Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
ये वीडियो 31.07.2022 के वेदांत महोत्सव से लिया गया है।
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant
#आचार्यप्रशांत
#GautamBuddha
#Buddha
#Nirvana
#Enlightenment
#Dhamma
#SpiritualJourney
#KarmaYoga
#LiveTheTruth
#IndianPhilosophy
#InnerFreedom

Category

📚
Learning
Transcript
00:00बुद्ध जाकर के 12-14 साल ज्ञान प्राप्ति के लिए, मुप्ति के लिए धरुदर भटकते रहे, इतने सारे गुरुवों से
00:07शिक्षकों से मिलें, उसकी तो करते हैं, उसके जो बाद की बात है, बहुर ज्यादा मारमिक है न, 70-80
00:13साल जीए थे, तो उसके मोक्ष के या निर
00:29साल पहले की, भारत की आबादी इतनी सी, लोग कम, जंगल ज्यादा, कुछ किंती के शहर, बाकी सब चोटे-चोटे
00:36-चोटे-चोटे-चोटे गाओं, और गाओं-गाओं में भी न जाने कितनी दूरी, एक गाओं से दूसरे गाओं पहुंचना ही
00:43कितनी महनत का, खतरे का का
00:45साम रहा होगा, और अब युद्धाक्षत्रिय तो रहे नहीं, कि अस्त्र लेके चलेंगे, असीना लेके चलेंगे, तो नंगे पाओं जा
00:52रहे हैं, हद से हद, दो-चार उनके भिक्षू उनके साथ हैं, और जंगल ही जंगल, जंगल ही जंगल, खाने
00:58पीने का, वहां कौन �
00:59बिच्छा देता होगा, तो सोचो एक बार, कितनी रातें, कितने ही हफ्ते, नंगे पैर और भूखे पेट, ये वो है,
01:06जो अपनी ओर से दे सकते हैं, और जब उन्होंने इतना दिया, तो भारत से फिर उनको बराबर का प्यार
01:12भी मिला, पूरा उत्तर भारत बुद्ध का न
01:29भावी खाते हैं, क्योंकि सम्मान हम कई बार ऐसों को भी दे देते हैं, जो उसका अधिकारी नहीं होता है,
01:33पर वो गलती करनी फिर भी ठीक है, किसी ऐसे को इजद दे दी जो उसका अधिकारी नहीं, कोई बात
01:38नहीं, लेकिन ऐसे को इजद देने से कभी चूक मत जाना जो �
01:43उसका अधिकारी है तो बुद्ध ने अपना जीवन दे दिया भारत को और भारत को यह नहीं फिर बुद्ध की
01:48बाद भारत से बाहर भी खुब फैली
Comments

Recommended