00:08आदमी शादी के जिम्मेदार इससे भागता क्यों है?
00:30आम तोर पे हमारे जीवन के सब लक्षे ऐसे ही आते हैं तो नहीं हो पाते हम समर्पित हमारे तो
00:36कई बार पती पतनी भी ऐसे ही आते हैं चचा ताई ताउ इन सब ने मिलकर के पती दिला दिया
00:41या पतनी दिला दी फिर हमें भीतर भीतर बड़ी गलानी रहती है कि पतनी श्री �
00:45पतिश्री के प्रतिहम समर्पित नहीं हो पाते, कैसे हो पाओगे, तुम्हारे हो तब हो पाओगे न, जिम्मेदारी उसी की उठा
00:51पाओगे, और हस्ते हस्ते उठाओगे, और कृतग्यता के साथ उठाओगे, जो कुछ तुम्हारे हृदय से आया है, जो तुम्हारे हृदय
01:15स
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