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00:00आप ये वेशभूशा क्यों आपने चूस की कि मैं वो ट्रेडिशनल आचारे नहीं रहूंगा, I'll be like a modern one
00:09and जिससे मैं ज्यादा कनेक्ट कर पाऊं।
00:12जिनको सिखा रहा हूं वो आजके हैं, उनके सामने भी मैं इसी लिए बैठ पा रहा हूं क्योंकि उनके सामने
00:18का हूं आजका हूं।
00:19जब सारा काम आज का है, सारी चुनौतिया आज की हैं,
00:22इनसान आज का है, शिक्षक आज का है, चात्र आज का है,
00:25तो कपड़े हजार साल पहले के क्यों हों?
00:34हम सैटिस्वाई क्यों नहीं हो पते हैं?
00:36एक बात, सब मानते हैं साजे तोर पर, हम सब अधूरे हैं.
00:41पूरी मानवता, 800 करोड लोग यही माने बैठे हैं, कि हम अधूरे हैं, जिसे चैन चाहिए होगा ना, वो
00:52अक्सर हम जो मिडल क्लास लोग होते हैं, वो सोचते हैं, आई आई आई टी चले गए, मतलब जीवन
00:58आई आई एम चले गए, तो आई एस बन गए, तो साथ पीडियां तर गई, आपने सब कुछ किया, देन,
01:05वो क्या पॉइंट था, विन यू थौट की नहीं आ, यह नहीं, मेरी दिशा तो कुछ और ही,
01:12मेरा क्वेशन ये है, कि हम सब परिशान क्यों हैं, हम ऐसे क्यों हैं, मरजी, मरजी, मजा आता होगा, कोई
01:22दुखी क्यों है, मेरी मरजी, आप जिस भी चीज से परिशान हैं, उसके बने रहने में क्या, उकल मिलागर के
01:34जवाब क्या है,
01:44It is my honor to welcome Acharya Prashantji, a distinguished spiritual teacher, philosopher and author, who has touched millions of
01:54lives with his deep insights into Advaita Vedanta and timeless wisdom.
01:59A prolific author of over 160 books, Acharya Prashant's work bridges ancient philosophy with the existential and ethical questions of
02:09modern life, bringing clarity and relevance to teachings that have shaped human thought for millennia.
02:17His global digital presence, including one of the most followed spiritual channels online, has made profound teachings accessible to seekers
02:27around the world.
02:28Please join me in welcoming Acharya Prashantji.
02:38To lead this conversation, we have with us Mr. Amit Bhatia, a senior journalist with over 18 years of experience
02:45across sports, politics and entertainment journalism.
02:50Please welcome him. I would request the audience to please welcome Amit Bhatia ji.
02:58Guys, एक बार फिर से जोर्दार तालियों के साथ स्वागत और मतला भी अलग एनरजी, I think, आप में से
03:09कितने लोग आचारे जी को लाइफ पहली बार देख रहे हैं.
03:13तो मैं जाता हूँ कि हम सब जब यहां से जाएं, कुछ न कुछ लेके जाएं और जीवन भर उसे
03:19याद रखें.
03:19एक जिम्मेदारी आप सब की, अचारे जी अक्सर जब हम किसी के साथ बैठते हैं, किसी हस्ती के साथ, तो
03:26हम इंट्रोडक्शन देते हैं, बट आपके बारे में इतना कुछ है, कि इंट्रोडक्शन मैं नहीं लिख पाया.
03:32अब लास्ट में इस सेशन के, आप सबसे मैं चाहूंगा, कि कुछ न कुछ आप कहें, एक वर्ड, एक लाइन,
03:40कुछ शब्द, और वही, I think, इंट्रोडक्शन हो सकता है, क्योंकि जो हम सीख के जाएंगे.
04:13बहुत-बहुत स्वागत आपका.
04:15तक पहुँचते भी हैं. तो आप ये वेश्बूशा क्यों आपने चूस की, कि मैं वो ट्रेडिशनल आचार्य नहीं रहूंगा, I'll
04:23be like a modern one, जिससे मैं ज़्यादा connect कर पाऊंगा.
04:30अचार्य माने तो बस टीचर होता है, सिखाने वाला, जिनको सिखा रहा हूं, वो आज के हैं. उनके सामने भी
04:39मैं इसलिए बैठ पा रहा हूं, क्योंकि उनके सामने का हूं, आज का हूं.
04:44हमारी भाषा भी आज की है, यह माई इक भी आज का है. तो ताज्यूप की बात तो यह है
04:51कि कोई पुराने कपड़े पहनने का ख्याल भी कर लेता है. जब सब कुछ आज का है, हमारी समस्याएं जिनको
05:00हम सुलजाना चाहते हैं, वो भी आज की हैं, जिन्दगी हम आज जी र
05:13तो मैं कपड़े एक हजार साल पहले के क्यों पहनू लेकिन चुकि ये एक परंपरास ही चली आ रही है
05:21बहुत-बहुत पीछे जी ने की तो इसलिए हमें लगता है कि
05:29सहाब आपने आम लोगों जैसे आज के वरतमान के कपड़े विषभूशा क्यों पहन रखे है नहीं तो यही सवाल आप
05:39एक डॉक्टर से या इंजिनियर से नहीं पूछते हैं यही सवाल आप एक युणिवरसिटी के प्रॉफेसर से भी नहीं पूछते
05:45हैं क्योंकि हूँआ �
05:46बात लगती है, आज का इनसान
05:48है, आज की चुनोतियों
05:50से जूजरा है, climate change
05:52आज की चुनोति है,
05:54पशुवों पर जो क्रूरता हम
05:56कर रहे हैं, वो आज की चुनोति है,
05:58प्रजातियों का विलुप्त होना, वो
06:00आज की चुनोति है,
06:02ये जो सब वैश्विक युद्ध है और तमाम तरह एक विभाजन है और जातेवाद है ये सब आज की चुनोती
06:08है
06:08जब सारा काम आज का है सारी चुनोतियां आज की है इनसान आज का है शिक्षक आज का है छातर
06:14आज का है तो कपड़े हजार साल पहले के क्यों हो
06:20एक कहीं आपके किसी इंटर्व्यू में आपके किसी पॉड़कास्ट में मैंने ये सुना आपने बोला मैं उद्दंड हूँ और हर
06:30किसी को कहीं न कहीं उद्दंड होना चाहिए मतलब सवाल पूछना चाहिए तो ये उद्दंडता जो है ये कहीं न
06:37कहीं आप आज जो इतने ल
06:40लोडों लोग आपको सुनते हैं, even live sessions
06:42जो होते हैं, एक एक लाख लोगों का live session होता है
06:45तो आप लोग भी जो
06:46अपना सवाल ना पूछ पाएं, वो live sessions
06:48के जरीए भी आज रात को भी होगा, तो
06:50अपने सवाल जो है आप पूछ सकते हैं, तो
06:52उदंडता ने आपको कितनी
06:54मदद की और कितना उदंड इंसान
06:56को होना चाहिए, नहीं
06:58देखिए,
07:00जिंदगी में जो कुछ भी
07:02उँचा है, सुन्दर है, अच्छा है,
07:05प्यारा है,
07:07अगर
07:08आपको उसका साथ देना है,
07:12उसके
07:12सामने सर जुकाना है, उसके
07:14साथ वफा, निष्ठा, निभानी है,
07:18तो जो कुछ बेकार का है,
07:22जूट है,
07:23परेब है,
07:25नकली है, कृत्रम है,
07:28उसका
07:28विरोध करना तो सीखना पड़ेगा ना,
07:32तो जो
07:32भ्रामक है,
07:35जो
07:35भै से अपना काम चलाना चाहता है,
07:40उसका
07:41विरोध करना जरूरी है,
07:42अगर हम इमानदारी से ये कहना चाहते हैं,
07:45कि हम आदमी सच्चे हैं,
07:47नहीं तो ये बड़ी विचित्र बात हो जाएगी,
07:49कि एक और तो कह रहे हो,
07:50कि सच्चाई अच्छी चीज होती है,
07:54और इतने
07:55उचे-उचे सद्गुण होते हैं,
07:57मैं उन सब से प्यार करता हूँ,
07:59उचाईयों से वफा निभाता हूँ,
08:01और दूसरी ओर जा करके,
08:03जहां जूट, फरेव, शोशन, अत्याचार,
08:06ये सब चल रहा है,
08:08वहां भी विनम्र और शालीन बने हुए हो,
08:10तो विनम्रता शालीनता,
08:13वहीं शोभा देती है,
08:15जहां उसका सही स्थान है,
08:18बाकी जगहों पर,
08:19सर और आवास,
08:21दोनों को उठाना आना चाहिए,
08:23जो आदमी सौ गलत जगह,
08:25सर जुका करके आ गया है,
08:27वो उसके बाद,
08:28जा करके,
08:30आदर्शों के सामने सर जुकाए,
08:32मंदिर में सर जुकाए,
08:34ये शोभा नहीं देता,
08:36कोई आदमी कहे कि मैं आ रहा हूं सत्य को समर्पित होने,
08:40और जूट के आगे वो सौ बार पहले ही बिका हुआ है,
08:44तो सत्य को क्या समर्पित हो जाएगा,
08:46तो समर्पन और विद्रोह हमेशा साथ साथ चलेंगे,
08:52जो विद्रोही नहीं हो सकता,
08:54वो समर्पित नहीं हो सकता,
08:56और जो उद्दंड नहीं हो सकता,
08:58वो विनम्र भी नहीं हो सकता,
08:59तो जूटी विनम्रता में हम फसकर न रह जाएए,
09:03इसलिए मैंने कभी कहा होगा
09:04कि उद्धंड़ता जरूरी है
09:06जब और खुल जाता हूं
09:07तो मैं कहा करता हूं सबसे कि
09:09बत्तमीजी सीखो
09:14मैं मेरे ओफिस के नीचे
09:16कही बार वो छोटा मोटा मेला नहीं लग जाता
09:19तो वहां पे एक
09:22कोट दिखा मुझे
09:23जो मैंने खरीद लिया
09:25उसको छोटा सा और मैंने अपने
09:27डेस्क पे पिन कर दिया
09:29उसमें लिखा था
09:30कर्मा वोंट डू एवरीधिंग
09:32हम कहते हैं ना कर्मा
09:33कर्मा पे बात करेंगे आचारे जी सामने है तो
09:35कर्मा वोंट डू एवरीधिंग
09:37learn to insult people sometimes
09:41नहीं
09:41तो मैं आपके
09:43thoughts इस पे जरूर जानना चाहूँँगा
09:47देखिए ये सब
09:48pop philosophy है और ये बड़ा नुकसान
09:51कर जाती है ये देपर इसका जो भाव
09:53है वो मैं समझ रहा हूँ
09:55जिसनोंने कहा है वो ये कहना
09:57चाहते हैं कि सहाब ऐसा नहीं है कि
09:59अगर कोई आदमी शोशक
10:01है, exploiter है, बुरा है
10:04तो उसका
10:05कर्मफल ही उसको सजा दे देगा
10:06उसी को कर्म हाँ पर कहा जा रहा है
10:09तो कई लोग जो ये भाव
10:11लेकर बैठ जाते हैं कि अरे वो बुरा आदमी है
10:13उसको तो उसका कर्मदंड
10:15खुद ही मिल जाएगा, हमें कुछ करने की जरूरत
10:17नहीं है, तो ऐसे लोगों
10:20को सिखाने के लिए
10:21ये जो आभी आपने कोट बोली, वो कही गई है
10:23कि नहीं नहीं, कर्मा वोंट डुइट
10:25तुम्हें खुद जा करके
10:27उसको इंसल्ट करना हो गया, जो भी
10:28जस्टिस है, वो तुम खुद डिलिवर करो
10:30कुछ उस तरह की बात है
10:32तो भाव शायद ठीक है
10:34लेकिन इसमें जो दर्शन है
10:37वो गड़बड है
10:40कर्म तो
10:41वैसे भी कभी कुछ नहीं करता
10:43करने वाले का
10:45नाम ही करता है
10:47दडूर
10:49परिभाशा ही करने वाले
10:50की यही है कि उसका नाम है
10:52डूर
10:53कर्म मतलब तो डीड है
10:54अब डीड क्या करेगी
10:57तो कर्म फल आपको मिल जाएगा
11:00आपने बुरा काम करा है
11:02तो भाविश्य में कभी
11:04यह आम धारणा है
11:05लेकिन यह धारणा भी
11:07गड़बड है और कई बार इस धारणा
11:10को भावद गीता के साथ भी जोड़ दिया जाता है
11:12और वो बात भी गड़बड है
11:14भावद गीता ऐसा कुछ नहीं कहती है
11:16कि तुमने आज अगर गलत काम करा है
11:18तो भाविश्य में परिणाम मिलेगा
11:19या आज तुमने अच्छा काम पुन्य करा है
11:22तो भाविश्य में तुम्हारा कल्यान हो जाएगा
11:24भावद गीता ऐसा कुछ नहीं कहती है
11:26भावद गीता वास्तव में
11:28कर्म की अपेक्षा
11:30करता को प्रमुखता देती है
11:33उसी की बात करती है
11:35करता
11:36अगर बौराया हुआ है
11:39विक्षिप्थ है पागल है
11:42तो वो जो कुछ भी करेगा
11:43वो गलत ही होगा अशु भी होगा
11:46मैं अगर ठीक नहीं हूँ
11:49मेरा दिमाग एकदम अभी
11:52नशे में है
11:53विक्षिप्थ हूँ मैं
11:55तो मैं सीधे चलू दाएं चलू बाएं चलू
11:57पीछे चलू किधर को भी चलू
11:58मैं लडखडा कर गिरूँगा ही
12:00मैं अपना कर्म बदलता रहूँगा
12:02कर्म की दिशा बदलता रहूँगा
12:04लेकिन मैं जिस भी दिशा जाऊँगा
12:06लडखडाऊँगा गिरूँगा चोट खाऊँगा
12:09और दूसरों को भी चोट दूँगा
12:10अमान लीजे मैं गाड़ी चलागर जा रहा हूँ
12:11तो खुद चोट लगे ने लगे पर दूसरे को चोट दे दूँगा
12:15तो बात कर्म की नहीं होती, बात करता की होती है
12:18मेरी हालत क्या है?
12:20और अक्सर अपनी ही हालत से मुझ चुराने के लिए
12:24हम कर्म कर्म कर्म चिलाने लग जाते हैं
12:27क्योंकि कर्म सदा उस दिशा में होता है न?
12:32अप्जेक्ट सारे बाहर होते हैं
12:34आप जो भी कर्म करते हैं
12:36किसी विशे से संबंधित होता है, विशे सब उधर होते हैं
12:39तो कर्म की बात करना माने विशय पर ध्यान देने लग जाना और विशय पर आपने जैसे ध्यान देने शुरू
12:45कर दिया वैसे ही आप अपनी और देखना बंद कर देते हैं
12:48तो भगवत गीता का भी जो संबंध कर्म से जोड़ दिया गया है उसके पीछे भी अहंकार की साजिश है
12:55कर्म की इतनी बात करो इतनी बात करो कि करता कभी तस्वीर में आने ही न पाए और करता कौन
13:02है करता डूर है कौन अहंकार इगो तो इगो खुद को बचाने के लिए डी
13:18गाता की स्थित ही उसका पुरसकार होती है या उसकी सजा उसका दंड होती है मैं नहीं जानता और न
13:31जानने के कारण मैं गडबड कर रहा हूं
13:34गडबड का दंड मुझे पहले ही मिल गया
13:37एक तरह से कर्म फल कर्म से पहले ही हाफिल हो गया
13:43मैं, मैं, इर्शियावश, जलन में आकर के
13:47मुझे लगे कि आप बहुत सुन्दर हैं, आप बहुत खुबसूरत हैं
13:50बहुत लोग आपको मानते हैं, आपके असपैसा बहुत है
13:52संमान बहुत है, मैं इर्शिया से जल रहा हूं भीतर
13:55उर्शिया से जल करके मान लीजिए, यहां कुछ हाथियार रखा
13:59मैं उस हाथियार से आपको मार दूँ
14:02मुझे कर्म फल आगे नहीं मिलेगा
14:04पहले ही मिल चुका है वो जो जलन है वो तो मुझे पहले ही अनुभव हुई ना उसके बाद मैंने
14:13आपकी हानी की
14:14तो कर्मफल तो कर्म से भी पहले आ गया चोरी की सजा चोरी के बाद नहीं मिलती
14:20चोरी की सजा ये होती है कि चोरी करने से पहले ही आप चोर बन चुके होते हैं
14:25चोर पहले आता है फिर वो चोरी करता है
14:27अब चोरी के और क्या सजा मिलेगी चोर तो बनी चुके हो
14:30लेकिन अहंकार को बड़ा अच्छा लगता है ये कहना कि कर्म फल कर्म के बाद मिलेगा
14:35उसमें बड़ी सुईधा हो जाती है
14:37अब मान लीजे आपने कर्म कुछ कर दाला चूरी कर ली कहीं से आके मज़े ले लिए
14:41घूस कर ली कुछ कर लिया
14:44अब अपने आपको आप तर्क दे सकते हैं कि कर्म फल तो 5-7 साल बाद मिलेगा ना
14:495-7 साल तो मज़े ले लूँ
14:51और क्या पता 5-7 साल में मज़े लेके खापी के मरी जाओ तब तो फिर मुझे कभी कर्म फल
14:56मिलेगा ही नहीं
15:13तो कर्म से भी पहले मिल जाता है
15:15तो कोई भी इस गुमान में ना रहे
15:18इस खुशफेहमी में ना रहे
15:20कि कर्म का फल एक साल बाद मिलेगा
15:23दो साल बाद मिलेगा या अगले जन्म में मिलेगा
15:25कर्म का फल तो कर्म करने से पहले ही मिल गया
15:28करता पर ध्यान दीजिए कर्म पर नहीं ये गीता का संदेश है ये बहुत मुझे लगता बड़ी खूपसूरत बात बहुत
15:36अच्छे तरीकें से समझाई आचारे जी ने
15:39अक्सर हमारी सोच तो यही होती है ना कि यार अभी कर देता हूँ बाद में देखी जाएगी कुछ होगा
15:44नहीं होगा बाद में हनुमान जी को प्रसाद चड़ा देंगे माज जाएंगे आदे लोग तो यह भी करते हैं कि
15:48बजरंग बली को रख दिये वही हमने ग्यारा रुप
16:08ने तो खराब हो सकती है इसके मज़े तो तुम अभी ले सकते हो पर इसका दुष परिणाम तुमको दो
16:14साल बाद मिलेगा तो भीतर से टुरं तरक क्या आएगा मज़े तो अभी ले लो ना दो साल बाद की
16:20बाद में देखेंगे और यही बात हमने एक आझ्यात्मिक सिद्�
16:38तो परिणाम तो तक्काल मिल जाता है पर इस बात को हंकार ने दबा दिया गीता ने ये बात साफ
16:43साफ समझाने की कोशिश की पर हमने गीता का अर्थ भी बिगाड़ दिया विक्रत कर दिया और वही बिगड़ा हुआ
16:48अर्थ जो है वो समाज में प्रचलित हो गया
16:51अचा अब आप लोगों से मेरे दो-तीन सवाल है और रिस्पॉंस जरूर चाहिए ठीक है क्योंकि उसके बाद जो
16:57सवाल होगा वो आपी के सब के काम का होगा आप में से कौन है जो चाहता है कि आप
17:02या आपकी फैंबिली में से कोई आपके बच्चे भाई भैन आई-ाई-टी म
17:20आपने कुछ दस्तक दी आपने कुछ प्ले किया और आपका रुख जो है वो कहीं न कहीं मुड़ गिया तो
17:27यह इस पर बात थोड़ी सी कम होती है तो मैं मतलब अक्सर हम जो मिडल क्लास लोग होते हैं
17:34वो सोचते हैं IIT चले गए मतलब जीवन IIM चले गए तो IS बन गए तो स
17:41आप पीडियां तर गई मतलब अक्सर लोग इसी तरह की बात ने करते हैं बट आपने सब कुछ किया देन
17:46वो क्या पॉइंट था वेन यू थाट की नहीं यार मतलब ये नहीं मेरी दिशा तो कुछ और ही है
17:53आप मेरे लिए बहुत महगा खाना ले आएं बहुत महगा खाना
18:11हूँ क्योंकि वो महंगा माना जाता है दुनिया के बाजार में मैं उसको देखू या खुद को देखूँ अब ठीक
18:19है कोई चीज है वो दुनिया के बाजार में बहुत कीमत रखती है कीमत होगी भी उसकी मैं खुद उन
18:25इंस्टिटूशन से निकला हूँ बहुत उनकी इज
18:40करते हो अपने लिए करते हो न क्योंकि शुरुआत ही होती है अपनी बेचैनी से जीवन की शुरुआत ही होती
18:47है एक रोने से चीक से वो भीतरी बेचैनी का दियो तक होती है तो होगी कोई बहुत महेंगी चीज
18:56अगर उससे मेरा पेट नहीं भर रहा तो मैं खुद को दिलासा
18:59कैसे दे सकता हूँ कि इतनी महंगी
19:01चीज मुझे जिंदगी में मिल रही है
19:02अब रुक जाओ यहीं पर
19:04होगी महंगी चीज और है महंगी चीज
19:06उची चीज है बहुत अच्छी चीज है
19:08पर वो मेरे लिए है
19:10और मुझे उस पर रुक नहीं जाना है
19:13अगर वो मुझे मिली है तो मुझे देखना है
19:15किस हद तक वो मेरे काम आ सकती है
19:19कैसे मेरे काम आ सकती है
19:21मैं प्रमुख हूँ
19:23प्रतियक व्यक्त प्रमुख है अपने लिए
19:25और हैं तो हैं
19:26आप जिनको अपना कहते हैं
19:29उनको भी आप मानते इसी लिए हैं
19:32क्योंकि अपना कहते हैं
19:34अपना कहते हैं
19:35तो हर बात में
19:37होता तो मैं ही है न
19:39इस मैं का ख्याल रखना पड़ता है
19:41ठीक है बहुत अच्छी नौकरी मिल रही है
19:43तो मिल रही है तो करके देखी भी तो
19:46क्या करूँ
19:47जबरदस्ती खुद को समझा लूँ
19:49कि यहाँ चैन मिल गया
19:51संतुष्टी मिल गई
19:52दिख रहा है कि दुनिया की क्या हालत है
19:54दिख रहा है कि कितनी असा मानता है
19:57दिख रहा है प्रत्वी का क्या हो रहा है
19:59पशुपक्षियों का क्या हो रहा है
20:00दिख रहा है कि हर आदमी जल रहा है
20:02मैं कैसे अपने आपको एक टेक जॉब में या बिरोक्रिटिक जॉब में या मैनिजीरियल जॉब में एक खाचे में ग्रूव
20:11में डाल दूँ और क्या दूँ कि मेरी जिंदगी सारतक हो गई
20:14उन कामों की मैं बुराई नहीं कर रहा हूँ वो काम बहुत अच्छे हैं पर वो काम करने वाले फिर
20:20हजारों लोग भी हैं
20:21आइटी से मैं कोई अकेला नहीं निकला यूपीएस्सी में हर साल अब आट सो हजार लोग सेलेक्ट हो रहे हैं
20:27तो यह सब चीजे ऐसी नहीं है कि जिनको करने वाले दूसरे नहीं है
20:31पर दूसरा एक काम है जिसको करने वाला मुझे कोई दिख नहीं रहा था
20:35और मेरी नजर में वो दुनिया का सबसे जरूरी काम था
20:38तो मैंने वो उठाया जो जरूरी होगा वही करूँगा ना
20:41जो मुझे जरूरी दिखाई दिया है वो मैं कर रहा हूँ
20:45एक चीज और इससे मुझे एक सवाल और मेरे दिमाग में आया
20:49जो हम सब के दिमाग में रहता हम मेरे ओफिस में आचारे जी
20:52वो ऐसी बिल्डिंग है जहां पर 10-12 ओफिस है
20:54जब सब लोग लंच में नीचे आते हैं ना
20:57सब एक दूसरे से पूछ रहे होते हैं
20:59तेरे यहाँ पर वेकंसी है
21:02आप में से किंदे लोग अपनी जॉब से
21:03सेटिस्वाइड हैं हात खड़ा कीजेगा
21:06कितने सेटिस्वाइड नहीं है
21:08बागी सब
21:11दो
21:11कुछ neutral भी होते हैं तो चल रहा है
21:14तो यह जो
21:16चीज होती है हम satisfy
21:17क्यों नहीं हो पाते हैं वहला यह human
21:19nature है जो हैं भी उन्हें भी
21:22लग रहा होगा कि नहीं यार बहुस तो कुछ करता वरता
21:24तो हैं नहीं है ठीक है बेकार में
21:25दो लाख रुपे इसको मिल रहे हैं आता है दुझा रवाच चाय पीता है
21:28मिटिंग करता है चला जाता है यह जो
21:30satisfaction लेवल है हमारा
21:32as human beings कहीं न कहीं
21:34जब मेरी तनखा बीस हजार थी
21:36तो मुझे लगता था यार जिस दिन पचास हो जाएगी
21:38भाई उस दिन तो जीवन
21:40मतलब स्वर्ग बन जाएगा
21:42बट जब तक पचास पहुची
21:44तब तक तो मुझे लगा कि पचास की वैल्यू यह
21:46यह satisfaction क्यों नहीं है हमारे अंदर
21:48क्योंकि हमें satisfaction से
21:50ज्यादा
21:51assumption प्यारा होता है
21:53इसको देखेंगे तो
21:55मज़िदार सी बात है
21:58अगर मुझे सच मुझ
21:59satisfaction चाहिए होता तो मैंने
22:01इमानदारी से पूछा होता कि
22:03dissatisfaction क्या चीज है
22:05और किसको है
22:08जिसको dissatisfaction
22:10बुरा लगेगा वो
22:11बाकी सब कुछ छोड़ करके
22:13हाथ धो करके इस
22:15dissatisfaction के पीछे लग जाएगा ना
22:17ये बेचैनी बला क्या है
22:19उठती कहां से है आती कहां से है
22:22किसको आती है
22:23पर हमें dissatisfaction
22:27उतना बुरा नहीं लगता
22:28हमें संतुष्टि से
22:31चैन से पूर्णता से
22:33बहुत प्यार नहीं है
22:35उससे ज्यादा प्यार है
22:37हमें हमारी माननेताओं से
22:39हमें चैन तो चाहिए
22:41पर चैन से ज्यादा
22:43हमें हमारी माननेताओं
22:45प्यारी है कौन सी माननेता
22:47कि चैन उधर है
22:50चैन चाहिए
22:52पर उधर से चाहिए
22:55चैन फिर भले ही ना मिले
22:57लेकिन जाना उधर है
22:58तो बताओ हमें ज्यादा प्यारा क्या है
23:01चैन या संसार
23:04संसार से चैन तो मिल नहीं रहा
23:06अभी आप नहीं कहा नहीं मिल रहा
23:07किसी को नहीं मिल रहा
23:08लेकिन फिर भी हर आदमी भाग संसार की ओरी रहा है
23:11तो बताओ संसार प्यारा है या चैन प्यारा है
23:15इमांदारी से चैन या satisfaction या संतुष्टी अगर हमें चाहिए होती है अगर हमें उनसे प्यार होता तो कभी तो
23:23हम अपते इस assumption को परखते
23:26टेस्ट करते कि चैन उधर मिलना भी है क्या पर कभी नहीं परखेंगे क्योंकि वो ज्यादा प्यारा है चैन प्यारा
23:35नहीं है
23:35चैन भले न मिले उधर ही भागना है उधर ही मुँ मारना है उधर ही गिड़ना है उधर ही खून
23:41बहाना है उधर ही मर जाना है
23:44जिस object के पीछे आप आज भाग रहे हैं
23:48उसके ही किसी संस्करण, किसी variant के पीछे
23:52आप पूरी जिंदगी भागे हैं
23:54यहां कोई एकदम बच्चा नहीं है कि जिसको कोई अनुभाव ना हो
23:57सबको खूब अनुभाव है
23:59आज आपकी जो इच्छाएं हैं, जो आपके टार्गेट्स हैं
24:03वो कोई नए नहीं है
24:04वो रिसाइकल्ड है बस
24:06आपने अतीत में जो चाहा था
24:09उसी का एक नया addition, संस्करण, विरियंट, रूप
24:14नया नाम ले करके, नई कहानी ले करके फिर आपके सामने आया
24:19और आपने कहा, अब मुझे ये चाहिए, अब मुझे वो चाहिए
24:23जो पहले मिला था, वही दुबारा मिलेगा
24:25और पहले क्या मिला था, हम शर्तिया तोर पे कह सकते हैं
24:29कि चैन नहीं मिला था, बेचैनी ही मिली थी
24:31क्यों कि पहले चैन मिल गया होता तो आज भी दोड क्यों रहे होते
24:37पहले जिसके पीछे दोड़े उससे बेचैनी मिली
24:41अब जिसके पीछे दोड़ रहे हो
24:43वो मुलत पहले वाले विश्य जैसा ही है
24:47तो जो पहले परणाम मिला वही तो मिलेगा न
24:52हमारे यहां पर गीता कव्यूनिटी के जो लोग हैं
24:54हम कहा करते हैं कि पुराने रास्तों पर चलते हुए
24:57नई मंजिल तक कैसे पहुच जाओगे
25:00पर हमें पुराने ही रास्तों पर चलने का
25:02और पुराने ही गड़ों में गिरने का शॉक है
25:05जिसे चैन चाहिए होगा न, वो गिरने का शौकीन नहीं रह जाता, वो चैन का प्रेमी बन जाता है, वो
25:15फिर यह नहीं कहता कि भागना तो उधर कोई है, भले ही वहाँ पर चोट मिलती हो, धोखा मिलता हो,
25:22दुख मिलता हो, पर जाओंगा तो मैं दुनिया के बाजारों के प
25:34चाहिए, और ज्यादा इज़त चाहिए, यह चाहिए, वो चाहिए, सोतरेगी चीज़े चाहिए, सब किधर चाहिए, उधर चाहिए, चाहने वाला कौन
25:41है, और उस सचमुच क्या मांग रहा है, इस पर ध्यानी नहीं देना है, जैसे घर में कोई छोटा बच्चा
25:47हो, और वो
25:49रो रहा है, और माबाप इतने अनाडी हैं, कभी उसको डीजल पिला रहे हैं, कभी उसको पेंट से नहला रहे
25:59हैं, कभी उसको धूप में खड़ा कर रहे हैं, कभी कुछ कर रहे हैं, कभी कुछ कर रहे हैं, अनाडी
26:04इतने हैं कि बस यह नहीं समझना चाह रहे हैं, कि बच्�
26:08क्या रहा है हमारे भीतर भी बैठा है कोई जो लगाता है बिलकरा है हम उसकी और नहीं देख रहे
26:13हैं हम दुनिया की और देख रहे हैं कि दुनिया में और क्या हासिल कर लूँ अरे दुनिया में जो
26:18हासिल करना था वो आपने बहुत किया और ब्रहमांड इतना बड़ा है कि आ
26:23आप अपनी शेश आयू और हासिल करते हुए भी बिता दे हैं तो भी कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे जो
26:29कुछ भी हासिल करेंगे वो पुराने जैसे ही होने वाला है तो अब क्यों नहीं जरा दूसरी दिशा देख लेते
26:38उधर की जगा इधर देखने लग जाते मैं हूं कौन
26:41मुझे सचमुच चाहिए क्या और जो अभी तक पाया है क्या मैं उसको अपनी उपलब दे अपना अचीवमेंट बोल भी
26:48सकता हूं या मैं जूट मूट ही फक्र करता रहता हूं जूट मूट ही गिनाता रहता हूं कि ये देखो
26:53ये सब मेरी अचीवमेंट्स हैं उनसे क्या स
27:10आदमी की जिन्दगी की दिशा बदलती है तब आदमी पुराने ही चक्र को और ज्यादा नहीं घुमाता पुराने ही रास्तों
27:19को और नहीं दोहराता पर हम ऐसा कर नहीं रहे तो हम कहते रहते हैं कि हमें चैन चाहिए हमें
27:26चैन नहीं चाहिए हमें भढ़काओ चाहिए वही मि
27:35बहुत कम होती है या शायद नहीं हुई मैं चाहूंगा कि अभी मैं आपका शिड्डूल मुझे देखा मैंने तो मैं
27:42दिमाग चक्रा गया कि मतलब आप यहां कभी वहां अभी इसके बाद आपका एक सेशन है जहां पे बहुत एक
27:48लाख लोग जो है ऑनलाइन जुडेंगे आ�
28:02आपने प्ले करना भी शुरू किया था तो वो उसका जीवन पर कुछ प्रभाव रहा आपके देखिए खासकर NSD से
28:11ऐसा मेरा कोई संबंध नहीं रहा है हाँ NSD के कुछ पासाउट्स रहे हैं जिन से मित्रता रही है पर
28:19as an institution NSD से मेरा कोई रिष्टा नहीं रहा है
28:24जितने मैंने प्लेज करे थे थे थासकर आयम में वो मेरी ही इस्थिते की अभिव्यक्ति थे
28:39तो जो मैं खुद को देख रहा था और जैसा मैं दुनिया का उनुभाव कर रहा था उसी चीज को
28:45मैं मंच से सबको दिखाना चाहता था
28:50आयनेसको का राइनसरोस था गठ थेटर आफ दे एपसर्ड है पूरा शहर ही जानवर बना जा रहा है और एक
28:58इंसान है जिसको कुछ समझ में नहीं आ रहा है ये सब क्या हो रहा है अपने आपको अकेला पाता
29:03है उसके सामने ये द्वन्ध है कि क्या उसे भी भीड में शामि
29:08हो करके जानवर बन जाना है सबकी तरह या कि अकेलेपन का खत्रा उठाना है आइन रैंड का था नाइट
29:18ऑफ जैनुरी 16 पगला घोडा बादल सरकार का
29:27ये सब मैं करता जा रहा था और
29:31अपने ही व्यक्तित्यों की परतें उतारता जा रहा था सब के सामने
29:39बहुत कुछ ऐसा है जो जो जब आप अपने चहरे से और अपने व्यक्तित्यों से बोलते हैं
29:48तो शायद उतना अर्थपूर्ण नहीं होता जितना जब आप किसी और किरदार के मादियम से बोलते हैं
29:56तो मेरे लिए वो काम मेरे नाटकों ने करा
30:01फर्वरी मार्च के महीने में आयम में प्लेस्मेंट होता है
30:04और जनवरी बाइस चौबीस के बीच में
30:08हमने एक साथ दो नाटक करे थे
30:10दोनों का डारेक्शन मैंने किया था
30:13दोनों का स्क्रिप्ट सेलेक्शन मैंने करा था
30:15एक हिंदी में था एक इंगलिश में था
30:17दोनों में ही लगभख केंद्री ये भूमिका में ही निभा रहा था,
30:21वो मेरा विद्रोह था, और वो मेरा दर्द था,
30:26एक व्यवस्था है, मैं उसका हिस्सा नहीं बनना चाहता था,
30:29पर मैं पा रहा था कि कोई दूसरा रास्ता सूज नहीं रहा है,
30:33तो अपनी स्थिति को अपने गुबार को मैं इस तरह से अभिव्यक्त कर रहा था
30:40उन्होंने बहुत बिल्कुल मदद करी मेरी और
30:46उसमें अभिनाय तो था ही
30:50अपनी आवाज भी थी
30:57शायद जल्दी ही मैं दुबारा अभिनाय कर भी पाऊं
31:02गीता कम्यूनिटी को हो सकता है कि
31:09मेरी कुछ चौकाने की नियत हो देखते हैं
31:12ये मतलब बहुत बड़ी चीज बोली है अचारे जी ने
31:16मतलब बहुत आराम से जो इन्होंने कह दी
31:18अचा मेरा इस सवाल पूछने के पीछे एक चीज ये भी थी
31:23कि जिसे आज जो जनरेशन है एक फिल्म आई ते आचारे जी सयारा
31:27लोग ठीटर में यंग जनरेशन रो रही है उसको देखके
31:30ठीक है डिप लगा के लोग जा रहे हैं
31:33तो फिल्मों का इंपक्ट आज की हमारी जनरेशन पर बहुत होता है
31:36सोशल मीडिया का इंपक्ट बहुत है
31:38क्या इन चीजों के जरीए आध्यात्म को आगे बढ़ाया जा सकता
31:43फिल्म, सोशल मीडिया, आध्यात्म
31:45इन तीनों का कोई ऐसा कॉम्बिनेशन है
31:48जो कहीं न कहीं कुछ कंस्ट्रक्टिव भी करे
31:50बजाए इसके कि मेरी रील पे व्यूस कम आ गए
31:54मैं लाइक नहीं किया उसने मेरी रील को
31:57या पोस्ट को कॉमेंट नहीं किया
31:59मौसी ने हमारी पोस्ट पे
32:00कुछ इस चीज़ को किसी कंस्ट्रक्टिव तरीके से
32:03इस्तमाल किया जा सकता
32:07शुरू शुरू में जब
32:09ये ट्रेंड आया था
32:11कि लोग सिनेमा हॉल में रो रहे हैं
32:14और वो जो आपने का ड्रिप लगा रहे हैं
32:16और बिलक रहे हैं
32:20तो मुझे भी बिच्चेतर लगा था पर फिर जब देखा कि पांच-दस फिल्मों में एक के बाद एक यह
32:26हो रहा है तो मुझे भी समझ में आ गया कि यह सब भी
32:30और्गनाइज़्ड है, स्पॉंसर्ड है, यह भी कुछ रियल नहीं है
32:34कुछ भी रियल नहीं है, ना जो परदे पर हो रहा है और ना जो दर्शकों की और से हो
32:41रहा है
32:48और यही बात अगर आप देख लें तो एक तरह से इन फिल्मों का सदूपयोग हो गया
32:53कि किस तरीके से फसाया जाता है
32:58एक स्क्रीन काफी नहीं थी, तो एक स्क्रीन और बनाई गई जिसमें इस स्क्रीन को देखने वालों को दिखाया गया
33:06और दिखाया गया कि यह देखो पिक्चर इतनी अच्छी है कि वो पागल हुए जा रहे हैं पिक्चर देखकर के
33:10वो जाखो लड़की बेहोश हो गई पिक्चर देखते
33:12देखते
33:14यहां जो दिखाया जा रहा है
33:15वो तो fiction है ही
33:17जो उस real में दिखाया जा रहा है
33:19कि लड़की इस fiction को देखकर
33:21बेहोश हो गई, वो real भी fiction है
33:23ठीक वैसले जहां
33:25यहां पर paid actors हैं
33:27वो जो लड़की
33:42देखो कि कैसे इस पूरी दुनिया में सब रचा गया है तुम पर हमला करने के लिए तुम पर कब्जा
33:49करने के लिए
33:51एक तो बात यह है कि वहाँ जो दिखाया जा रहा है उसी के साथ बह गए
33:57लिखने वाले ने अभिने करने वाले ने निर्देशक ने चाहा कि आपके भीतर भाव उठे हॉर्मोन्स उबलने लगें और आपके
34:09भीतर बिलकुल वही हो गया
34:10एक तो जीने का तरीका यह है यह तो बड़ा mechanical बड़ा inertial तरीका हो गया
34:16कि बहार से आपको जिस तरफ को धका मारा आप निकल लिए उसने सीन बनाया ही इसलिए ता कि आपको
34:23गुसा आ जाए और आपको गुसा आ गया
34:25कई बार तो सीन सिर्फ गुस्से के लिए नहीं बनाय जाते
34:29सामप्रदाईक गुस्से के लिए बनाय जाते हैं
34:31और आपके भीतर वो सामप्रदाईक क्रोध भी आ गया
34:35कई बार सीन आपके भीतर जेंडर स्पेसिफिक इमोशन्स उठाने के लिए बनाय जाते हैं
34:45देखो सारी औरतें ऐसी बुरी होती हैं
34:50किस-किस तरीके दे साज़िश करती है
34:51वो ये चाह रहा था कि धीरे से आपके भीतर भावना आ जाए और आप में आ भी गई
34:56या वो ये चाह रहा था कि दिखा दे कि All Males Are Oppressors आप में भावना आ गई
35:00एक तो तरीका ये है फिल्म देखने का
35:03और दूसरा तरीका ये है कि फिल्म के माद्य हम से देख लो कि कैसे कैसे फंदे डाले जा रहे
35:10हैं
35:10और ये दूसरा जो तरीका है फिल्म देखने का ये ज्यादा मज़ेदार है
35:15हर सीन में देखो कि तुम्हें फसाने की कैसे कैसे कोशिश की गई है
35:18ऐसे भी करके देखना बहुत मज़ाएगा
35:21एक-एक ऐलिमेंट पर ध्यान दो कि रोशनी कैसी रखी गई है
35:25बोलने का अंदाज क्या है
35:28कपड़े कैसे पहने गई है
35:30शरीर कितना दिखाया जा रहा है
35:33बैक्ग्राउंड म्यूजिक किस तरह कर डाला गया है
35:35और देखो कि सब कुछ करा जा रहा है सिर्फ इसलिए
35:38ता कि तुम फस जाओ
35:39और अगर ऐसे देख पाओ फिल्म को
35:42तो शायद दुनिया को भी ऐसे देख पाने की क्षमता शुरू करो
35:46फिर फसोगे नहीं
35:49अगर कला सीख ली तो मुझे लगता है बहुत कुछ सीख गए
35:52अज़ा मेरे हाथ में आपकी जो किताब है
35:54टृथ विदाउट अपालोजी
35:56ये खास इसलिए है कि ये आपने पूरी लिखी है
36:01और मैं बड़े सारे हलागी
36:03इसमें बहुत सारे ऐसे इंटरस्टिंग चैप्टर्स मुझे दिख रहे है
36:06एक मुझे दिखा
36:07लोनलीनेस इस दे फर्स टीचर
36:09हम अक्सर शिकायत करते हैं
36:11और मैं तो अकेला हूँ यार
36:12बहुत लोग करते है
36:14मेरे साथ तो कोई है यह नहीं यार
36:15मतलब अब इन सब को आपके साथ काफिला चाहिए
36:18मतलब ये शिकायत बहुत लोगों की होती है
36:20अलोन, इंस्टाग्राम पे ऐसे
36:22sad reels बहुत वाइरल होती है
36:24कुछ ऐसे pages हैं
36:25जो इसी तरह की reels बनाते हैं
36:27क्योंकि उनको पता है कि आप में से बहुत से लोग है
36:29जो खुद को अकेला फिल करते हैं
36:32हैं या नहीं वो मुझे नहीं पता
36:34वो अचारे जी बताएंगे लेकिन ये
36:35आपका teacher कैसे है ये समझाईए
36:41teacher तो सच पूछिये तो
36:47कोई बाहर से हो भी नहीं सकता
36:49क्योंकि बाहर बोलते ही ऐसी भावना आती है
36:51जैसे कि कोई अपनी इच्छा से आपको कुछ सिखा सकता है
36:55वो तो थोड़ी थोड़ी सबरदस्ती ऐसी बात हो गई
36:59teacher तो आपकी अपनी इच्छा ही होती है
37:03loneliness can act as a mirror
37:05in that sense it is potentially a teacher
37:09आप हर समय अपूर्ण, अकेला, उदास, आधा, अधूरा, अनुभव कर रहे है
37:17ये बात दुनिया के किसी विशह या object की कमी की और इशारा नहीं करती
37:23ये आपकी एक internal state की और इशारा करती है
37:33बाहर कुछ ऐसा खास नहीं है जो आपको मिल जाएगा
37:36तो आप पूरापन अनुभव करने लगेंगे
37:42आपकी जो भीतरी इस्थित है वो बदलने नहीं वाली आप कुछ भी हासिल कर लो
37:47तो आप जो हासिल करोगे उसके बात भी आप अधूर ही रहोगे
37:51क्योंकि बाहर से आप कुछ पकड़ो उससे पहले आपने कुछ और पकड़ रखा है जो आप छोड़ना नहीं चाहते
37:57जो आपने पकड़ रखा है वो है एक belief एक assumption
38:01जिसको आप टेस्ट भी नहीं करना चाहते है छोड़ना तो दूर की बात है
38:04वो belief यह है कि हर कोई lonely है और कुछ मिल जाएगा दुनिया का तो complete हो जाएगा
38:15एक बार यह belief आपने पकड़ ली एक बार इस belief को आपने truth मान लिया
38:22उसके बाद अब आपको दुनिया के पीछे दोड़ना ही पड़ेगा न हम को ऐसा लगता है कि हम दुनिया में
38:30कुछ पाना पकड़ना चाहते है
38:31दुनिया में क्या पाओगे पकड़ोगे आपने पहले ही कुछ पकड़ रखा है क्या पकड़ रखा है एक assumption एक माननेता
38:38एक belief क्या हूँ तो मैं अधूरा ही कुछ पाना जरूरी है अब क्या पाना जरूरी है इस पर debate
38:46हो सकता है कोई कुछ पाना चाहता है कोई कुछ पाना चाह
39:01उनमें भिन्नता, diversity, differences, बस यह है कि कोई कहता है कि मुझे नीला चाहिए, कोई कहता है मुझे पीला
39:08चाहिए, कोई कहता है कि मुझे जंगल चाहिए, कोई पहाड चाहिए, कोई कहता है मुझे आदमी चाहिए, कोई कहता है
39:14औरत चाहिए, इस तल पर तो उनमें भिन्नता हो सकती
39:18है पर एक बात सब में साजी है हम आधे अधूरे हमें कुछ चाहिए तो आपने देखिए न कि
39:24पहले ही किसी इसको गले लगा रखा है कोई साथी तो आप बाद में पाएंगे गले लगाने के लिए आपने
39:31अपनी माननेता को
39:32माननेता क्या है I am incomplete now why not test this assumption यही काम दर्शन करता है पूछो तो कि
39:43तुम कौन हो पूछो तो कि तुमने कैसे मान लिया कि तुम आधे अधूरे हो पूछो तो कि तुमने कैसे
39:51विश्वास कर लिया कि दुनिया की कोई चीज ले आओगे उसको यहां fit कर दोगे तो completion मिल जाएगा
39:56यह तुमने मान कैसे लिया पूछो test करो नहीं कहा जा रहा कि एक belief से हट करके opposite belief
40:03पर आजाओ पर जो भी आप सोचते हो जिस भी चीज के पीछे आप इतना अपना दम लगाते हो जिस
40:11चीज से आप इतना identify करते हो उससे दो चार सवाल तो कर लो कुछ प्रयोग कुछ परीक्ष
40:17और कुछ टेस्टिंग तो कर लो वो टेस्टिंग हम नहीं करते थोड़ा सा बहिमानी के निशानी हो जाती है तो
40:23अब बिना बहिमानी के एक सवाल का जवाब देंगे आप में से सबसे खुश कौन है सबसे जादा खुश
40:31आप पूशिया अचारे जी से सवाल क्या पूशना चाहते हैं अब परेशान इसका मतलब बाकी सारे परेशान ही है तो
40:39पहले जड़ा खुश आदमी का सवाल लेते हैं उसके बाद परेशान लोगों पर बढ़ते हैं जी
40:47मैं अकेला हूँ और खुश हूँ बहुत मेरे माबाप है मैं एक्सराइज करता हूँ और खुट के लिए जीता हूँ
40:56और मैं 24 गंटे में से 24 गंटा खुश हूँ
41:03मेरे को परिशान ही नहीं है बढ़िया अच्छी बात है मैं पाच हजार में भी खुश रहता हूँ जिसके पास
41:12ना कोई समस्या ना कोई सवाल उसमें सवार्थ है मेरा सब ऐसे ही हो जाए तो मुझे भी मुक्ति मिले
41:19मैं भी रहा हो जाओं
41:21मैं पाच हजार में भी खुश हूँ दृस हजार में भी कुश हूँ एक कोउश हूँ बगधियां बढ़ियां अगर सचमुच
41:27है तो ऐसे ही बने रहे है थार सब को दिखा दीजिए
41:33तो ताली बज़ा दिए इनके लीग बार
41:35आप बटाईए सबसे परेशान कौन है
41:38सबसे जदा परेशान कौन है
41:40बाद
41:40परेशान लोगों की संख्या
41:46बहत जदा है
41:54मरजी
41:57मजा आता होगा
41:58अपना
42:00चुनाव है
42:00आपके प्रेश्ण में ये भाव नहित है
42:04कि कोई बाहरी ताकत है
42:06या बाहरी कारण है
42:07जो आपको परिशान कर रहा है
42:10क्यों उससे आशे ही होता है
42:12reason, causality
42:15उसमें आप ये मानना चाह रहे होगी
42:18आप अलग हो, आपकी परिशानी अलग है
42:20आप भीतर हो, परिशानी बाहर है
42:23कोई न कोई तो और है
42:25जो आपको परिशान रखना चाहता है
42:28कोई नहीं रखना चाहता, मर्जी
42:31कोई दुखी क्यों है
42:33मेरी मर्जी
42:35भाई
42:37उसको दुख में ही मजा आ रहा है
42:38आप क्या कर लोगे
42:40दुख में ही मजा आ रहा है
42:41आप तो गीता प्रतिभागी है
42:43अचारे जी
42:44देखिए, हम पढ़ते हैं न आचारे नागारजुन को, पढ़ते हैं कि नहीं पढ़ते हैं, हाँ, तो शुन्यता सब्तति है, माध्यमिक
42:58मार्ग, तो उसमें बड़ा बढ़ियां उदारण देते हैं, उसमें कहते हैं कि इनसान ऐसा है, कि जैसे यहां पर दिवार
43:08हो, दिवार क
43:09कैन्वस की तरह इस्तिमाल करके उस पे एक बड़ी भयानक आकरती बनाए बड़ी भयानक तस्वीर बना दी यहां पर दीवार
43:17पर और उसको देख के डर गया दुबग गया ओ कह रहा है जिन्दगी बड़ी खराब है देखो कैसे कैसे
43:22भयानक लोग घूम रहे हैं और उदाहर�
43:39कर लो और दूसरा यह कि खुजलाने का मज़ा लो तो इनसान वो है जो खुजलाने का मज़ा लेता है
43:48भले ही खुजला के अपनी खाल फाड़ दे खुन निकाल ले अब आप बताईए खुन क्यों निकला क्योंकि मज़ा आ
43:57रहा है चाहे खाल फटी हो चाहे जिन्दगी फट
44:02क्यों फटी क्योंकि मज़ा आ रहा है लेकिन दूसरों को क्या बताएंगे मैं तो बहुत दुखी हूं मैं लाचार हूं
44:10मेरे साथ बुरा हुआ है और ये बता करके क्या कहेंगे अब देखो मेरे साथ इतना बुरा हुआ है तो
44:16थोड़ी मेरी मदद करो ना
44:19मेरे साथ बुरा हुआ है, मैं विक्टिम हूँ, तो मुझे कॉम्पेंसेट भी करो न, तुम विक्टिम नहीं हो
44:25तुमने मौज मारी ये मजों में भी, दुख में भी तुम मौज मार रहे हो
44:31और ये बात सुईकार करने बहुतों को बुरा लगेगा, खासकर उनको, जिन्होंने सफरिंग को आइडेंटिटी बना लिया है
44:39सफरिंग को आइडेंटिटी बनाना भी, इगो की जबरदस चाल होती है
44:44और सफरर बनके बहुत सारी सुविधा, सहूलियत, प्रिविलिजिस भी मिल जाती है न
44:52आप जिस भी चीज से परेशान है, उसके बने रहने में क्या आपका योगदान नहीं है, बताईए
44:59आप अगर ये भी कह रहे हैं कि आप कि बाहरी इस्थिती से परेशान है
45:03क्या वो बाहरी इस्थिती बिना आपके सहियों के सहमति के अनुमति के बनी रह सकती है
45:10आप अगर सचमुच परेशान होते तो अपनी परेशानी से कपके बाहर आ जाते
45:16आप खुद अपनी परेशानी को बना कर रख रहे हो और पिर दावा ये करते हो कि मैं तो
45:21दुखी हूँ परिशान हूँ
45:23तो कुल मिलागर के जवाब क्या है
45:25मैं पेमान हूँ
45:27मेरी महरजी
45:29but ma'am heads off to you
45:31इतने परिशानी में भी आप
45:32you are looking very lovely
45:35ताली बजा दीजे ma'am के लिए
45:37last question लेंगे हम
45:38और उसके बाद वो introduction जो मैंने
45:40शुरू में बोला था आप में से
45:42जो जो मुझे एक line एक word
45:44या अपने words में आचारी जी के बारे में
45:46जो भी बताएगा last question
45:47कौन और कोई परिशान
45:51बाहर से आए हैं
45:52सीधे इतने परिशान है कि सीधे बाहर से अंदर आए
45:54आईए आईए
45:55माइक ले लिजी आप
45:56नमस्ते सर, मेरा नाम अनन्त है
45:59और मेरा सवाल ये तृत विजाओ अपॉलिजी से है
46:04कि
46:05कौन्फिदेंसी स्फियर
46:06इसका एक चैप्टर है 23
46:08कौन्फिदेंसी स्फियर
46:09और हमने हमेशा इसकूल में, कॉलेज में
46:12या जॉब के ताइम में या मोटिवेशन
46:14ये सुनते हैं कि
46:15कि बी कौन्फिदेंसी स्फियर
46:17बिलीव इन ये जो है एक दूसरे चैप्टर के इसरा करता है
46:21वाई मोटिवेशन फिल्स
46:23अफिस बुक तो इस इस अनू थिंग
46:26बिकस्ट आ है नॉ लेशन टो दिस अनॉट
46:30मैने ये सुना नहीं
46:32कि और ये मेरे लिए नहीं है
46:33तो ये भुड़ा मैं और जानना चाहता हूँ
46:36इसके बारे में
46:39अभी आप हैं और मैं हूँ
46:41हम दोनों में से
46:42किसी की भी इस्थिति पर
46:45ये शब्द
46:47लागू होता है क्या
46:50आप से अगर कहा जाए
46:51कि ये जो व्यक्ति हाँ स्टेज पर बैठा है
46:53या आप सामने जो दूसरे व्यक्ति बैठे हैं
46:56कहा जाए कि
46:57इनकी स्थिति के बारे में
47:00दो-चार शब्द लिखिए
47:01तो मुझे नहीं लगता कि आप confident लिखना चाहेंगे
47:06इसी तरह तो आप बोल रहे हो
47:07क्या आप अपनी हालत को बयान करोगे
47:09confidence शब्द के साथ
47:11कोई पुछेगा अभी कैसे हो
47:13मैं ही पूछूँ
47:15कैसे हैं आप
47:15तो क्या आप कहेंगे मैं confident हूँ
47:19confidence की जरूरत
47:22एक
47:23stimulant, एक artificial stimulant
47:26की तरह पढ़ती है
47:27डर के महौल में
47:29डर होता है तभी confidence से यह होता है
47:31नहीं तो सहजता काफी होती है
47:35spontaneity
47:39nativity
47:42as if you belong
47:44when you belong
47:45then you don't have to be confident
47:48जब students
47:50confidence अगरा की बात करते थे
47:52मैं college, universities में जाता था पहले
47:54तो मैं उनसे पूछता था
47:56घर जाते हो, घर में मां होती है
47:59मां से बात करते वक्त
48:00confidence चाहिए होता है क्या
48:03तो बोलते थे, नहीं
48:04सहज होना काफी है
48:06I'm just being natural
48:08तो बोलते अच्छा अभी job interview में
48:11जब enter करते हो
48:13interview room है
48:14आप उसमें जा रहे हैं
48:16तो confidence चाहिए होता है, बोलते हैं तब चाहिए होता है
48:19मैंने का तब क्यों चाहिए होता है
48:21तब इसलिए चाहिए होता है क्योंकि interview room के बाहर
48:23जब खड़े तब टांगे कहा पर रही थी
48:26confidence एक जूठा नकाब है
48:29डर के चेहरे पर
48:31डर है, उसके उपर आप
48:33confidence का नकाब डालते हो
48:35इससे कहीं बहतर है न कि डर रहे ही नहीं
48:37पर हम
48:38हमारा समाज, हमारी शिक्षा
48:40पुरा जो हमारा
48:44culture है
48:45वो हमें
48:47confident होना सिखाता है, fearless नहीं
48:51fear है तो उसके साथ
48:52फिर confidence चाहिए होगा
48:54एक artificial antidote की तरह
48:57fear हो ही न तो
48:59पर fear हम रखना चाहते हैं
49:01और fear के लक्षणों को दबाने के लिए हम
49:04जरशाना चाहते हैं, हम प्रिटेंड करना चाहते हैं
49:07कि हम confident हैं
49:09बस लक्षण दब जाएं
49:10let the symptoms be suppressed
49:14confidence यही करता है
49:15वो डर के
49:17चिन्हों को, लक्षणों को
49:20दबा देता है
49:21उसके उपर आप क्या डाल देते हो
49:23एक mask, एक नकाब डाल देते हो
49:25और आप ऐसे हो जाते हो कि मैं तो
49:26सहाब confident हूँ
49:29हम डर क्यों नहीं हटाना चाहते
49:31हम डर के उपर
49:33confidence ओड़ना क्यों चाहते हैं
49:35हम डर हटाना क्यों नहीं चाहते
49:37क्योंकि डर
49:39और ego साथ साथ
49:41चलते हैं
49:43अगर डर को हटाएगी तो
49:45खुद भी हट जाएगी
49:46तो इसलिए वो कहते है कि मैं बनी रहूं
49:49मेरे साथ डर बना रहे
49:51पर डर के दुश परिणामों को
49:53छुपाने के लिए मैं
49:58मैं
49:59confident
49:59act करूंगी
50:01it's an act
50:03it's something that you put on
50:07it's something
50:08of a performance
50:09a display
50:12it's not real
50:15the real one
50:16would never be confident
50:18the real one
50:20would simply be himself
50:21smooth
50:23like a waterfall
50:24like a river
50:26like the wind
50:29the easy blow
50:30the smooth touch
50:34confidence is violence
50:36confidence is aggression
50:37क्योंकि डर से और क्या निकलेगा
50:40डरा हुआ आदमी aggressive ही तो होगा
50:42जो डरा हुआ है वो
50:44violent ही तो होगा
50:45और उसी
50:46violence का एक
50:47रूप होता है
50:48आत्म विश्वास
50:50आत्म विश्वास
50:52अरे आत्म विश्वास तो ठीक है
50:54पर ये आत्म क्या है
50:56आत्म विश्वास में
50:57आत्म अहंकार है
51:00अहंकार का अपने उपर विश्वास बन जाता है आत्मविश्वास
51:03लेकिन हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं
51:05जो आत्मविश्वास को, confidence को बड़ी भारी चीज मानता है
51:10और माबाबी बच्चों को यही सिखा रहे हैं
51:12Be confident, be confident
51:14Confident होना मत सिखाओ बच्चों को
51:16बच्चे से पूछो, क्या तुम डरे हुए हो, इमानदारी से बताओ
51:21क्या तुम डरे हुए हो, मैं तुमारे साथ हूँ
51:23बताओ क्या डर है, तो कहेगा हाँ डर है
51:25तो ठीक है, हम समझते हैं तुमारा डर कहां से है
51:28और क्या हम साथ में कोशिश कर सकते हैं
51:30कि तुम डर से आजाद हो पाओ, ये जरूरी है, उसे डर से आजादी दीजिए, उसे confidence का मुखोटा देने
51:37की जरूरत नहीं है.
51:40सर, विद यूर पर्मीशन, एक लाइन मैं कहना चाहूँगा, अभी वहां से वो शक्स एकदम सनी देवल की तरह आ
51:47रहे थे, जैसे सनी देवल बॉर्डर में आते हैं पाकिस्तान की तरफ, माइक आपको मिल गया, question आपने पूछ लिया,
51:52अब अगर आपकी भाशा में कहा जाए
51:54तो confident तो आप ही निकले, अचा, we have come to the end of this session, वैसे तो अचारे जी,
52:03घंटों बोलते रहे, हम सुनते रहे, और अब मैं चाहूँगा, जो शुरू में मैंने कहा था, आप में से कुछ
52:07लोग, क्या, एक शब, एक सवाल, आप रात में YouTube के इनके session में पूछिएगा, थोड़ी सी
52:14और मेहनत कीजिए, जीवन में कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है, सर मैं अगर अब बोलूँ इस session
52:19के end में, तो आपने मेरी तो बिल्कुल सोच कुछ चीजों को लेके बदल दी, मतलब मैं जिस तरह से
52:24सोचता था, I'm happy in my life, मैं अपने काम को enjoy करता हूँ, मुझे को�
52:34मुझे मज़ा आता अपने काम में, बट आपके साथ ये लगभग जो 40-45-50 मिनट का session है, it
52:40changed my thinking, कि हाँ, ऐसा भी होता है, so thank you so much for that, और अब आप में
52:47से कौन कुछ बोलना चाहेगा आचारे जी के introduction में, दियान रखिए, इसको हमने उलट दिया session को, introduction में
52:53हो रहा है, बताइए
52:55मैं आचारे जी के लिए बोलना चाहूंगे, आचारे जी पुफेक्टली गीता के निश्काम कर्मी योगी है, ये एक लाइन में,
53:06और आचारे जी एक सवाल है मेरा, कि हम लोगों को घर में कुछ भी होता है, तो बोलते हैं
53:14कि संकल भराओ, पंडित लोग बोलेंगे कि संकल �
53:18बहराओ, पैसा लेंगे, पानी डालेंगे और मौली बांधेंगे, भले ही वो किसी की मृत्य हो या शादी हो, कुछ भी
53:26हो संकल भराए जाता है, जबकि गीता में संकल्प को बिल्कुल त्यागने की बात है, तो जब गीता में बार
53:33बार ये बोला हुआ है, कि संकल्प प्र�
53:48उसमें ये संकल्प को त्यागने की बात है, तो ये पंडित हमसे संकल्प क्यू भरवाते हैं, छोटी से छोटी पूजा
53:55हो तो उसमें भी मौली बांध के संकल्प भरवाएंगे, मृत्य हो तो एक आदशी करना है एक महिने के लिए
54:01या एक साल के लिए उसका संकल्प भरो, �
54:04शादी हो तो संकल भरो, कुछ भी हो तो संकल भराने की बढ़ा, इसका क्या कारण है?
54:10मुझे एक मीम याद आ गया, सर आपकी जादत हो तो मैं पैसे का चक्कर बाबु भी है, वो एक
54:16मीम है ना, कौन सी हेरा फेरी फिल्म है, जो बोला इनोंने, मैं इनके साथ बैठ के अभी तक जितना
54:23मैंने का ना मेरी तिंकिंग बदली, तो मेरे दिमाग में इनकी बात सुनके �
54:27पस यही एक लाइन याद आई, मतलब यह बात भी अगर पकड़ी जाए सी गहराई में जाया जाए तो यह
54:34बात भी वहां तक ले जाएगी जो जवाब है, बिल्कुल ठीक है यह, वही है
54:40हम सबको भी पता नहीं है, हम भी तो गीता पढ़ते ना सर, इतने साल मैंने नहीं पढ़ी
54:45आप यह मान रहे हो ना, सुनिये, आपका भोलापन इसमें है कि आप मान रहे हो कि पंडित जी ने
54:50गीता पढ़ी है
54:54सर मुझे भी आपके गीता समझाने के बाद ये पता चला है
54:59गीता मैं भी बच्पन से पढ़ी हूँ
55:01और बहुत अच्छे से मैंने
55:03मगर क्या है शब्दों पे और संस्क्रिट
55:05तो गीता पढ़ने का शशी जी एक फाइदा ये होगा
55:08कि ज्यादा आसानी समझ में आने लगेगा कि किस किस ने नहीं पढ़ी है
55:13और गीता भगवद गीता तो अपनी जगह है
55:16गीता कम्यूनिटी के जो लोग बैठे हैं वो जानते ही होंगे
55:20अगर कम्यूनिटी पोस्ट देखिये नहीं देखिये तो
55:23आज रिभू गीता का पहला सत्र है यहां से भागूँगा जाओंगा
55:27और फिर आज एकदम एक नई जारदार शुरुवात होने वाली है
55:33भगवद गीता अश्टावकर गीता और जब तीक्षणता की बात आती है
55:38तो रिभू गीता सबसे उपर है उसको शुरू करते हैं
55:43बहुत बहुत शुक्रिया अचारजी आप जुड़े और बहुत मुझे लगता है कि
55:48हम सबको इस सेशन से कही ना कही कुछ ना कुछ तो मिला
55:54तो बाकी और बहुत कुछ जिसको चाहिए कुछ सवाल है
55:58प्लीज अप थोड़ा सा लेट हो जाएगा क्योंकि आप दो लाइन में मानेंगी नहीं
56:02चार का हमारे पास टाइम नहीं है
56:05चलिए दो लाइन सिर्फ बोल दीजे फटाफट लेकिन दो ही
56:08हर पल पे आपका ही नाम होगा आपके हर कदम पे दुनिया का सलाम होगा
56:12अपना व्यक्तित ऐसा ही रखेगा देखना वक्त वेक दिन आपका गुलाम होगा
56:16बहुत बढ़िया बहुत शांदार बहुत इमानदार हैं आप आपने दो लाइन कहीं
56:20लेकिन पीछे से भाई साब जो है एकदम येलो शर्ट में आगए
56:24ये सेशन से पहले मेरे साथ फोटो भी घिचवा रहे थे अब मुझे समझ में आया कि ऐसा क्यों कर
56:28रहे थे
56:28क्योंकि इन्हें भी कुछ बोलना था जी बोलिये आप भी बोल लीजे कोई वात नी बोल लीजे
56:32बट दो ही लाइन
56:33अचार की पर नाम
56:35अचार की के लिए मैं एक शेर पढ़ना चाहूंगा
56:38वो अलग बात है कि दूर खड़े रहते हैं लेकिन जो बड़े हैं वो बड़े ही रहते हैं
56:43बहुत बड़िया सर बहुत बड़िया आपने गोवा में लखनव बना दिया
56:47वावा थैंक यू सो मच गाइस पर जॉइन इन थैंक यू सो मच थैंक यू सो मच
56:52और गुड़नाइट सब लोग अच्छे से डिनर कीजिए और उसके बाद सर सेशन कितने बजे है यूट्यूब पर यूट्यूब पर
56:58नहीं है हमारी याप पर है
57:02थोड़ा सा रुकिएगा सर का फेलिसिटेशन भी है वो भी आप अटेंड कीजिए दो मिनट एंड उसके बाद बुक साइनिंग
57:09जो होगी वो बाहर होगी तो ये कम्माल की किताब है इसको 110 परसंट ले लीजेगा क्योंकि मैंने तो सरफ
57:17चैप्टर्स के नाम सुने तो मैं �
57:18बहुत इंट्रीग हो गया तो विल स्टार्ट विट फेलिसिटेशन सेरेमनी
58:00आपया क्यों विल दॉट्पिक की गष्योंकि hosta live उसके नहीं किसुटी के नहीं वो फची कि फिकेंस की उसलिए खलांदा
58:03आप यच्वीच sha
58:06आप दॉट वृट में भोक फुषी होगि है
58:19प्राइज के लिए इतने बड़े होना कि मेरा जो डिरेक्शन है कि किस तरब जाना है वो उसमें से आपका
58:33बहुत बड़ा यहुदाने है
58:34मेरी लाइज में दो थेंक यू थेंक यू थेंक यू सर सो मच्छ थेंक यू
59:04किरेंदें जायमारा मैं दोपी आपकाम्रों दोप्डों यू मिर अम् जवेदें में
59:32किरेंगेद़ क्लिफीट
59:34जाथ में वो बोख कहां के लाएं?
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