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पूरा वीडियो : प्रिये! तुम खाना नहीं, प्यार परोसती हो! || आचार्य प्रशांत (2025)
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Transcript
00:00आम घर में कहा जाता है कि ग्रहणी अगर खाना बनाए तो वो अच्छा होता है
00:05वो बनाती है तो प्रेम से बनाती है तो खाना पॉष्टिक रहता है
00:09तो तमाम तरक दिये जाते हैं कि खाना जो है घर की ग्रहणी आहीं बनाए
00:17खाना कौन बनाए ये बात की बात है
00:20पहला मुद्दा तो यह है कि खाना जिंदगे में इतनी बड़ी चीज होनी क्यों चाहिए
00:24चाहे महिला बनाए चाहे पुरुष बनाए यह इतनी बड़ी चीज क्यासे हो गई खाना
00:29कोई भी व्यक्ति खाने को इतना क्यों महत्तो दे रहा है कि उसके लिए रसोई में इतने सारे घंटे आनिवारे
00:38हो जाते हैं
00:39यह तो आप बहुत अच्छे जानती हैं कि जो सबसे ज्यादा पॉष्टिक खाना होता है
00:43वो होता है जिसको बनाने में सबसे कम समय लगता है
00:46सबसे पॉष्टिक खाना वो होता है जो सबसे कम समय में बनाया गया होता है
00:51मैं मैगी की बात नहीं कर रहा हूँ
00:55यह भी नहीं कहा रहा हूँ कि सिर्फ फल काटके खालो
00:57साधारन खाना, वो बहुत समय नहीं लेता है
01:00तो पहली बात तो ये है कि जिन्दगी में खाना खाना भी नहीं, समस्या खाना नहीं है
01:07समस्या है लजीज खाना
01:09और बहुत ज्यादा चटपटे खाने की, जायकेदार खाने की, स्वाधिश्ट खाने की
01:16मांग आप पाएंगे
01:19थोड़ा परक्य देखिएगा अपने अनुभाव से
01:21मेरी बात पर रिकिन करने की जरूरत नहीं है
01:23आप पाएंगे कि उन लोगों में ही होती है
01:26जिनके पास जीवन में कोई और आनंद होता नहीं
01:30जब जीवन में कोई आप अच्छा लक्षन ही बनाएंगे
01:33आपके पास कुछ ऐसा होगा नहीं जिसके लिए
01:35खुल कर जिया जा सके
01:38जिसके लिए डूप कर जिया जा सके
01:41तो जीवन में कोई स्वाद है नहीं आपके
01:45जब जीवन में स्वाद नहीं होता ना
01:47तो उसकी भरपाई हम जबान के स्वाद से करना चाहते हैं
01:50यही वो लोग होंगे जो और ज़्यादा चटपटा मागेंगे
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