00:00संसत की दहलीज पर चार फर्वरी की सुभह एक ऐसी दस्वीर दिखी जुसने सत्ता पक्ष के गलियारों में खलबली मचा दी
00:20और लूकतंद्र के सबसे बड़े मंदिर में एक बार फर महा संग्राम के संकेत दे दिये
00:26नेतो प्रतिपक्ष राहूल गांधी जब सदन के भीतर दाखिल हुए तो उनके हाथ में वही विवादित किताब
00:32Four Stars of Destiny थी जिसे लेकर पिछले दो दिनों से संसत में गतिरूद बना रहा
00:38ये किवले किताब नहीं बलकि राशनीती का वो विस्फोटक बारूध है जो कि भारत चीन सीमा विवाद और गलवान संगर्श के उन पन्नों को खोलने का दम रखती है
00:48जिनने सरकार अब तक बंद रखनी की कोशिश कर रही है
00:51रहुल गांधी की जिद और उनके हाथ में मौजूद वो अनपबलेश्ट आत्मक था
00:56इस बात की गवा है कि विपक्षबरक्षा जासे समवेदन शील मुद्दों पर सरकार को उसी के पूर्वसेना प्रमुक के शब्दों में घेरने के लिए आर पार के मूड में है
01:07आखिर रहुल गांधी इस किताब को पढ़ने के लिए इतने बेताप क्यों है और इसके पीछे उनकी ट्रणनीती क्या है इसे समझना बेहत ज़रूरी है
01:15जनरल एमेम नर्वणे ने अपने सात्म कथा में 2020 के उस काल घंड का जिकर किया जब लद्दाक की बरफीली चोटियों पर भारतिया और चीनी सैनेक आमने सामने थे
01:27रहुल गांधी का मानना है कि इस किताब में ऐसे कई खुलासे हैं जो कि सरकार के अधिकारिक बयानों और दावों की हवा निकाल देंगे
01:35विपक्ष का आरूप है कि सरकार ने गलवान में भारते जमीन खुने की बात चिपाई जबकि जनर्डल नर्वने की किताब कथे तौत पर उस दौरान लिये गए कठिन फैसलों और जमीनी हकीकत का एक अलग ही खाका खीचती है
01:49रहुल गांधी इस किताब के जरिये ये साबित करना चाहते हैं कि जब देश की सीमाओं पर संकट था तब नितित्व और सेना के बीच ताल मेल या आदेशों की क्या स्थी थी उनके लिए ये किताब एक ऐसा ब्रहमास्थ है जिससे वे प्रधान मंत्री के उस मशूर बयान
02:19पारिव संचालन नियमावली का नियम 349 स्पश रूप से कहता है कि कोई भी सदस्या सदन में ऐसी सामागरी नहीं पढ़ेगा जिसका सदन में वर्धमान एजंडे से कोई संबंध ना हूँ लेकिन असली पेंच सत्यापन यानि की ऑथन्टिकेशन को लेकर फसा
02:35संसदिय नियमों के मताबिक यदि कोई सदस्या किसी निजी दस्तावेज या फिर अपरिकाशित पांडोलिपी का हवाला देगा तो उसे उस दस्तावेज की पूरी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी
02:45इस पेकर उम्बेल्डा और सत्तापक्ष का तर्क है कि जिस किताब को सेना ने अप्तेखरी जंडी दी ही नहीं और जो सारवजनी करूप से बाजार में उपलब्ध नहीं है उसे सदन के रिकॉर्ड का हिस्सा क्यों बनाया जाए
02:57नियम ये भी कहते हैं कि अगर कोई सदस्या किसी दस्तावेश को कूट करता है उसे ले टेबल करना पड़ेगा ताकि उसकी सत्यता की जांच हो पाए
03:06रहुल गांधी के इस कदम ने सरकार के सामने एक बड़ी चुनाती खड़ी कर दी यदि वेसदन में इस किताब के अंश पढ़ेंगे तो उन्हीं साबित करना होगा कि उनके पास मौजूद प्रतियां असली है और वे रश्ट सुरक्षा से जुड़ी किसी गोपनिय जानका
03:36रहेंगे बलकि वे दस्तावीजों के जरिये सरकार की घेराबंदी करेंगे सदन में मौजूद नियम 352 और 353 भी इसे संदर्प में महत्वपून है जो सदस्यों को बिना किसी ठूस आधार के किसी पर व्यक्तिगत आरूप लगाने या बिना सत्यापन के संवेदन शील जा
04:06उनकी आवाज को एक बार फिर दबा दिया जाएगा ये पूरी लड़ाई अब सत्या और सत्या के उन दावों के भी जो सिमट गई जो कि गलवान की पहाडियों से शुरू होकर दिल्ली के संसत तक पहुची
04:36अपड़ से लेक्षिन अप्ड़ाइब के सवितागा ये जो में हम बार दिल्ली ओवाने अगर को एक पाल में हुची प्रहब कर देखरा है झाल कि एक खर दिल्ली शुरूस टार दिल्ली पिल्मॉ najजब दिल्यूद्स फर दिल्ली आवांे हैं वे ले को बार दोरिद स्वल
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