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Transcript
00:00वेलंटाइन स्पीक होता है को अगरा ऐक टैडी दे दिया चॉकलेट दे तो चॉकलेट दे दी वेलंटाइन से पे पाईनले
00:09उसको प्रभोस किया जाता है तो इन सारे डेस का महतो आखिर है क्या दो
00:14इसका बाजारवाद से बहुत सीधा ताल्लक है, इसका आदमी के भीतर और ज्यादा घने हुए भोगवाद से बहुत ताल्लक है
00:40तो इतना हग लेने और हग देने के बाद
00:45जो दुरगंध उठती है, उसकी भी तो बात होनी चाहिए ना, वो चौदा तारीक के बाद है, तो चौदा तारीक
00:54के बाद के दिनों के कोई नाम क्यों नहीं रखेगा, कभी सोचा ही नहीं तुमने, चौदा तारीक के बाद भी
01:01तो पूरा हफता चलता है ना, उसमें भी तो �
01:04दिनों के नाम होने चाहिए ना चमाक दे भाग ले गाली दे ब्रेक अप डे ये सब भी है ये
01:22सब तो देखो बाजारवाद है और कुछ नहीं कि दिन को हफ्ता बना दो बस चले तो हफ्ते को महीना
01:33बना दो
01:34और जो चाहते हैं कि तुम इस तरह की चीजें ही खरीदते फिरो वो तो ये चाहेंगे कि तुम साल
01:42के 365 दिन किसी नशे में रहो और उस नशे में तुम अपना पैसा, अपना ध्यान, अपनी उर्जा, अपनी जवानी
01:51बहाए जाओ जिस पर दावा हो कि उससे प्यार है उसको आ
02:04या उसको अनुमति देदी कि वो तुमको भोग डाले उसको आखें दे दो ये प्रेम है आफान नहीं होगा उसको
02:12आख देने के लिए तुम्हें जान देनी पड़ सकती है ये देना
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