00:04नमस्कार, मैं श्वेता तिवारी आप सभी का अभिननन करती हूँ, आईए आज आपको सुनाती हूँ राजस्थान पत्रिका के प्रधान जंपादक,
00:13विद्या वाचसपती गुलाब कोठारी जी का परिवार में प्रकाशित आलेग, जिसका शीरशक है, पूर्व नियोजित ह
00:20माया का खेल, जो समझ में नहीं आये, वही माया है, कैसी साधारन सी बात करती है, रोज सुनते आये
00:28हैं, किन्तु यह समझ में नहीं आता कि माया ही इस विश्वक को चला रही है, जिसमें जड़ जेतन वर्ग
00:35जुडा हुआ है, माया ने चारों युगों को एक ही सुत्र में �
01:03ुद्वापर महाभारत में
01:09श्रिष्टी का पिता सूर्य और माता चंद्रमा है
01:12दोनों ही निमित कारण है
01:14जीवात्मा सूर्य से चंद्रमा की गर्भ में आता है
01:17वहाँ से प्रित्वी पर उशदियों का रूप खारण करता है
01:20आदि इस थूल जगत का कारण बनता है
01:23माया द्वारा विश्व का भ्रमन करके लोट जाता है
01:26महर्शी पाराशर अहर निश्ध्यान में रहते थे
01:30नौका विहार को निकले
01:32एक नौका में पाम रखातो केवट कन्या की देह से उठती ही
01:36मच्य गंध ने उनका ध्यान भंग किया
01:39और वे एक पर देखते रह गए
01:42मच्वारे को पता होता है कि कहां पानी गहरा है
01:45जहां मच्लियां अधिक हैं
01:47वहीं जाल में रहता है
01:50पाराशर ने विभूती योग से मच्य कन्या को आक्रिष्ट किया
01:54किन्तु वे इस्त्री की प्रतिक्रिया को नहीं पड़ से
01:57काम के आवरण में मुख्ध भी थे
01:59और भीतर का ब्रह्म अपने विवर्थ को आर्थू था
02:02नाव चल रही थी
02:03पाराशर कह रहे थे कि मैंने अब तक दो ही इस्त्रीयों को
02:06सुन्दर्ता में सर्विष्ट देखा है
02:08कौन सी कन्या ने पूछा
02:10एक माता प्रकृति और दूसरी तुम
02:13सत्यवति विसमे से
02:15पूछने लगी कि मैं मा के समकक्ष कैसे
02:19जननी प्रकृति रूप होती है
02:20प्रकृति से सुन्दर और क्या हो सकता है
02:23नाव एक द्वीपर जाकर रुख गी
02:26सत्यवति के पिता
02:27कह रहे थे कि सन्यासि से
02:40It was thought that the father came to the mind, he asked him.
02:45The father said that now we are going to have our own dharma.
02:50And the father left us to the Rishi's house.
02:54Here, the Rishi's vision had seen that the Rishi's vision had seen
02:57that the Rishi's vision of the Rishi's vision.
03:00And the Veda Vyasa will die.
03:03The Veda Vyasa was the need for that.
03:06The size of the Rishi
03:08The time was given the new demands in vezings of Rishi's vision.
03:10And after Rishi's vision with front einh then,
03:16he visited the Virgin Buddha's vision Watches.
03:24The soul was based on the path and the path of the success and the power of the soul gained
03:28and the power of the soul and the heart of the soul came up.
03:33It remained a moaning of authority.
03:39The soul remained calm in the face.
03:41The soul was physically restless and conscious of the soul who were giving us the soul.
03:47He did not remain.
03:50Mayah's creed was not gone.
03:52Satyavati had her daughter Veda Vyasa called to save her life.
03:57In her face, her mind was revealed to her.
04:02She said that, when she was a mother,
04:05she wanted to be able to get her husband,
04:08she wanted to be able to get her husband,
04:08she wanted to be able to get her husband.
04:13पती ही निकर्तम मित्र भी होता है और घोर्तम शत्रू ही
04:18प्यास ने वंश वृद्धी का संकर्तो टाल दिया किन्तु उत्तरा धिकार का संघर शुरू हो गया
04:24एक ही काल में एक वंश समाप्त हुआ, दूसरा पैदा किया वह भी विनाश को प्राप्त हुआ
04:30इस पीच नावी कन्या राजमाता होकर वंश विनाश करती हुई, दोनों बहुंगों के साथ वन को ब्रस्थान कर गई
04:38उन्होंने सिध्ध कर दिया कि मात्र जन्म लेना समाधान नहीं होता
04:42संसकार, नेणय कर्म भी महत्वपोन होते हैं, महाभारत के बीज बहुत पहले बोई जाज चुके थे
04:49हमें लगता है कि महाभारत के मूल में द्रौपदी थी, रामायन के मूल में सीता थी
04:54ये इस थूल निमित्य मात्र थे, माया की योजना, नियती, सब स्रिष्टी, पूर्वी, तैह हो जाती है
05:00कांधारी और सत्यवती, दोनों को मालूम था कि परनीती क्या होगी
05:05क्या मंदोदरिया रावन को नहीं मालूम पड़ा कि राम कौन है
05:09जब राम ने शिव धनुष तोड़ा, तो क्या रावन ने राम के दर्शन नहीं किये
05:14रामेश्वर की पूजा करवाई पूरोही थोकर, तब रावन ने ही विजैई भव का आशिरवार भी दिया था किसको
05:20माया ही नियति के अनरूप बुद्धी को भी वदल देती है, विनाश काले विपरीत बुद्धी
05:26कहावत जग प्रसित है, या देवी सर्व भूतेशु, बुद्धी रूपेण संस्थिता, नमस तस्याई, नमस तस्याई, नमस तस्याई, नमो नमा
05:36क्या राम स्वर्ण ब्रिग का अर्थ नहीं जानते थे, लक्षमन राम की आवाज से परिचित नहीं थे, क्या कई केई
05:44को माज नहीं मालूम था कि राम दन्म का क्या रहस्य है, क्या गौतम रिशी ने एहलिया को नहीं बताई
05:50थी राम अवतार की भविश्यवानी, क्या महा �
05:53भारत युद्ध माया का चलावा नहीं दिखाई दिया.
05:57जैदरत का बद कैसे हुआ?
05:59द्रोनाचार्य को माया के परदे के बिना मार पाना क्या संभव था?
06:04गटोत कच को मारने के बहाने कर्ण को ब्रह्मास्र से रिक्त कर दिया था.
06:09कर्ण का पहिया अर्दुन के सामने ही कीचर में क्यूं धसा
06:13अभिमन्यू की मृत्यू के दिन क्रिश्ण को क्यूं कर युद्ध भूमी से बहुत दूर ले जाना पड़ा
06:19राम रावन युद्ध हनुमान का सुर्षा के मुख से निकलना जैसी कितनी ही घटनाय माया का प्रभाव जिखाती है
06:26राम हो या कृष्ण युद्ध तो माया के सहयोग से ही जीता गया इस्पष्ट प्रतीत होता है
06:32and I have been Nee so much,
06:38and I am definitely having
06:38my no-g phase in my soul,
06:38my heart and consciences
06:40until my body.
06:45Meharệ Systemession grew OFF
06:46my life and infant were wanted to teach me
06:46My L?
06:48Frau溯 i have left here,
06:52np.
06:56unlikely
06:56Essential ص正
06:56just
06:57वन को चली गई, दूसरी और युजिष्टिर हिमाले को, कृष्ण द्वार का चले गए, परिक्षित भी कथा सुनते द्वापर का
07:04पटाक्षेव करके विदा हो गए.
07:06हर व्यक्ति का जीवन भी एक अनुरूप महाभारत ही है, सभी देव असुर, शरीर के भीतर ही कारे करते हैं,
07:14संपून जीवन माया द्वारा पूर्व नियोजित होता है, वैसे तो सभी प्राणी इश्वर इच्छा से ही कारे करते हैं, किन्तु
07:22मानव ही एक मात्र ऐसा प्राण
07:35नित नया विश्व बनता जाता है, ब्रम्ह में करता भाव नहीं है, पूरुष शरीर में भी आधा भाग इस्त्रैन होता
07:44है, जो ब्रम्ह के जीवन की दिशात तय करता है, सत्यवति पाराशर के साथ रहती और पिता की सलह के
07:51अनुसार राजमाता न बनती, तब क्या महाभार
08:18प्रकृति के लिए तो यह चुनावती ही थी, वहां तो मनुष्य की हार ही है, नमस्कार
08:25झाल
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