00:00बड़े बड़े गुरु हो गए रिभू गीता का नाम लेने किसी की हिम्मत नहीं हुई
00:03एक मात रापवाद रमण महर्शी है
00:06रिभू गीता की बड़ी प्रसंसा करते थे
00:08वो एक बड़ी बिचितर बात कहते थे जो कि अंधुश्वास जैसी लगेगी
00:12अगसे रात रिभूज के बाद वो बैठा करते थे
00:14अपने कुछ बहुत चुने हुए शिश्यों के साथ
00:18और चर्रया ऐसी रहती थी कि बारी बारी से सब एक एक शलोग पढ़ेंगे
00:22पर वो सब पढ़ा करें
00:24और उसमें कोई अगर रुक करके बोले कि हमें समझ में नहीं आया
00:28बताईए तो लोन भरश कहें नहीं
00:31रुकने की दरूरत नहीं समझाने की दरूरत नहीं
00:34अगर तुमने ध्यान में मौन में पढ़ा है
00:37तो जो होना था हो गया
00:39मुझसे मत काओ कि मैं तुम्हें समझाओं
00:41ये समय मेरा तुम्हारा साथ और रिभुगीता का पाठ ये पर्याप्त है
00:47तो इसमें समझने समझाने की कोई ज़रूरत नहीं है
00:50तुम बैठे हो ना मेरे पास और एक शलोक पढ़ रहे हो ना
00:53जो होना था हो गया
00:56तुम्हें नहीं भी पूरी तरह सपश्ट हो रहा तो भी कोई बात नहीं
00:59जो होना था वो हो गया
01:01उतना पर्याप्त है कमी तुम्हारे ज्यान में नहीं है
01:05कमी तुम्हारे डूबने में है
01:07ज्यान और बढ़ाने की चेश्टा मत करो
01:11अपने आप को स्वतंत्र छोड़ो डूबने के लिए वो ज्यादा जरूरी है
01:15intellectual लोग वे बात ही नहीं समझ में आएगी हो कहेंगे है
01:18अरे अभी तो intellectual clarity नहीं आई तो कैसे समझ में आएगा
01:24पिटा तुम से ना हो पाएगा
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