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पूरा वीडियो : जन्मदिवस पर, जन्मदाता को || आचार्य प्रशांत
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Transcript
00:00जन्म देवस पर जन्म दाता को
00:02अपने पर्व पर मुझे जन्म दिया
00:05लगा मुझे मैं कृत-कृत्ते हुआ
00:07पर जैसे जैसे समझ बढ़ी
00:10वैसे वैसे प्रशन उठा
00:12जो जग तुमसे ही छल करता
00:14उसमें मुझे भेजा क्यों भला
00:17जिस संसार में दुरुप्युक्त होता
00:20तुम्हारा ही निशान है
00:23उस संसार में बोलो फिर मेरा क्या इस्थान है
00:27हे अचिन्त देखो तुम्हारे बारे में
00:31सो किस्से वो गढ़ रहे
00:34हे अभीरू देखो तुम्हारे नाम पर
00:38भय का व्यापार कर रहे
00:40हे पशुपत्य तुम्हारा ही नाम लेकर पशुओं का पीड़न कर रहे, हे बोधमूरत्य देखो तुम्हारे नाम पर अंधविश्वास प्रचारित हो
00:55रहे, हे शेखर ये स्वार्थवश तुम्हें शेखर से नीचे खीच रहे,
01:02हे आशुतोष पूरी दुनिया खाकर भी संतोष ये जरा न कर रहे, इस संसार में मुझे यदि भेजा, तो भेजना
01:14था शद्धा हीन, बुद्ध हीन, सर उठा न सकूँ ऐसा पौरुश हीन, और जैसा मुझे भेजा है, मुझे में विद्रो
01:24है, ललकार है, आह है, तुम्हारे
01:27मेरे लिए सब लीला है, मेरे लिए जौला है, अंतरदाह है, मुझे किस असंभव युद्ध में डाल दिया, तुम्हारी माया
01:37के पास तुम्हारा ही नाम है, और मेरे पास तुम्हारा दिया काम है, वो हार सकती नहीं, मैं हार मानूंगा
01:44नहीं, अपनी सिमाओं के बीच संघ
01:49भर्ष करता मैं एक साधारण इंसान हूं नहार सकता न जीत सकता नसर से पाउं तक लहू लुहान हूं
01:59हे नटराज अब मुक्ति दो संताप से व्याधि से उठो आज समाधि से अपने नाम पर चल रहे पाखंड कांत
02:09करो
02:10करोँ आज तांडव और 파प को प्रलेडओं को िटे पाप जो пад अनाचार मिटे प्रूरता मिटे व्यभिचार करोटो नन्हें जीव
02:23जो रोज मारे क्यों मिटना जाए ऐसा संसार
02:26मिटू मैं मिटे सब पीड़ा मिटे अधर्म का पूरा विस्तार मिटे प्रत्थ्वी मिटे मर्म भ्यदी हाहाकार
02:35इदनोरे अंतस्वें तुम रहे हो हे अगोर तो आज तुहारे पर्व पर वर्दान मांगता हूँ
02:43नाश हो नाश हो अनन्त प्रेम गीत नहीं अंतिम विध्वन सगान मांगता हूँ
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