00:03होलिका दहन की जलती होई लौकों हिंदु धर्म में बेहत शुब और संकेतों से भरा माना जाता है ये सिर्फ
00:10आग की लप्टे नहीं होती बलकि माननेता है कि ये आने वाले समय के संकेत भी देती हैं
00:17होलिका दहन का पर्व प्रहलात की भक्ती और होलिका की दहन की कथा से जड़ा है जो बुराई पर अच्छाई
00:23की जीत का प्रतीक है इसलिए इसकी अगनी को विशेश आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है धार्मिक मानिताओं के नुसार यदि
00:31होलिका दहन की लौ सीधी और उ�
00:46की दिखाई दे तो इसे अच्छी वर्षा और कृषी के लिए अनुकूल समय का संकेत माना जाता है उत्तर दिशा
00:53की ओर झुकती लौ को सम्रिधी और धन प्रती से जोड़ा जाता है वही यदि लौ डक्षण दिश्वा की ओर
01:00अधेक जुकती है तो इसे साबधाने का संकेत
01:02माना जाता है कुछ मानेदाओं में इसे प्रकृतिक आपदाओं या बेमारियों की आश्वंका से जोड़ा गया है
01:08हाला कि ये पूरी धरह आस्था पर आधारत व्याख्या है
01:12पश्यम दिश्वा की ओर जुकती लौ को समान्य फल देने वाला माना गया है
01:16इसके लावा अगर आग जल्दी शांत हो जाए तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता
01:21जबकि देर तक प्रज्वलित रहने वाली होलिका को शुब बाना गया है
01:25कई लोग अगनी की परिक्रिमा करते समय अपने मनो कामनाई मन ही मन कहती है
01:30और मानते हैं कि इस पवित्र अगनी में नकरात्मक उर्चा जलकर नश्ट हो जाए
01:34हालकि ये सभी संकेत धार्मेक आस्था और परमपराओं पर आधारित है
01:38विज्यानिक दृष्टी से आग के दिशा हवा की गती और वातावरण पर निर्भर करती है
01:44फिर भी भारते संस्कृतियों में होलका देहन की लौको सकरात्मक उर्चा, नए शुरुवात और बुराईयों के अंत का प्रतीक माना
01:52गया है
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