00:00ट्रक ड्राइवर की भीड देशी मटन करी एक बहुती खुबसूरत और हरावरा गाव था उस गाव के किनारे नैशनल हैवे
00:09के पास शेरे पंजाब नाम का एक धाबा था
00:14उस धाबे के मालिक का नाम धरम सिंग था नाम में तो धर्म था लेकिन उसकी बुद्धी और नियत एकदम
00:21नीज और भरष्ट थी धरम सिंग बड़ा ही लालची और धोकेबाज इंसान था
00:27अपने धाबे पर ग्राहक की भीड जुटाने के लिए उसने बकाइदा एक ग्यांग पाल रखी थी
00:33धाबे के करीब आदा किलिमिटर दूर पर सडक के एक मोड पर धरम सिंग के कुछ आदमी चुपके से बड़े
00:39-बड़े पत्तर रख देते थे
00:45देजी से आने वाली गाडिया उन पत्तरों को देख कर अचानक ब्रेक मार कर रुख जाते थे
00:53जब ड्राइवर नीचे उतर कर पत्तर को किनारे हटाने की कोशिश करते थे
00:57तब धरम सिंग के आदमी बिलियों की तरफ पिचे से आते और गाडियों के टायर चाकू से फार देते या
01:04इंजन के तार काट देते
01:08बेचारे गाडिया कुछी दूर चलते ही धरम सिंग के ढबे के सामने दम तोड़ देती थे
01:16इत्तफाग देखिए दरम सिंग के ढाबे के बगल में ही एक मेकैनिक की दुकान और टायर पंजर की दुकान भी
01:23थी जो असल में धरम सिंग की ही थी
01:28धरम सिंग मासुमी एक का नाटक करते हुए
01:30अरे भाई गाड़ी रुख गई क्या कोई बात नहीं
01:33अमारा मेकानिक सुखी देख लेगा
01:37मेकानिक सुखी धरम सिंग का ही चेला था
01:39वो जो काम सो रुपे में होना चाहिए
01:41उसके वहाँ हजार रुपे वसुलता था
01:45जब तक गाड़ी ठीक होती तब तक भुख के मारे यातरी
01:49मजबुरन धरम सिंग के धाबे पर खाना खाते थे
01:52वहाँ की रोटिया पत्तर जैसे होती थी
01:54और उसका देशी मटन नजाने कपका बना होता था
01:58जो स्वाद में बेहत गटिया था
02:00लेकिन दाम फाइस्टर होटेल जैसा वसुल करता था
02:03लोग उसे कोस्ते हुए खाते थे
02:14उसी गाव में बल्देव नाम का एक ट्रक ड्रैवर रहता है
02:17बल्देव बहुती नेक और मेनेती इंसान था
02:20वो बहार धाबे में कभी खाना नहीं खाता था
02:24अगर उसे भूग लगती तो वो अपना ट्रक किनारे लगा कर
02:29अपने पास के छोटे से स्टव को और सामान से
02:33खुद ही ताजा खाना बनाता था
02:36बल्देव की पत्नी प्रिती खाना बनाने में बहुत माहिर थी
02:47बल्देव ने उससे कई तरह के मसाले और खाना बनाने का तरीके सीखे थे
02:53बल्देव को धरम सिंग के धोके बाजी के बारे में सब कुछ पता था
02:56लेकिन वह कौन लफड में पड़े सोचकर चुप रहता था
03:06एक दिन बल्देव दूर के इलाके से सामान उतार कर घर लोट रहा था
03:11तबी उसने देखा कि सड़क पर पत्तर रखे हुए है वो समझ गया
03:16ओहो धरम सिंग का ग्यांग फिर से काम पर लग गया है बोलकर हसा
03:22बल्देव ने ट्रक रोका और नीचे उतर कर पत्तरों को हटाने का नाटक किया
03:28तबी जाड़िये में छिपे दरम सिंग के दो आदमी दबे पाव ट्रक के पास आ गया
03:36जैसे ही वो टायर के पास पहुचे बल्देव ने बिजली की फूर्ती से पीछे मुड़कर दोनों के कॉलर पकड़ लिये
03:42क्यों भाईयो टायर से गुफतगू कर रहे हो क्या ऐसा जोर से कहा
03:47उसने अपने ट्रक की रसियों से उन दोनों को बान दिया और ट्रक के पीछे लोड शक्षन में फेक दिया
03:54फिर बिना कुछ हुए वो ट्रक चला कर सिधा धरम सिंग के धाबे के सामने पहुचा और जोर से ब्रेक
04:00मारा
04:00इंजन बंद होने जेसी आवाज की और नीचे उत्रा
04:06धरम सिंग मन ही मन में जश्न मनाने लगा अरे वा बड़ा ट्रक फसा है आस तो मोटी कमाई होगी
04:14वो बाहर आया और बोला ए बलदेव क्या हुआ भाई गाड़ी रुख गई क्या
04:19ए सुकी इदर आ बड़ी गाड़ी है रिपेर करानी है भाई
04:24बलदेव मुस्कुर आया और बोला हा दरम सिंग पता नहीं क्या हुआ तुम चिद्दा मत करो जब तक गाड़ी ठीक
04:30होती है मैं यहीं पर हूँ
04:34दरम सिंग ने लालस देते हुए कहा अरे बलदेव तब तक अंदर आकर हमारा देशी मतन करी और रोटी खालो
04:41बहुत मज़ा आएगा
04:44लेकिन बलदेव ने मना कर दिया नहीं भाई तुम्हारा मतन मुझे पज़ेगा नहीं मैं अपना खाना खुद बनाऊंगा
04:50बलदेव ने ट्रक के स्टो और ताजा मतन निकाला और हाइवे के किनारे खाना बनाना शुरू किया
05:05कुछी देर में ताजा मतन और मसालो की खुशबू हवा में फैल कर पूरे ढाबे में महेकने लगी
05:11अंदर धरम सिंग का घटिया खाना खा रहे बाकी ड्राइवर उस खुशबू से खिचे चले आए और बलदेव के पास
05:21जमा हो गए
05:21सब लोग बोले अरे बाई क्या मतन बना रहे हो क्या गज़ब की खुशबू है
05:27बलदेव ने मुस्कराते वे कहा ये मेरी पत्नी प्रीते के हाथों के मसाले का स्वाद है
05:31मैंने उससे ही सिखा है सभी लोग एक बर चक्के देखो
05:34सब को छोटी छोटी प्लेटों में चक्ने को दिया
05:37ड्राइवर स्वाद चकते ही दिवाने हो गए और बोले
05:40अरे भाई क्या टेस्ट है दरम सिंह का पत्तर जैसी रोटिया और गंदा खाना खाकर हमारा पेट खराब हो गया
05:47तुम धाबा क्यों नहीं खोल लेते
05:51तबी बलदेव ने सब के सामने सच बोल दिया
05:53अरे भाईयो आपका आइडिया काफी अच्चा है
05:56आप लोगों को दरम सिंह का असली चेरा पता नहीं
05:59ये पत्तर रखकर आपके टायर यही पंचर करवाता है
06:02जल्दी ही मैं मेरी बीवी के साथ इसी हाईवे पर एक धाबा खुलूंगा
06:07वहाँ पर स्वाद ही नहीं आपका स्वास्ता का खयाल भी रखा जाएगा
06:10दाम भी काफी कम रखूंगा
06:17धरम सिंह को बहुत गुस्सा आया
06:19ए बल्देओं मेरे ढाबे के सामने खड़े होकर मेरे ग्राहकों को भड़गा रहा है क्या
06:24मेरे बारे में जूट बोल रहा है क्या मैं तुझे जान से मार दूँगा
06:27और वो चिल्लाने लगा
06:31बल्देओं ने शान्ती से कहा
06:32मैं जूट नहीं बोल रहा हूँ धरम सिंह
06:34सब उतके साथ बात कर रहा हूँ
06:36सब लोग इधर आओ मेरे साथ
06:42और सब को लेकर ट्रक के पीछे गया
06:44जैसे ही सब ट्रक के पीछे भूचे
06:47वा धरम सिंह के दो आदमी बंदे हुए मिले
06:49सभी लोग चोग गए
06:52बल्देओं ने उन्हें खोला और पुझा
06:54बताओ पत्तर किसने रखे थे
06:56टायर किसने पंजर करने को बोला
06:58ऐसा पुझा उनसे
06:59ड्राइवर का गुसा देखकर दोनों आदमी डर गए
07:02और सच उगल दिया
07:03अरे सहाब ये सब धरम सिंह के कहने पर किया है
07:06हमें माफ कर दो
07:07और उन्होंने सब मान लिया
07:09ये सुनते ही ड्राइवर का गुसा
07:11साथवें आस्मान पर पहुझ गया
07:13उन्होंने धरम सिंह और उसके आदमीयों को पकड़ कर पीटा
07:16उसके धाबे का सारा घटिया खाना
07:18सामन बार फेक दिया
07:20धाबे का बोड़ भी उखाड़ कर फेक दिया
07:27उसे वहां से भगा दिया
07:34कुछी समय बाद बलदेवने अपनी पत्नी के नाम पर
07:37उसी हाइवे पर एक नया धाबा खोला
07:39पृती का धाबा
07:40महा की साफ सफाई और इमानदारी की वज़े से
07:43हर ड्राइवर वहीं रुखने लगा
08:03दो के बाद धरम सिंग गाव छुड़कर भाग गया
08:09बलदेव और प्रिती अपनी मेहनत और सच्चाई के दम पर बहुत काम्याब हो गए
08:16सीख
08:16दूसरों को तकलीद देकर कमाया गया पैसा कभी नहीं ठिकता
08:20मेहनत और सच्चाई ही इंसान को स्ताई सपलता और सम्मान दिलाती
08:25अहंकार और दोका हमेशा पतन की और ले जाता है
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