00:26रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है।
00:30अवधी लगभग 3 गंटे 27 मिनट की होगी और इसी दिन रमजान का 13 रोजा भी है।
00:35यानि ग्रण का ज्यादतर हिस्सा असर से मगरिब के बीच रहेगा।
00:39तो सवाल ये है कि क्या गर्बती मुस्लिम महिला को चंद ग्रण के दौरान खास परहिस करना चाहिए।
00:44कई लोग कहते हैं कुछ मत काटो, बाहर मत जाओ, सोना मत वरना बच्चे पर असर पड़ेगा।
00:49लेकिन क्या ये बातें इसलाम में साबित हैं।
00:51आईए कुरान हदीस और उलेमा की रोशनी में पूरी तफसील से समझते हैं।
00:55कुरान में अल्लह ताला फरमाते हैं सूरज और चांद उसकी निशानियों में से हैं।
01:00और सूरह अल-क्यामा में फरमाया गया है और जब चांद बेनूर हो जाएगा यानि चांद का बेनूर होना यानि
01:06गरन लगना ये एक खुदरती निशानी हैं।
01:08अल्लह की तागत का सबूत है।
01:10पुरान में कहीं ये भी नहीं लिखा कि गर्बती महिला को गरन से डरना चाहिए या कोई खास नियम अपनाना
01:15चाहिए।
01:15अधिस की रोशनी में सबसे साफ बयान हमें मिलता है सही अल-बुखारी और सही मुस्लिम में।
01:20रसूल अल्लह ने फरमाया सूरज और चांद किसी की मौत या जिन्दगी की वज़ा से गरन में नहीं आते।
01:25ये अल्लह की निशानिया हैं। जब तुम गरन देखो तो नमास पड़ो और दौा करो।
01:29इस हदीश से तीन एहम बाते साफ होती हैं।
01:31गरन किसी इनसान की वज़़ से नहीं होता। ये कोई अश्षुप संखेत नहीं है। इस वकत इबादत करना चाहिए।
01:36लेकिं कहीं भी ये नहीं कहा गया कि गर्बती औरत को कोई खास पवंदी है।
01:40क्या गर्वती महिला के लिए अलग हुक्म है।
01:42इसलाम में गर्वती महिला के लिए कुछ खास रियायते हैं जैसे रोजा ना रख पाने की छूट
01:47लेकिन चंदर ग्रण के बारे में सिलाई करना मना नहीं, सबजी काटना मना नहीं, खाना पकाना मना नहीं, बाहर जाना
01:53मना नहीं, सोना मना नहीं, इन बातों का कुरान या हदीस में कोई सबूत नहीं मिलता।
01:58ज्यादतर इसलामी उलेमा का कहना है ग्रण के वक्त सलातल खुसूफ यानि चंदर ग्रण की नमास पढ़ना सुननत है। ज्याद
02:04से ज्यादा तौबा और इस्तखवार करना चाहिए। दूआ और जिक्र में वक्त बिताना चाहिए। लेकिन गर्वती महिला पर कोई अतिरिक्
02:12चंद विश्वास यानि शिर्क या बेबुनियाद डर को पसंद नहीं किया जाता। बहुत से समाजों में ये माना जाता है।
02:18बच्चा होट कटा पैदा होगा, बच्चे परदा होगा, गर्व में बच्चा प्रभावित होगा। लेकिन इन बातों की कोई शरई बुनिया�
02:25सांस्कृतिक मानेता हैं, इसलामी शिक्षाएं नहीं। चंदर ग्रण के समय क्या करना बहतर है वो भी समझ लीजे। अगर ग्रण
02:31लगे तो वुजू करें, दो रकत नफल नमास पढ़ें, तिलावत करें, दुरूद शरीफ पढ़ें, अपने और होने वाले बच्चे की
02:37से
02:38अगर तबिया ठीक नहीं है, तो आराम करें, क्योंकि इसलाम आसानी का मजहब है। याद रखें, चंदर ग्रण अल्ला की
02:44कुदरत की निशानी है, ये कोई अप्शकुन या डर की चीज़ नहीं, गर्बती महिला के लिए कोई खास शरी पावंदी
02:50नहीं, सबसे बहतर काम, �
02:51नमाज, दुआ और अल्ला पर भरोसा है। अगर आपको ये जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें
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