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Truth Without Apology
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यह वीडियो 09.11.2025 को कोलकाता में लाइव सत्र के बाद पुस्तक हस्ताक्षर कार्यक्रम से लिया गया है।
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Transcript
00:00Sir, मेरे एक सवाल था, Sir, कि आसपास अगर कोई नेगेटिव इनसान है, Sir, बहुत गुष्सावाला, मैंस टॉक्सिक, तो कैसे
00:07उनके साथ डील करूँ और मैं कैसे उनकी हल्प करूँ, मतलब बिना गिव अप किये, Sir?
00:13पहले अपने को बचाओ, कोई इतना ऐसा इंसान है, तो पहले इस सवाल का जवाब दिना चाहिए, कि आप उसके
00:19साथ क्यों हो?
00:20Sir, मैं गिव अप नहीं करना चाहते हूँ.
00:24अगर आप उनके पास इसलिए हो, क्योंकि किसी भी मनुष्य के लिए कुछ अच्छा करना चाहिए, तो एक बात है,
00:31पर कोई और बंधन है, इसकी ओज़े से आप एक टाइम पर बस डिसिजन लिया था, तो उसको और मैं
00:37गिव अप नहीं करना चाहती, मैं उसके भी मदद कर
00:44किरुना से आनी चाहिए, वो जो आपका संबंधगत बंधन है, उससे नहीं आनी चाहिए, दो बहुत अलग अलग तरीक है,
00:51एक यह है कि इससे मेरी पुरानी दोस्ती है, मैं इसलिए इसकी मदद कर रहा हूं, क्योंकि अपना दोस्त है
00:57तो कैसा शोड़ जें, और एक यह है क
00:59किमरा इसको जानता हूं, हां, इससे मेरा पुराना प्रिचरा है, और जैसे किसी भी इनसान के लिए कुछ करा जाता
01:04है, वैसे इसके लिए कर दूंगा, अब यह नहीं है, कि मेरा भाई है, कि मेरा तॉज है, मेरा देवर
01:11है, कि मaison, मैं इसलिए इसकी मदद कर रहा हूं, वो �
01:18पर इंसानियत के नाते जो मदद की जाती है, उसका स्वाद अलग होता है।
01:22मैं तब अपना कोई नुकसान ना करते हूं।
01:25पर फिर आपने शुरुआ थिये बोलके गरी कि ये टॉक्सिसिटी है और ये सब नुकसान तो अपना हो रहा है।
01:30तो वो देख लीजेगा।
01:33कई बार जब हम दावा करते हैं कि हम किसी की मदद कर रहे हैं, वो मदद नहीं कर रहे
01:37होते हैं।
01:38वो मजबूरी निभा रहे होते हैं।
01:40मजबूरी निभाने को मदद नहीं कहते हैं।
01:42वास्तविक मदद तो निस्वार्थ प्रेम में होती है।
01:47वो तब होती है कि मैं चाहूं तो मदद नभी करूँ पर मुझे लग रहा है कि अपनी वनुश्यकत करुणा
01:54की बात है इसकी मदद करनी चाहिए वो इलग बात है और एक ही होती है कि अब तो फस
01:57गए हैं तो अब तो करने ही पड़ेगा तो इन दोनों में आप भेद करियेगा
02:01कर दो तो
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