00:00फिल्मों का इंपक्ट आज की हमारी जनरेशन पे बहुत होता है
00:03सोशल मीडिया का इंपक्ट बहुत है
00:05फिल्म आई थे आजा रहे जी सही आरा
00:07लोग थेटर में यंग जनरेशन रो रही है उसको देखके
00:11ठीक है डिप लगा के लोग जा रहे हैं
00:13क्या इन चीजों के जरिये आध्यात्म को आगे बढ़ाया जा सकता
00:17शुरू शुरू में जब ये ट्रेंड आया था
00:21कि लोग सिनेमा हॉल में रो रहे हैं
00:24और वो जो आपने का ड्रिप लगा रहे हैं
00:26तो मुझे भी विचित्र लगा था
00:28पर फिर जब देखा कि पांच-दस फिल्मों में एक के बाद एक यह हो रहा है
00:33तो मुझे भी समझ में आ गया कि ये सब भी और्गनाईजड है, स्पॉंसर्ड है
00:36ये भी कुछ रियल नहीं है
00:39एक स्क्रीन काफी नहीं थी
00:40तो एक स्क्रीन और बनाई गई
00:43जिसमें इस स्क्रीन को देखने वालों को दिखाया गया
00:46और दिखाया गया कि ये देखो पिक्चर इतनी अच्छी है
00:49कि वो पागल हुए जा रहे हैं पिक्चर देखकर के
00:51वो देखो लड़की बेहोश हो गई पिक्चर देखते देखते
00:54यहाँ जो दिखाया जा रहा है वो तो फिक्षन है ही
00:58जो उस रील में दिखाया जा रहा है कि लड़की इस फिक्षन को देखकर बेहोश हो गई
01:02वो रील भी फिक्षन है
01:03बड़ा mechanical, बड़ा inertial तरीका हो गया
01:06कि बाहर से आपको जिस तरफ को धक्का मारा आप निकल लिए
01:10उसने scene बनाया यह इसलिए था कि आपको गुस्सा आ जाए
01:13और आपको गुस्सा आ गया
01:14कई बार तो scene सिर्फ गुस्से के लिए नहीं बनाय जाते
01:18संप्रदाई गुस्से के लिए बनाय जाते हैं
01:20और आपके भीतर वो संप्रदाई क्रोध भी आ गया
01:23या वो यह चाह रहा था कि दिखा दे कि
01:26all males are oppressors आपने उभावना आ गई
01:28एक तो तरीका यह है फिल्म देखने का
01:31और दूसरा तरीका यह है कि
01:33फिल्म के माद्यम से देख लो
01:35कि कैसे कैसे फंदे डाले जा रहे हैं
01:37और यह दूसरा जो तरीका है
01:39फिल्म देखने का यह ज्यादा मज़ेदार है
01:42हर सीन में देखो कि
01:43तुम्हें फसाने की कैसे कैसे कोशिश की गई है
01:45ऐसे भी करके देखना बहुत मजाएगा
01:48और अगर ऐसे देख पाओ फिल्म को
01:50तो शायद दुनिया को भी ऐसे देख पाने की क्षमता शुरू करो
01:53फिर फसोगे नहीं
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