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Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी क्यों मनाई जाती है,जानें जया एकादशी का धार्मिक महत्व, इसकी व्रत कथा, पूजा विधि, और इस दिन क्यों व्रत रखा जाता है। इस वीडियो में जानिए जया एकादशी का पर्व, पौराणिक कहानी और इसे मनाने का सही तरीका।


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~PR.396~ED.120~

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Transcript
00:00हिंदु धर्म में एकादशीव रत
00:05का विशेष महत्व होता है अभर महीने आने वाली एकादशी भगवान विश्णु को समझ
00:10मर्पित होती है माग मास के शुक्ल पक्ष में पढ़ने वाली एकादशी को जया एकादशी
00:15कहा जाता है अब साल दोहजार चब्विस में जया एकादशी कवरत 29 जन्वरी के
00:20को रखा जाएगा मान्योता है किस देन वरत रखने और भगवान विश्णु की विडियो
00:25विधान से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नश्ट हो जाते हैं और मौक्ष की प्राप्ती होती है
00:30अब ऐसे माई आपको आज किस वीडियो में बताते क्या कि जया एकादशी क्यों मनाया जाता है
00:35और जया एकादशी की वरत को था क्या है
00:37लेकिन उसे पहले नमश्कार मैं सतोष और आपको
00:40स्काइब देख रहे हैं दरसल धार्मिक ग्रंथ पद्मपुरान के अनुसार स्वर्ग लोक
00:45में रहने वाले गंधर्व और पुषपवती नाम की अफसरा से कुछ फूल हो गई थी
00:50अब इसे क्रोधी थोकर देवताओं की राजा इंद्र ने उन्हें स्वर्ग से निकाल दिया और पिश्चाइब रहे हैं
00:55पिशाच यूनी मिजन्म लेने का श्राप दे दिया और विसर श्राप के कारण दोनों को
01:00हिमाले के दुर्गम शेत्र में रहना पड़ा जहां उन्हें अत्याधिक कश्ट जहिलने पड़े
01:05अब इसी दोरान माग के शुक्ल पक्च के एकादशी आई
01:10के कारण उस दिन वे केवल फल फुल ही खा सके और पूरी रात जाते रहे
01:15अब इस प्रकार अंजाने में ही उनसे एकादशी का वरत पूर्ण हो गया
01:20प्रिसव रत के प्रभाव सेवय श्राप से मुक्त हो गए और पुना अपने दिव्य स्वरूप में
01:25लॉट आए तब ही से माना जाता है कि जया एकादशी का वरत तो सभी कश्टों और नकाट
01:30करात्मक्ता से मुक्ति दिलाता है अब इसी कारण से भी जया एकादशी का वरत
01:35मनाय जाता है तो आई अब आपको वरत कथा के बारे में बता देते हैं
01:40दरसल एक समय की बात है जब अर्जुन्य भगवान श्री कृष्ण से प्रश्ण पूछा कि हे भगवन
01:45अब क्रिपा कर आप मुझे मा के शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्तुर दिलाता है
01:50तो विस्तार पुर्वक समझाईए माग शुक्ल पक्ष की एकादशी में किसे देवता की पूजा करने है
01:55अब करनी चेही तथा इस एकादशीरत की कथा क्या है भगवान श्री किष्ण कहते हैं
02:00भगवान श्री पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं
02:04भगवान कृष्ण ने
02:05कहा कि यति थी पापो को हरने वाली है इस एकादशी का वरत करने पर मनुश्य को जया है
02:10कभी प्रेत योनी में जन्म नहीं लेना पड़ता एक समय की बात है
02:15जब स्वर्गलोप में देव राज इंद्र राज्य करते थे
02:18देवगण परिजात वरिक्ष्ण ने
02:20परिशों से भरेवे नंदन गाउं में एक बार अफसराओं के साथ घूम रहे थे
02:24नंदन वन ने
02:25में उत्सव का आयोजन हो रहा था उसमें देवता रिशी मुनी सभी मौजूद थे
02:29अब उसमें गंद्र परिजात वरिक्ष्ण ने
02:30गंधर्व गा रहे थे तथा गंधर्व कञ्याय नृत्त कर रही थे
02:35गंधर्व के नृत्य का आनुंद ले रहे उसमें गंधर्व गान कर रहे थे जिसमें पुष्पदंत चित्र से
02:40सेन और उसका पुत्र ये तीन मुख्य कलाकार थे महीं चुत्र सेन की पत्नी का
02:45नाम मालिनी था मालिनी से को कन्या उत्पन हुई थी जो पुष्पवंति के
02:50नाम से विख्या थी वहीं पुष्पदंत गंधर्व के एक पुत्र था
02:55जिसको लोग मालिवान कहते थे
02:57मालिवान पुष्पवंति के रूप पर
03:00अत्यंत मोहित था कि दोनों भी इंद्र के लिए निर्ट्र करने के लिए आये थे इन दोनों
03:05का गान हो रहा था बिसके साथ अफसराएं भी आई थी
03:08परस्पर अनुराग के कारण ये थे
03:10ये दोनों मोह में बह गए अब एक दूसरे में खोने के कारण वो शुद्ध गान न गा सके
03:15कभी ताल भंग हो जाता तो कभी गीत बंध हो जाता अब इंद्र ने इस पर विचार किया
03:20और इसमें अपना आपमान समझकर क्रोधित हो गए इंद्र ने दोनों को श्राब दिया और कहा कि ओ मुझा
03:25मुर्खों तुम दोनों को धिकार है क्योंकि तुमने संगीत जैसी पवित्र
03:30साधना का तो अपमान किया ही है साथ ही सबा में उपस्थित गुरुजनों का भी अपमान
03:35किया है अब इंद्र भगवान के श्राब के प्रभाव से दोनों प्रित्वी पर हिमाले परवत के जंग
03:40में पिशाची जीवन व्यतीत करने लगे अब एक दिन पिशाच ने अपनी पत्नी पिशाच
03:45में पिशाची से कहा कि हमने कौन सा पाप किया है जिससे अब पिशाच योनी में प्राप्त हुई है
03:50नरक का कश्ट अत्यंत भयंकर है तता पिशाच योनी में बहुत दुख देने वाली है
03:55अब उस दिन उन दोनों ने सब प्रकार के अहार प्याग दिये जलपान तक नहीं किया
04:00जीव की हंसात नहीं की और यहां तक की फल भी नहीं खाया अब इससे दुखी होकर वो दोनों एक पीपल
04:05के पेड़ के पास बैट गए सुर्यास्त हो गया उन्हें नींद नहीं आई वे रात या फिर कोई सुख भी
04:10नहीं ले पाए वे रती या फिर कोई सुख भी नहीं पासके सुर्योदे हुआ
04:15द्वार श्रीका दिन आया उन पिशाचों के लिए द्वारा जयाक के उत्तम व्रत का पालन होगा
04:20अब उन्होंने रात में जागरण भी किया था अब इसके बाद से वो फिर से पहले जैसे हो गया
04:25और यही जया एक आदशी का वरत कता है तो दोस्तों फिलाल इस वीडियो में
04:30इतना ही आप सभी को जया एक आदशी की धेरो शुब कामना है
04:35कर दो जया एक रात कामना ही झालना है
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