ना मुराद विच्वां दे सानो जड़ जलजले च मरेना
24:03ते सकूल सताई हदार, सकूल जल्बेघ घरक आए
24:06आकीशीआ बाल चोटे आँ�ず जानव जले काखे
24:10ये बाल चोटे हां दा की कoires सी
24:15ये सूर दे बच्चे आंदा कसूर ने
24:18जेड़े सूर दे बच्चे नभियानू जंगली जानवार ते ए बलंगूर थम जी खड़े होंगा
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