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एक गरीब आदमी अपने छोटे से ठेले पर गरमागरम आलू चिप्स बनाकर लोगों का दिल जीत लेता है।
इस मजेदार हिंदी कहानी में आपको मिलेगा स्ट्रीट फूड का असली स्वाद, हल्की-फुल्की कॉमेडी और एक प्यारा सा मोरल जो दिल को छू जाएगा। 😄🥔

देखिए कैसे साधारण मेहनत, ईमानदारी और मुस्कान किसी भी इंसान की किस्मत बदल सकती है।
यह हिंदी कहानी खास तौर पर उन लोगों के लिए है जिन्हें स्ट्रीट फूड, देसी कॉमेडी और मोटिवेशनल मोरल स्टोरीज़ पसंद हैं।

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Transcript
00:00मंगरू के अंग्रेजी चिप्स
00:03मंगरू एक पुरानी कढ़ाई में आलू तल रहा है
00:06पसीना पोचते हुए वो बड़े प्यार से एक चिप्स को देखता है
00:09बिमली पास सी बैठी सबसी काट रही है
00:12और उसे गूर रही है
00:14तो दिन से जेब में एक पैसा नहीं आया
00:30बस एक बार मेरी ब्रांडिंग हो जाए
00:34ब्रांडिंग? अरे पहले बाजार में जाकर बेच तो आओ
00:37वो लाला घसीटा राम रोज मुफ्त का सैंपल खा जाता है
00:42मंगरू डिब्बे में चिप्स भरता है और अपनी पुरानी साइकल उठाता है
00:49लाला घसीटा राम अपनी दुकान पर मक्षिया उड़ा रहा है
00:53शेहर से उसका साला रमेश बाबू सूट बूट में बैठा है
01:01मंगरू साइकल रोकता है
01:05राम राम लाला जी आज एकदम ताजा माल लाया हूँ
01:09खाओगे तो उंगलिया चाटते रह जाओगे
01:13अरा मंगरू तो फिरा गया
01:16बिचले हफते वाले चिप्स में वो बात नहीं थी
01:19थोड़ा गीला गीला लग रहा था
01:22गीला नहीं लाला जी वो सौफ्ट क्रंच था
01:25आज वाला एकदम हाड क्रंच है चक के देखो
01:29मंगरू एक चिप्स बढ़ाता है
01:31लाला जट कर तीन चार उठा लेता है
01:33रमेश बाबू भी एक चिप्स उठाते हैं
01:39क्रिस्पी तो है
01:40लेकिन वो इंपोर्टेड वाला फील नहीं है
01:43शहर में हम जो पोटेटो वेफर्स खाते हैं
01:45उसका क्लास ही अलग है
01:47सुन लिया
01:48मेरे साले साहब शहर के बड़े अफसर है
01:52इन्हें ये देशी तेल की महक नहीं जमती
01:57लेकिन लाला जी ये शुद्ध मूंगफली का तेल है
02:00मेहनत असली है
02:02मेहनत का अचाल डालेंगे क्या
02:05स्वाद चाहिए स्वाद
02:07सुन कल शाम को
02:09मेरे घर पर एक छोटी दावत है
02:12रमेश बाबू की
02:13सगाई पक्की हुई है
02:15छे आठ खास महमान आएंगे
02:17नाश्टे के लिए समोसे वाले
02:19ने धोखा दे दिया
02:22तो मैं बना दू चिप्स
02:24एकदम गर्मा गर्म
02:28देख बजट कम है
02:30अगर महमानों ने तारीफ की
02:32तो पैसे मिलेंगे
02:34अगर किसी ने मुह बनाया
02:36तो तू और तेरी साइकल
02:38दोनों को दुकान में गिरवी रख लूँगा
02:41मंजूर
02:42जी जी मंजूर
02:44मैं जान लगा दूँगा
02:48बिमली और मंगरू अफरा तफरीबे है
02:50मंगरू कड़ाई पर बैठा है
02:52और बिमली मसाले तयार कर रही है
02:54अरे धीरे हाँ चलाओ
02:56आलू है तुमारा दुश्मन नहीं
02:57लाला की दावत है
02:59कोई गरबर हुई
03:00तो वो हमारी जो उपड़ी भी नीलाम कर देगा
03:02तू चिंता मत कर बिमली
03:04आज मैं ऐसी रेसिपी लगाऊंगा
03:06जो मेरे दादा जी ने मुझे सपने में भी नहीं बताई थी
03:09अरे धियान किदर है
03:11आज कम करो चल जाएगा
03:12मंगरू हरबड़ा कर चिपस बाहर निकालता है
03:15चिपस सुनेरे होने की वज़े से
03:17थोड़े गहरे लाल और भूरे हो चुके थे
03:21कुछ तो थोड़े काले भी दिख रहे थे
03:24हे भगवान ये क्या हो गया
03:27ये तो जल गए बिमली
03:28सत्या नाश हो गया
03:30अब लाला मुझे कच्चा चबा जाएगा
03:34उफ करवा तो नहीं है
03:36पर स्वात अजीब है
03:37धुए जैसा लग रहा है
03:40रोमत तुझे पता है
03:42शेहर के लोग क्या पसंद करते हैं
03:43अजीब नाम वाली चीज़े
03:45मतलब ये कि ये जले हुए
03:48चिप्स नहीं है
03:48ये है स्मोक्ट तंदूरी बार्बिक्यू चिप्स
03:52हैं ये क्या बला है
03:54तू बस चुप रहना
04:08बाकी काउं वाले दरी पर है
04:10लाला बेचैन होकर टहल रहा है
04:13तभी मंगरू और बिमली प्रवेश करते हैं
04:16और उनके हाथ में बड़ी थालिया है
04:18जिनमें वो गहरे रंग के चिप्स है
04:24अरे ये क्या है
04:26चिप्स तो पीले होते हैं
04:28ये काले क्यों हैं
04:29मंगरू के पसीने छूटने लगे
04:31लाला की आखे गुस्से से लाल हो गई है
04:34मंगरू ये क्या जला हुआ कच्रा उठा लाया
04:37मेरी ना कटवा दी
04:44खेहरी है लाला जी
04:45कच्रा मत कहिए
04:46आपको पता भी है ये क्या है
04:48इसे बनाने में मंगरू जी को
04:50तीन घंटे धीनी आज पर तपस्या करनी पड़ी है
04:53तो ये जला हुआ नहीं है
04:56अरे साहब आप शहर के होकर भी ये नहीं पहचानते
05:00ये विलेज स्पेशल स्मोक्ट चार्कोल चिप्स है
05:03अमेरिका के लोग तो इसे डॉलर दे कर खाते है
05:06हमने सोचा रमेश बाबू आ रहे है
05:09तो साधा पीला चिप्स क्यों खिलाएं?
05:11कुछ हाई क्लास खिलाते हैं
05:16रमेश बाबू एक चिप्स उठाते हैं
05:18सब उन्हें देख रहे हैं
05:19मंगरू की सास रुकी हुई है
05:21रमेश बाबू से मूँ में डालते हैं
05:23चबाते हैं एक तम सन्नाटा चा जाता है।
05:29वाह! अद्बुद्र! क्या स्मोकी फ्लेवर है! एक डम तंदूर जैसा स्वादा रहा है।
05:36लाला जी ये तो कमाल है! बजार के पैकेट वाले चिप्स इनके सामने फेल हैं।
05:42सब महमान खापी रहे हैं। मंगरू और बिमली एक कोने में खड़े हैं।
05:48लाला घसीटा राम उनके पास आते हैं। हातों में नोटों की गड़ी लेकर।
05:54मान गए मंगरू तू तो छुपा रुस्तम निकला। रमेश बाबू ने तो जाते जाते दो किलो पैक भी करवा लिया।
06:02ये ले तेरे पैसे। और ये दस हजार रुपे इनाम।
06:08लाला जी सच बताऊं। मुझे लगा था आज मार पड़ेगी।
06:12अर पगले स्वाद जुबान में नहीं भरोसे में होता है। तूने और तेरी घरवाली ने जिस अंदाज में परोसा ना
06:21उसी ने स्वाद बढ़ा दिया। लेकिन हां अगली बार थोड़ा कम स्मोक करना एक दो तो सच में कडवे थे।
06:30लाला हसते हुए चले जाते हैं।
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