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महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्ग को दिए गए 5 फीसदी आरक्षण से जुड़ा पुराना फैसला रद्द कर दिया है। दरअसल साल 2014 में एक अध्यादेश के जरिए मुस्लिम समाज को विशेष पिछड़ा SBC-A के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था और इसके आधार पर ही जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे थे। जिसपर सरकार ने रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं...


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00:00महरास्ट सरकार ने समाजिक और शेक्षडिक रूप से पिछडे मुस्लिम वर को दिये गड़े 5% आरक्षड से जुड़ा पुराना
00:07फैसला रद कर दिया है।
00:09दरसल साल 2014 में एक अध्यादेश के जरिये मुस्लिम समाज को विशेश पिछड़ा S.B.C.A. के तहट सरकारी
00:18नौकरियों और शेक्षडिक संस्थानों में 5% भी आरक्षड दिया गया था और इसके अधार पर ही जाती परमान पत्र
00:26और जाती वैदता परमान पत्र भी जारी कि
00:29जा रहे थे जिस पर सरकार ने रोक लगा दी है इस फैसले के बाद राजनितिक प्रतिक्रिया आ रही है
00:59तो यह तो उसका स्वागत करना चाहिए अरक्षड जो समाप्त हुआ है और जो स्कोटे माते उनको मिलता ही है
01:04लेकिन क्यों मुस्लिम कहे करके अरक्षड देना वो गलत है अलब संख्यक कहा है अब अब तो अलब संख्यक नहीं
01:09रहे तो यह तो विचार करना चाहिए यह तो
01:12foreign
01:29foreign
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01:43The government says that the government is going to be a reservation.
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