00:00ये वो भारत नहीं जिसमें मैं बड़ा हुआ जिसमें नफरत पूरे दिन चलने वाली प्रक्रिया बन चुकी है ये दोख ये पिड़ा है दिगज अबिनेता नसिरुदीन शाह की जो पूसते हैं क्या सवाल पूछना ही देश्टरो बन गया है तो उनसे कहना होगा हाँ नसीर
00:30एक पूरी पीड़ी ने मिर्जा गालिब और उर्दू को जाना पहचाना लेकिन आपको जशन उर्दू में बोलने का हक नहीं दोस्तों आपको मालूम है हुआ क्या है दरसल नसुदीन शाह को हाली में मंबई इनूर्सिटी के साहितिक आयोजन जशन उर्दू में बोलने के
01:00लेकर बहुत उटसाहित थे लेकिन 31 जनवरी के रात को उनके पास ये फोन आता है और कहा जाता है कि इस कारेकरम में उनकी उपस्तिती जरूरी नहीं
01:09उनकी हैरानी तब और बढ़की है जब उन्हें पता चलता है कि आयोजक ने दर्शकुस से ही ये कहा दिया कि नसीर ने खुद मना कर दिया है
01:17उनकी आलोजनात्मक टिपनियों को इसका कारण बताया है एक वरष्ट अधिकारी के हवाले से उन्होंने कहा कि वे देश के खिलाफ खुल कर बोलते हैं इसलिए उनका नाम हटा दिया गया
01:31नसीर कहते हैं कि हाँ खुद को विश्वगुरू मानने वालों की मैंने कभी तारीफ नहीं की बलके सवाल उठाए तो क्या सवाल पूछना ही देश दरू बन गया है
01:40शाहने पत्र में देश में मौजूदा राजसामाजिक और राजनितिक महल पर गहरी चिंता जताई है
01:46उन्होंने च्छातर कारे करताओ की लंबी ही रासत अप रादियों को मिलने वाली राहत, मौब, लिंचिंग, इतिहास और अन्य कोर्स में बदलाओ जैसे मुद्दो को उठाया है
01:56और कहा कि ये वो भारत में हैं जिसमें वो बड़े हुए हैं
02:01ने जॉर्ज और्विल की 1984 किताब का जिक्र करते हुए कि जिस समाज में महान ने ताकि प्रिशंचा ना करने को देश द्रोब बताया जाने लगे वो चिंता जनब है
02:12नसीर साब अब क्या कहें अब यही निव इंडिया है यही निव नॉर्मल जहां सच कहने पर सरकटने का खत्रा है
02:20लेकिन हमारे आपके जैसे लोगों के लिए चुप रहने में दम गुटने का खत्रा है इसलिए सारे खत्रे उठाने ही होंगे और बोलना ही होगा
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