00:00अचारी जी, मैं एक रड़की से बहुत प्रेम करता हूँ, मगर उसे मैं पसंद नहीं, मैं दिन बर उसके बारे
00:07में सोचता रहता हूँ और उसे भुला नहीं पा रहा हूँ, मैं क्या करूँ?
00:11किसी से जबरदस्ती प्यार कराया जा सकता है
00:15जिसको है तो है जिसको नहीं है
00:17उसके सामने आप उधारन रख सकते हो
00:20उसके सामने आप अपना प्रेम रख सकते हो
00:23लेकिन उसके बाद भी अगर उसके भीतर प्रेम उठी नहीं रहा
00:27तो आप जबरदस्ती थोड़ी करोगे
00:29Can you force somebody to love
00:32कोई तुमको कितना भी समझा ले
00:34साफ साफ
00:36सच्चाई दिखा ले
00:39पर नियत
00:40फैसला इमानदारी
00:42इनका कोई विकल्ब नहीं होता
00:45तुम्हारी नियत क्या है
00:46तो तुम जानो इसमें कोई और क्या कर सकता है
00:49तुम कहोगे कि फलानी चीज है उस जंदगी में अभी भी मौजूद है
00:52तो उसका उत्तरी होगा
00:54तुम्हारी मर्जी
00:56क्यों मौजूद है
00:58तुम्हारी मर्जी
00:59और कोई कारण नहीं है तुम्हारी मर्जी ही कारण है
01:02तो मर्जी कैसे बदले
01:04तुम्हारी मर्जी है कोई और कैसे बदल सकता है
01:06तुम बतलोगे
01:07ने अगर हम नहीं बदल रहे तो फिर अपनी मर्जी पर आगे बढ़ो
01:12अपनी मर्जी पर आगे बढ़ो
01:14और फिर बस यही प्राक्थना की जा सकती है
01:17कि आगे बढ़ने के जो दुश परिणाम होंगे शायद वो तुम्हें कुछ सिखा जाए डूबे रहो इधार उधार की चीजों
01:25में वासना होगी कुछ हो लालच हो डर हो जो भी है उसमें डूबे रहो जिस दिन तुम जलोगे उस
01:31दिन डर और वासना भी जल जाएंगे कहानी
01:33कभी न कभी तो खत्म हो नहीं है या तो खुद अभी खत्म कर लो नहीं तो चिता पर खत्म
01:37हो जाएगी भरजी तो कुछ नहीं हो सकते है तुम वासना पत्थ पर आगे बढ़ो पत्रिक
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