00:00तबाही हो तुम्हारे लिए! क्या तुमने हमें उसी लिए जमा किया था?
00:04ये वाक्या मामूली नहीं था.
00:06ये वो लम्हा था जब हक और बातिल खुलकर आमने सामने आ गए.
00:10इसी दिन से मुखालफते शुरू हुई.
00:13अजियतें बढ़ी.
00:13जब रसूल अकरम ने हक की दावत को अलानिया पेश करना शुरू किया.
00:19तो कुफार मक्का के दिलों में शदीद इस्तराब और खौफ पैदा हो गया.
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