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असम की जिस BLO ने मतदाता सूची से मुसलमानों के नाम साजिशन हटाने का मसला सबसे पहला हटाया था, उसे असम सरकार ने न केवल BLO से हटा दिया है, बल्कि उसे टीचर की नौकरी से भी सस्पेंड कर दिया है। वैसे हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार से और क्या उम्मीद ही की जा सकती थी...
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Transcript
00:00असम की बहादूर बेटी सुमोना रह्मान चौधरी को सच बोलने की भारी कीमत चुकानी पड़ी उन्हें असम सरकार ने न सिर्फ बियलो के पत से हटा दिया बलकि उनकी जो नौकरी थी जो टीचर थी वहां से भी उन्हें सस्पेंट कर दिया गया और इसकी वज़ा कोई छ�
00:30उन्होंने तथि पेश किया था कि किस तरह से वह बियलो हैं लेकिन उनके बिना उनकी जानकारी के बिना इलाके के अंगिनत मुसल्मान वोटरों के नाम काट दिये गए या उन्हें मिसिंग दिखा दिया गया
00:46यह सच जब 19 जन्वरी को सामने आया तभी से हमें आचंका थी कि सुमोना जैसी बहादूर लड़की को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है और जिस तरह से असम एड्मिस्टेशन ने बदले की कारवाई की क्योंकि हम सब जानते हैं कि असम के मुक्यमंत्री हेमंत विस्वसर
01:16वह तो यहां तक कह देते हैं कि चार से पांच लाख मुस्लिम नाम कटने चाहिए असम की वोटर लिस से ऐसे में सुमोना रह्मान चौदरी का यह सच पचाना बहुत मुश्किल था क्योंकि इसके बाद से लगातार खबरे आ रही थी कि हर गली महले में हर बीयलो के उपर कि
01:46रहे हैं स्टांड विफ सुमोना
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