00:03होली का तेवहार रंगो और पारंपरिक रिती रिवाजों से भरा होता है जैसे जैसे होली का देहन की राद करीब
00:09आती है गरों में उत्सव और तैयारियों की रोनक बढ़ जाती है इनहीं तैयारियों के बीच कई राजियों और खास
00:15तोर पर उत्तर भारत के कुछ इलाकों मे
00:17होली के एक दिन पहले बुकवा लगाने की परंपरा निभाई जाती है
00:21बुकवा दरसल एक खास तरह का उप्टन होता है
00:25जिसे बेसन हल्दी सरसो का तेल मिला कर बनाया जाता है
00:29ये परंपरा सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है
00:32बलकि इसके पीछे तोचा की देखभाल और स्वास्त से जुड़ी कई कारण भी छिपे हैं
00:37ऐसे में चली आपको बताते हैं होली के एक दिन पहले याने की होली का देहन के दिन उप्टन क्यों
00:42लगाये जाता है और इससे क्या होता है
00:44होली के एक दिन पहले शरीर पर बुकवा लगाना शारीरिक और अध्यात्मिक शुद्धी का प्रतीक है
00:51मानिता है कि इससे शरीर की नकरात्मक उर्जा और बिमारिया होली का की अगनी के साथ जल कर नस्ट हो
00:58जाती है
00:58ये परंपरा सरसो के तेल, हल्दी और अन्य लेब से तोचा को डिटॉक्स करने और संक्रमन से बचाने का भी
01:06काम करती है
01:06उटन लगाने से तोचा के रोमचिद्र खुलते हैं और शरीर की अशुद्या पाहर निकलती है
01:11होली में इस्तमाल होने वाले रंग कई बार केमिकल वाले होते हैं
01:15वो को लगाने से तोचा पर एक प्राकर्तिक परत बन जाती है जिससे रंगों का असर कम होता है
01:21वहीं से लगाने के लिए आप दो बड़े चम्मच बेसन, दो से तीन चुटकी हल्दी, दो बड़े चम्मच दही या
01:28कच्चा दूद
01:29और सरसो के देल की कुछ बूंदे मिला कर पेस्ट पना ले
01:31फिर इसे अपने शरीर पे लगाया और इसे हटाने के बाद होलिका की अगनी में इसे डाल दे
01:37उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
01:39फिलाल अमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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