00:09बुद्वार की वो सुभा कोचीन एरपोर्ट के रनवे पर सन्नाटा लेकर आई थी जब कुवेत एरवेस की एक विशेश उडान
00:16ने वहाँ लैंड किया
00:17इस विमान में कोई हस्ता खिल खिलाता यात्री नहीं था बलकि इसमें 20 भारतियों के पार्त्रिफ शरीर थे जो विदेशी
00:24धर्ती पर छिड़ी जंग और संगहर्श की भेट चड़ गए
00:27इनमें तमिलनाडू के 37 वर्षिये संथान सेलवम क्रिश्नन भी शामिल थे जिनकी मौत एक ड्रोन हमले में हुई थी
00:39शेत्रिय तनाव के चलते इन शवों को वतन लाने में काफी देरी हुई
00:43इस तरासदी ने नकेवल 20 परिवारों को जार दिया बलकि ये भी सपष्ट कर दिया कि दूर देशों में चल
00:51रहे युद्ध की कीमत भारत को अपने मासूम नागरिकों की जान देकर चुकानी पड़ रही है
00:58जब ये विशेश विमान को लंबो के रास्ते कोची पहुँचा तो वहां मौजूद हर आँख नम थी
01:04अपनों का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए ये दृष्ट किसी भायावा सपने जैसा था
01:09संथान सेलवम कृष्णन जो रामनाथ पुरम के छोटे से गाउं मुथुकुल अथुर के रहने वाले थे
01:16अपने परिवार की खुशाली के सपने लेकर को वैद गये थे
01:19वहाँ एक वाटर प्लांट पर हुए अचानक हमले ने उनके जिन्दगी और उनके परिवार की उमीदों को एक पल में
01:26राख कर दिया
01:27संथान सेलवम के अलावा अन्य 19 भारतियों के बृत्यू अलग-अलग कारणों से हुई थी
01:32लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के उनमाद ने उनके अंतिम संसकार के लिए भी उनके पार्थिव शरीर को हफ़तों
01:40तक अपनों से दूर रखा
01:42भारतिय दूतावास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और वो लगातार कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर अन्य
01:50प्रभावितों की मदद में चुटा है
01:51मिडल इस्ट में जारी ये संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसकी तपिश समुद्र पार भारत
01:58तक महसूस की जा रही है
01:59अब तक आधिकारिक तोर पर आठ भारतियों की जान इस जंग के साए में जा चुकी है और एक नागरिक
02:06अब भी लापता है
02:07ये महज आकड़े नहीं है बलकि उन घरों के चिराग हैं जो गरीबी से लड़ने के लिए साथ समंदर पार
02:14गए थे
02:16पश्चिमेशिया में करीब एक करोड भारतिया अपनी आजीवी का कमाते हैं
02:19उनकी सुरक्षा आज भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है
02:23प्रधान मंतरी मोधी स्वयम खारी देशों के राष्टा ध्यक्षों से इस मुद्धे पर समवाद कर रहे हैं
02:30क्योंकि जंग का दाइरा बढ़ने का मतलब है करोडों जिंदगियों पर खत्रा
02:34विदेश मंतराले के अनुसार इस संकट पून स्थिती के बीच फरवरी से अब तक करीब पांच लाख यातरी मिडल इस
02:42से भारत लोट चुके हैं
02:43जो वहाँ व्यापता सुरक्षा और भै के माहोल को दर्शाता है
02:46युद्ध कभी भी किसी एक सीमा तक सीमित नहीं रहता
02:50वो उन घरों की चौकट तक भी पहुँच जाता है जो युद्ध ख्षेतर से हजारों मील दूर होते हैं
02:56कोचीन एरपोर्ट पर उन ताबूतों को देख ये हैसास और गहरा हो गया
03:00कि भारत अपने कर्मट युवाओं को खो रहा है
03:03ये नुकसान केवल उन परिवारों का नहीं है बलकि देश का है
03:08एक ओर जहां सरकार और दूतावास शवों को वापस लाने और घैलों की मदद के लिए दिनरा देख कर रहे
03:14हैं
03:15वहीं दूसरी और जंग की इस आग ने उन लाखों प्रवासियों के मन में अनश्चितता भरती है
03:21जो अपने खून पसीने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं
03:26संथान सेलवं कृष्णन जैसे युवाओं की शहादत हमें याद दिलाती है कि शांती की कीमत क्या होती है
03:32और युद्ध किस तरह बेगुनाह जिंदगियों का सौदा करता है
03:36आज कोच्ची की हवाओं में सिर्व गम नहीं है बलकि एक सवाल भी है
03:41कि आखिर कब तक हमारे देश के बेटों को परदेश में इस तरह के संघर्षों की बली चड़ना पड़ेगा
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