00:04इसलाम में जुम्मे का दिन सबसे अफजल माना जाता है।
00:30ऐसे भी मुसलिम महलाओ के मन में अकसर ही सवाल आता है क्या ओरतों के लिए जुम्मे की नमाज पढ़ना
00:35जरूरी है और पढ़ना है तो कैसे पढ़े हैं।
00:49सबसे पहले समझ ले कि इसलाम में जुम्मे की नमाज मर्दों पर फर्ज है लेकि और तो पर फर्ज नहीं
00:56है यानि कि अगर कोई महिला जुम्मे की नमाज नहीं पढ़ती है और उसकी जगह घर पर जुहर की नमाज
01:02पढ़ लेती है तो उसकी नमाज पूरी तरह सही माने जाती
01:06लेकिन अगर कोई महिला चाहे तो वो जुमे की नमाज पढ़ सकती है
01:10खासकर अगर वो मज़िद जाकर जमात के साथ नमाज अदा करना चाहती है
01:15तो इसलाम इसकी इजाज़त देता है
01:17अब सवाल आता है कि औरते जुमे की नमाज कैसे पढ़ें
01:21अगर कोई महिला मज़िद जाकर जुम्मे की नमाज पढ़ रही है तो उससे इसलाम के पीछे जमात के साथ दो
01:28रकात जुम्मा की नमाज अदा करनी होती है
01:31जुम्मे की नमाज से पहले खुदबा यानि तक्रीर दी जाती है जिसे ध्यान से सुनना जरूरी माना जाता है
01:38लेकिन अगर महिला घर पर है और मज़िद नहीं जा रही है तो उसे जुमे की नमाज नहीं बलकि जुहर
01:45की नमाज पढ़नी चाहिए
01:46जुहर की नमाज चार रकात फर्ज होती है जिसे वो समाने तरीके से अदा कर सकती है
01:53एक और एहम बात ये है कि नमाज पढ़ते समय पाबंदी, सादगी और पर्दे का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी
02:00है
02:00साफ कपड़े पहन कर बुजू करके और पूरी तवज्जों के साथ नमाज पढ़नी चाहिए
02:06इसलाम में औरतों को इबादत करने से कभी नहीं रोका गया
02:10बलकि उन्हें भी उतना ही सबाब मिलता है जितना मर्दों को
02:14बस फर्क इतना है कि जुम्मे की नमाज औरतों पर फर्ज नहीं रखी गई ताकि उन्हें सहूलियत मिल सके
02:21उमीद करते हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:24फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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