00:00आज का जो युआ है
00:01वो नहीं लोकधर्म को मानना चाहता है
00:04और नहीं गीता को मानना चाहता है
00:07उसे टोटली एकनोलेजी नहीं करना चाहता
00:10उनका भी जो एक्टिट्टूड है
00:12पैसा, जिनके पास पैसा और पावर है
00:16गीता की ब्रैंडिंग एक लोकधार्मिक बुक के रूप में हो गई है
00:20तो ये जो जेंजी है जब लोकधर्म को ठुकराती है तो लोकधर्म के साथ सब गीता को भी ठुकरा देती
00:25है
00:25बराबर उनके लिए दुरों चीज़े बराबर है
00:30कि उनके लिए गीता पुराण सब एक है उनके लिए लोज सब एक हैं कि पावर चाहर जो चारवक
00:50फिलोसोफी थी ना हेडोनिजम उन्हें पड़ी ए फिलोसोफी तो वह एक्चली जीते हैं कि हमें पैसा कमाना है पावर चारवाग
00:58कोई जन्जी थोड़ी थे लेकिन उनकी जो एटिटूड है आज की लाइफ की वह यहीं कि पैसा कमाएं वह एटिचूड
01:04हर उस्वेक्ति का हो
01:20वह डिफॉल्ट एटिचूड है वह जन्जी का नहीं है जब आप उससे उसी क्या खाड़े में लड़ने जाओगे आथ हमेशा
01:26हारोगे जब आप कहोगे कि मुझे तेरा फ्रेमवर्क सुईकार है सुईकार नहीं करना होता है वो जो बोल रहा है
01:33उसके पीछे जो धारणा है
01:35पहले उसको उगारना होता है तब जाकर के आप कुछ समझा पाओगे
Comments