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3 March Chandra Grahan 2026: आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेंगे जो अक्सर घरों में चर्चा का विषय बनता है —
“क्या गर्भवती मुस्लिम महिला को चंद्र ग्रहण के दौरान खास परहेज़ करना चाहिए?”

कई लोग कहते हैं:

कुछ मत काटो


बाहर मत जाओ


सोना मत


वरना बच्चे पर असर पड़ेगा


लेकिन क्या ये बातें इस्लाम में साबित हैं?
आइए, कुरआन, हदीस और उलेमा की रोशनी में पूरी तफसील से समझते हैं।




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~HT.504~PR.115~ED.464~

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00:26रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है।
00:30अवधी लगभग 3 गंटे 27 मिनट की होगी और इसी दिन रमजान का 13 रोजा भी है।
00:35यानि ग्रण का ज्यादतर हिस्सा असर से मगरिब के बीच रहेगा।
00:39तो सवाल ये है कि क्या गर्बती मुस्लिम महिला को चंद ग्रण के दौरान खास परहिस करना चाहिए।
00:44कई लोग कहते हैं कुछ मत काटो, बाहर मत जाओ, सोना मत वरना बच्चे पर असर पड़ेगा।
00:49लेकिन क्या ये बातें इसलाम में साबित हैं।
00:51आईए कुरान हदीस और उलेमा की रोशनी में पूरी तफसील से समझते हैं।
00:55कुरान में अल्लह ताला फरमाते हैं सूरज और चांद उसकी निशानियों में से हैं।
01:00और सूरह अल-क्यामा में फरमाया गया है और जब चांद बेनूर हो जाएगा यानि चांद का बेनूर होना यानि
01:06गरन लगना ये एक खुदरती निशानी हैं।
01:08अल्लह की तागत का सबूत है।
01:10पुरान में कहीं ये भी नहीं लिखा कि गर्बती महिला को गरन से डरना चाहिए या कोई खास नियम अपनाना
01:15चाहिए।
01:15अधिस की रोशनी में सबसे साफ बयान हमें मिलता है सही अल-बुखारी और सही मुस्लिम में।
01:20रसूल अल्लह ने फरमाया सूरज और चांद किसी की मौत या जिन्दगी की वज़ा से गरन में नहीं आते।
01:25ये अल्लह की निशानिया हैं। जब तुम गरन देखो तो नमास पड़ो और दौा करो।
01:29इस हदीश से तीन एहम बाते साफ होती हैं।
01:31गरन किसी इनसान की वज़़ से नहीं होता। ये कोई अश्षुप संखेत नहीं है। इस वकत इबादत करना चाहिए।
01:36लेकिं कहीं भी ये नहीं कहा गया कि गर्बती औरत को कोई खास पवंदी है।
01:40क्या गर्वती महिला के लिए अलग हुक्म है।
01:42इसलाम में गर्वती महिला के लिए कुछ खास रियायते हैं जैसे रोजा ना रख पाने की छूट
01:47लेकिन चंदर ग्रण के बारे में सिलाई करना मना नहीं, सबजी काटना मना नहीं, खाना पकाना मना नहीं, बाहर जाना
01:53मना नहीं, सोना मना नहीं, इन बातों का कुरान या हदीस में कोई सबूत नहीं मिलता।
01:58ज्यादतर इसलामी उलेमा का कहना है ग्रण के वक्त सलातल खुसूफ यानि चंदर ग्रण की नमास पढ़ना सुननत है। ज्याद
02:04से ज्यादा तौबा और इस्तखवार करना चाहिए। दूआ और जिक्र में वक्त बिताना चाहिए। लेकिन गर्वती महिला पर कोई अतिरिक्
02:12चंद विश्वास यानि शिर्क या बेबुनियाद डर को पसंद नहीं किया जाता। बहुत से समाजों में ये माना जाता है।
02:18बच्चा होट कटा पैदा होगा, बच्चे परदा होगा, गर्व में बच्चा प्रभावित होगा। लेकिन इन बातों की कोई शरई बुनिया�
02:25सांस्कृतिक मानेता हैं, इसलामी शिक्षाएं नहीं। चंदर ग्रण के समय क्या करना बहतर है वो भी समझ लीजे। अगर ग्रण
02:31लगे तो वुजू करें, दो रकत नफल नमास पढ़ें, तिलावत करें, दुरूद शरीफ पढ़ें, अपने और होने वाले बच्चे की
02:37से
02:38अगर तबिया ठीक नहीं है, तो आराम करें, क्योंकि इसलाम आसानी का मजहब है। याद रखें, चंदर ग्रण अल्ला की
02:44कुदरत की निशानी है, ये कोई अप्शकुन या डर की चीज़ नहीं, गर्बती महिला के लिए कोई खास शरी पावंदी
02:50नहीं, सबसे बहतर काम, �
02:51नमाज, दुआ और अल्ला पर भरोसा है। अगर आपको ये जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें
02:55और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूलें।
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