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ये वीडियो 29.01.2026 को लखनऊ में हुए संत सरिता सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00नमस्त अचारे जी मेरा नाम स्मृति है मैं कक्षा 5 पर पढ़ती हूँ अचारे जी मेरा प्रश्न था कि जब
00:07मैं कोई नई चीज करने जाती हूँ तो मुझे एकसाइटमेंट से जाधा डर लगता है तो अचारे जी इस डर
00:17को अपने लाइफ से कैसे अटा है
00:19इमत हटाओ रहने दोसको डर को क्यों हटाना है दोशी डर थोड़ी है दोशी तुम हो जो डर के आगे
00:25रुख जाओ डर है तो है हम नहीं रुखते है डर का काम है होना हमारा काम है काम करना
00:30डर है तो है तो क्या करना है डर तुमसे पूछ के नहीं आया था न तो तुमने तो को
00:38कोई जबरदस्ती आ गया तो आ गया, तुम क्या करोगे, डर है, बिना बुलाए ऐसे ही घुसाया, डर लग रहा
00:44है, कभी डर लगता है, कभी कुछ और थकान भी लगती है, यह तो हमसे पूछ के तो नहीं होते,
00:49अपने आप हो रहे हैं, जो अपने आप हो रहा है, उस पे हमार
01:06अपने डर हो, ठकान हो, कुछ भी हो, और यह आएं तो इनको कारण मत बनने दो, इनको बहाना मत
01:14बनने दो, कि हाँ, काम तो जरूरी था, पर मुझे इतना डर लगा में रुख गई, अरे डर था तो
01:19था, डर के साथ करो, नहीं समझ में आ रहा तो, ना समझी के साथ करो, बा
01:36झाल, झाल, झाल, झाल, झाल
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