00:00जब से मैं आई हूँ, 2.5 years हो गया है, मुझे यहाँ पे PhD जॉइन के हुए, और तब
00:04से मैंने देखा यहाँ पे 9 suicides हो चुके हैं, और फिर मैं देखते हूँ कि sensitivity बिल्कुल भी नहीं
00:10बची है, मतलब जैसे आज suicide हुआ एंड देन उसके बाद में फिर fest हो रहे हैं, students जा भी
00:15र
00:28जाद में होती है, अपने लिए पहले होती है, हमें अपने लिए ही कहा है कि दूसरों के लिए sensitive
00:33हो जाएंगे, जो चले गए उनका चला जाना बहुत बहुत दुखद है, आप कह रहे हो, IT कानपूर campus में
00:419 suicides, 2.5 साल में, सारी IT मिला करके हर साल, दर्जन, दो दर्जन, बहु
00:58ज्यादा दुखद है, कि जो लोग भले चंगे दिखते हैं, जो लोग campus की success stories कहलाते हैं, एक बहुत
01:11दूसरे तरीके से, वो भी self-harm कर रहे होते हैं, आप अगर campus में तयार हो रहे हो एक
01:21ऐसी जिने के लिए, जिस जिन्दगी में आपका दिल नहीं और प्यार नहीं,
01:26तो क्या आप सच्मुच जीने जा रहे हो, वो भी तो एक तरह की, मृत्य हुई तो हुई न, जी
01:35सकते थे, और जीने की जगए बस survive करना चुना, कैसी जिन्दगी जिसमें आजादी नहों, बोध नहों, चेतना नहों, प्रेम
01:44नहों, वो कोई जिन्दगी है,
01:47प्रेजिडी सिर्फ मृत्यू में ही नहीं होती, और से देखो, तो जिन्दगी ज्यादा बड़ी ट्रेजिडी हो सकती है, वो ट्रेजिडी
01:56आप अपने साथ नहोंने दें, बस ही आखरी बात,
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