00:01कहानी शुरू होती है एक साधारन से दिखने वाले ग्रामी वी घर से
00:07लाखा एक पुरानी जंग लगी गन्ने का रस निकालने वाली मशीन को सामने के हिस्से में खीच रहा है
00:15मशीन के उपर एक बड़ी सी कीप वेल्डिंग की गई है
00:18वो हाफ रहा है
00:21अरे गौरी ओ गौरी जल्दी बाहरा तेरी किस्मत बदल दी आज मैंने
00:32गौरी साड़ी के पलू से हाथ पोचते हुए बाहर आती है
00:40वो काफी नाराज दिख रही है
00:42क्या हुआ क्यों पूरा महला सिर पर उठा रखा है और ये लोहे का कबार अब कहा से उठा लाए
00:47पिछले महीने जो आटोमेटिक गाए नहलाने की मशीन लाए थे
00:51उससे गाए तो नहीं नहाई पर मेरी कमर जरू तूट गई थी
00:57अरे भाग्यवान तू समझ नहीं रही ये कबार नहीं है ये विज्ञान है विज्ञान
01:03इसका नाम है श्री श्री एक हजार आठ आटोमेटिक गण्ना बिर्यानी कनवर्टर
01:08यही तो राज है शहर में एक विज्ञानिक मिला था मुझे भाग रहा था अमेरिका जाने के लिए
01:14उसने बताया कि गण्ने के अंदर जो रेशा होता है न अगर उसे सही तापमान और ट्रेशर पर घुमाया जाए
01:20तो वो चावल बन जाता है
01:21और गण्ने का मीठा रस वो मसालों के साथ मिलकर ग्रेवी बन जाता है बस उपर से गण्ना डालो नीचे
01:28से गर्मा गरम वेज बिर्यानी तयार
01:32तब ही भूरा नीम की दातून चबाते हुए अंदर आता है
01:38राम राम भाई लाखा ये क्या लोहे का भूत खड़ा कर दिया घर के सामने
01:44आ गया भूरा आजा आजा तू ही तो मेरा गवाह बनेगा
01:48भाई अब हमें बिर्यानी बनाने के लिए गंटों चूले के सामने नहीं जलना पड़ेगा
01:53बस खेट से गंटा लाओ, मशीन में डालो और दावत शुरू
02:00लाखा भाई मजाक अच्छा है पर गंटे से बिर्यानी ये तो वही बात हुई कि बैंस को चारा खिलाओ और
02:07वो सीधा रबड़ी दे
02:10सही कह रहा है बूरा, लाखा इस कबार को वापस देया, मैं आज आलू बैगन बना रही हूँ, चुपचाप खा
02:17लेना
02:18तुम दोनों को यकीन नहीं है न, ठीक है, गौरी जा अंदर से बिर्यानी मसाला का पैकेट और थोड़ा नमक
02:25ला, आज डेमो होगा, अभी के अभी
02:38इससे थोड़ा साफ भी किया है, कुछ गन्ने उसके पास पड़े थे, गौरी बाहे सिकोर के खड़ी हुई तमाशा देख
02:50रही थी, और उसके हाथ में मसालों का पैकेट भी है, भूरा चार पाई पर बैठा इंतजार कर रहा है
02:57देख गौरी, डाल इसमें मसाला
02:59गौरी मसाली को मशीन के एक छोटे से जंग लगे छेद में डालती है
03:04अब देखना जादू, भूरा हैंडल पकड़
03:12भूरा भारी लोहे का हैंडल घुमाना शुरू करता है, मशीन भयानक आवाज से निकालती है
03:21हाँ, यही आवाज है, यह मशीन के अंदर अडूओं को तोड रही है
03:27जा मेरे शेर, बिर्यानी बन के निकल
03:30मशीन जोर जोर से हिलती है, अचानक थोड़ा सा गाड़ा, भूरा धुआ निकलता है
03:37जिससे जली हुई चीनी की गंद आती है
03:40अचानक नीचे की नली से एक अजीब, चिपचिपा, भूरा सा प्रदार्थ नीचे रखे बर्तन में गिरता है
03:47यह मसाले मिले हुए कीचरदार भूसे जैसा दिखता था
03:51बस बस, बन गई
04:00तीनों बर्तन में देखते हैं, दस सेकें तक सन्नाटा रहता है
04:05लाखा भाई, यह बिर्यानी तो नहीं लग रही
04:08यह तो ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने गोबर में गरम मसाला मिला दिया हो
04:14अरे तू अनपढ है क्या, यह स्टीम वाली बिर्यानी है
04:18अभी ताजी है न, इसलिए ऐसी लग रही है, हवा लगेगी तो चावल खिल जाएंगे
04:24कैसा स्वाद है, थूप क्यों नहीं देते
04:28लाजवाब, क्या स्वाद है, वाह, गन्ने की मिठास और मसालों का तीखापन, उफ, अम्रित है अम्रित
04:35तुम लोग नहीं समझोगे, ये भविश्य का खाना है
04:43छे, ठो, लाखा भाई, ये तो भूसा है, मीठा भूसा, मेरे दांक में फस गया
04:52तुझे कदर नहीं है कलाकी, सुन, मुझे इस मशीन पर पूरा भरोसा है
04:56शायद आज सेटिंग थोड़ी गलत हो गई, कल मैं पूरे गाउं की दावत रखूँगा
05:01जब बड़ी मात्रा में बने गा, तब स्वाद आएगा
05:06दावत, पागल हो गयों क्या, कहाओ वाले तुम्हें जूतों से मारेंगे, अगर ये भूसा खिलाया तो
05:11तुझ चुप कर, मेरी मशीन की बेज़ती मत कर, कल दोपहर की दावत पक्की, मैं चाचा को न्योता देने जा
05:18रहा हूँ
05:18लाखा आर्त्म विश्वास से वहां से चला जाता है
05:23रात का समय, लाल्टीन जल रही है, लाखा सो रहा है, लेकिन गौरी की नींद उड़ी हुई है, वो रसोई
05:31में बैठी है, और तनाफ में दिख रही है
05:33ये आदमी मेरा घर बिकवा करी माने का, कल पूरे गाउं के सामने नाक कटेगी, वो आंगन में रखी मशीन
05:41को देखती है
05:41वो जे ही कुछ करना पड़ेगा, पती है मेरा, पागल है तो क्या हुआ, उसकी इस्जत मेरी इस्जत है
05:48वो रसोई में भारी चावल की बोरिया और सबजियों को चेक करती है
05:56आंगन को थोड़ा सजाय गया है, एक चटाई बिची है, लाखा ने नया कुर्ता भी पहना है
06:02वो काफी इंपोर्टन्ट लग रहा है, वही भूरा मशीन को फिर से सेट करने में उसकी मदद कर रहा है
06:08वही आंगन में चाचा और बाकी महमान बैठे है
06:13आईए चाचा, आईए, आज आप वो खाएंगे जो बड़े-बड़े शहरों में भी नहीं मिलता
06:19और्गेनिक शुगर केन बिरियानी
06:24क्या? केन वाली बिरियानी?
06:27अरे बेटा, केन तो प्लास्टिक की होती है, पचेगी कैसे?
06:32गौरी, ओ गौरी, थालिया लाओ
06:34गौरी थालिया ले कर बाहर आती है
06:38उठकी हुई लग रही है, लेकिन रहिस में तरीके से मुस्कुरा रही है
06:42जी, सब तयार है, बसा मशीन चालू तो करो
06:46लाखा गन्ने का एक बड़ा बंडल उपर डालता है, भूरा हैंडल घुमाना शुरू करता है
06:51गड़ गड़ गड़ गड़ आवाज आने लगती है
06:55देखिए चाचा, ये जो आवाज है, ये स्वाद के पकने की आवाज है
07:00मशीन के पीछे गौरी चुक्के से एक छिपा हुआ लीवर खीचती है, जिसे उसने ही सेट किया था
07:08और ये बिर्यानी तयार
07:11इस बार भूरे रंग के कच्रे के बजाए, मशीन की नली से नीचे परोसने वाले बर्तन में खिली-खिली रंगीन
07:19खुश्पूदार बिर्यानी गिरती है
07:21खुश्पू हर तरफ फैल जाती है
07:24अरे तेरी, लाखा भाई, ये तो, ये तो सच में चावल बन गए, खुश्पू तो देखो
07:32हैं? देखा, मैंने क्या कहा था, मैं जीनियस हूँ
07:38वा भाई लाखा, खुश्पू तो ऐसी आ रही है, जैसे मेरी नानी के हाथ का खाना हो
07:45परोस बेटा, परोस
07:47लाखा चाचा को परोस्ता है, चाचा एक निवाला लेते हैं
07:51अरवा, क्या स्वाध है, गन्ने से बनी है, पर मीठी नहीं है, मसाले एक दम बराबर, लाखा तू तो जादूगर
08:01है रे
08:04भाई मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा, शायद मशीन रात भर में सेट हो गई
08:16दावत अच्छी रही, लाखा गर्व से जूम रहा है, गौरी एक कोने में चुप-चाप देख रही है, उदासी से
08:23मुस्कुरा भी रही है
08:29सुभ लाखा मशीन को मूर्ती की तरह मान रहा है, उस पर पूल भी चड़ा रहा है, भूरा भी वही
08:36है
08:37भूरा, अब तो हम ये मशीन बेचेंगे नहीं, हम गाव में होटल खुलेंगे, लाखा की जादूई बिर्यानी, सोच कितना पैसा
08:45आएगा, मुझे और गन्ने लाने होंगे
08:49लाखा, बस करो, बहुत हो गया
08:53क्या बस करो, गौरी तुने देखा नहीं, कल चाचा ने उंगलिया चाट ली, ये मशीन सोने की चिडिया है
09:01वो मशीन सोने की चिडिया नहीं, लोहे का कबाड़ा ही है
09:06तु जलती है मेरी तरक्की से
09:09अच्छा, तो अभी बना के दिखाओ, भूरा, गुमाना सरा हैंडल
09:14लाखा एक गन्ना अंडर डालता है, भूरा हैंडल गुमाता है
09:17खड़-खड़-खड़-खड़-खड़-खड़-फुस
09:20बहर वही चिप-चिपा की चरदार सूखा भूसा निकलता है
09:24जो पहले दिन निकला था, कोई चावल नहीं, कोई बिर्यानी नहीं
09:29ये, ये क्या है? कल तो चावल निकले थे
09:35कल मशीन सही नहीं थी लाखा, कल मेरी मेहनत सही थी
09:39लाखा रुख जाता है और गौरी की ओर देखता है
09:43मतलब?
09:45तुम्हे क्या लगा? लोहे के डिब्बे में गन्ना डालने से बासमती चावल निकलेगा?
09:50वो बिर्यानी मैंने बनाई थी, रात भर जाक कर
09:53चावल चुनकर, मसाले पीसकर, दम लगा कर पकाई थी
09:57और सुबह चुपके से मशीन के नीचे वाली हांडी बदल दी थी
10:01जब तुम चाचा से बाते कर रहे थी
10:05क्या? तुने तुने ऐसा क्यों किया?
10:10क्योंकि मैं तुम्हारी जग हसाई नहीं देख सकती थी
10:13तुम मेरे पती हो, तुम सपने देखते हो अच्छी बात है
10:16पर लाखा, शौटकट के सपने हमेशा मूँ के बल गिरते हैं
10:21भाभी जीतो, देवी निकली लाखा भाई
10:28पर गौरी, तुमने मुझे कल क्यों नहीं बताया?
10:32मेरा जूट क्यों चलने दिया?
10:34ताकि तुम्हें अपनी गलती का हिसास हो
10:37लेकिन बेज़ती के बाद नहीं, प्यार के साथ
10:41मुझे लगा था मैं बहुत होश्यार हूँ
10:42मुझे लगा मैंने गावालों को बेवकूफ बना दिया
10:45पर असल में तो मैं खुद ही बेवकूफ बन रहा था
10:59किस्मत मशीन नहीं बदलती, इंसान की नियत बदलती है
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