00:00एक पंड़त के तीन बेटे होते हैं जो बहुत नाफरमान और हर टाइम जैदाद का तकाजागते हैं
00:07पंड़त इसका एक हाल नकालता है वो एक वसीयत लखवाता है और वसीयत पे लिखता है कि मेरी तमाव जैदाद
00:13अनाद आशरम के नाम कर दो
00:16और मेरी अर्थी की जो राख है उसे गंगा जमना में नहीं बहाना बलके मेरे बेटों की पूरे गाउं के
00:25सामने इनकी नासों में डाल दो
00:27इनकी यही सजा है पूरा गाउन है पकड़ता है और उनकी नासों में वो उसकी अर्थियों की राख डाल देते
00:34है और पूरा गाउन इस मनजर को देखता है और उसकी तकमेल की जाती है
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